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मथुराः जम्मू-कश्मीर पर केंद्र का कदम ऐतिहासिक, मगर कश्मीरियों के दिल में प्यार से मिलेगी जीत

News18 Uttar Pradesh
Updated: November 18, 2019, 10:27 PM IST
मथुराः जम्मू-कश्मीर पर केंद्र का कदम ऐतिहासिक, मगर कश्मीरियों के दिल में प्यार से मिलेगी जीत
मथुरा में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन और राज्य के हालात पर दो दिवसीय सेमिनार हुआ.

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मथुरा (Mathura) में विश्व मामलों की भारतीय परिषद द्वारा जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के पुनर्गठन को लेकर सेमिनार का आयोजन किया गया. इसमें वक्ताओं ने केंद्र सरकार (Union Government) के निर्णय के बाद भी कश्मीर के हालात सामान्य न होने पर चर्चा की.

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मथुरा. केंद्र की नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार ने 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन (Reorganization of Jammu and Kashmir) को लेकर ऐतिहासिक निर्णय लिया, लेकिन आज तीन महीने के बाद भी राज्य के हालात सामान्य नहीं हो सके हैं. देशभर में कश्मीर और कश्मीरियों को लेकर चर्चाएं हो रही हैं. मथुरा (Mathura) में भी जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन, धारा 370 हटाए जाने और राज्य के वर्तमान हालात को लेकर दो दिवसीय सेमिनार (Seminar on Kashmir) का आयोजन किया गया. सेमिनार के कई सत्रों में अपने विचार रखने वाले वक्ताओं ने कहा कि प्यार से ही कश्मीरियों के दिलों में जगह बनाई जा सकती है. दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार मथुरा के आरसीए कॉलेज में विश्व मामलों की भारतीय परिषद (Indian Council of World Affairs) ने आयोजित किया. इसका विषय जम्मू कश्मीर का पुनर्गठन, पाकिस्तान, चीन और विश्व था.

चीन को पाक से अलग कर न देखें
सेमिनार के पहले दिन कार्यक्रम की शुरुआत सुशील पंडित ने की. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का निर्णय ऐतिहासिक है. कश्मीर में रहने वाले तीन पीढ़ियों के मुख्यमंत्री कहते थे कि धारा 370 को कोई हाथ भी नहीं लगा सकता है. इसका कारण था राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी. आज सरकार ने यह फैसला लिया, पूरा विश्व इसमें हमारे साथ है. उन्होंने कहा कि चीन, पाक का इस्तेमाल करता है, इसीलिए उसे पाकिस्तान से अलग करके नहीं देखा जाए. कार्यक्रम में प्रो. एमएम अंसारी ने कहा कि कश्मीर में पिछले 100 दिनों से तमाम सुविधाएं बंद हैं, जिससे वहां की स्थिति दयनीय हो गई है. संचार माध्यम बंद होने से लोग परेशान हैं. कश्मीर की आंतरिक संरचना काफी खराब है. 5 अगस्त 2019 के बाद राज्य की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. मौके पर जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र के निदेशक डॉ. आशुतोष भटनागर ने भी अपने विचार रखे.

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन को लेकर हुए सेमिनार में उपस्थित लोग.


कश्मीरियों का दुख-दर्द जल्द दूर हो
सेमिनार में भाकपा नेता सुभाषिनी सहगल अली ने कहा कि 5 अगस्त के बाद से कश्मीर पर पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है. अब तक हालात सामान्य नहीं हुए हैं. इसलिए जल्द से जल्द कश्मीरियों का दर्द दूर हो, इसके प्रयास किए जाने चाहिए. सेमिनार के मुख्य अतिथि स्टॉप धन ने लद्दाख की चर्चा करते हुए कहा कि 1971 की लड़ाई के बाद हमने कुछ गांव वापस लिए, लेकिन इस क्षेत्र के विकास के बारे में तब भी नहीं सोचा गया. लद्दाख के लोगों को लगता था कि उनकी उपेक्षा हो रही है. लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं है. सेमिनार के दूसरे दिन मुख्य वक्ता डॉ. आशुतोष भटनागर ने कहा कि कश्मीर में अलगाववाद के लिए अब तक की सरकारें जिम्मेवार रही हैं. मुख्य अतिथि प्रो. मो. अरशद ने कहा कि धारा 370 को हटाने में जो एहतियात बरते जाने चाहिए थे, उस पर ध्यान नहीं दिया गया, इसलिए ऐसे हालात पैदा हुए. उन्होंने कहा कि बंदूक की नोक पर ज्यादा दिनों तक शासन नहीं किया जा सकता.

Discussion on Reorganization of Jammu and Kashmir in two-day seminar in Mathura
सेमिनार में अपने विचार रखते वक्ता.
दिलों में प्यार से निकलेगा हल
सेमिनार के दूसरे दिन के सत्र को संबोधित करते हुए कश्मीरी छात्रसंघ के संस्थापक नासिर खुहेमी ने कहा कि जंग और हथियार किसी मसले का हल नहीं है. उन्होंने मणिपुर और नागालैंड में धारा 371 का जिक्र करते हुए कहा कि कश्मीरियों के दिल में प्यार और विश्वास पैदा करके ही हम इस समस्या का हल निकाल सकते हैं. जरूरत है कि इस मसले पर राजनीति न हो. अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में डॉ. राजेश गौतम, डॉ. शरद सक्सेना, डॉ. रोशन लाल, डॉ. अंजूबाला अग्रवाल, कल्पना मिश्रा आदि मौजूद रहीं.

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First published: November 18, 2019, 10:27 PM IST
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