जानिए बांके बिहारी मंदिर में बने तहखाने की कहानी, क्यों उठ रही है इसे खोलने की मांग
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जानिए बांके बिहारी मंदिर में बने तहखाने की कहानी, क्यों उठ रही है इसे खोलने की मांग
जानिए बांके बिहारी मंदिर में बने तहखाने की कहानी, क्यों उठ रही है इसे खोलने की मांग

बताया जाता है कि साल 1971 में आखिरी बार खोले गए तहखाने के इतने लंबे समय तक बंद रहने से वास्तुदोष तो उत्पन्न हो ही सकते हैं, साथ ही जल रिसाव और गैस बनने से कोई बड़ी दुर्घटना भी घटित हो सकती है.

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मथुरा के बांके बिहारी मंदिर में बने तहखाने की खोलने की मांग की जा रही है. इसकी मांग मंदिर के सेवादार प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी ने उठाया है. उन्होंने मंदिर में चल रहे निर्माण और जीणोद्धार कार्य से पहले गर्भगृह के नीचे बने तहखाने को खुलवाकर मंदिर की संपत्ति को सुरक्षित करने की मांग की है.

50 साल से बंद है तहखाना

सेवायत गोस्वामी ने जिला प्रशासन द्वारा मंदिर के सुंदरीकरण के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि मंदिर के गर्भगृह के नीचे पिछले पचास साल से तहखाना बंद पड़ा है. उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में कई जगह पर जल रिसाव हो रहा है. इससे मंदिर की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न होगा. जल रिसाव के चलते तहखाने में सैंकड़ों सालों की संचित संपत्ति को भी नुकसान पहुंच सकता है.



हो सकता है वास्तुदोष उत्पन्न 
बताया जाता है कि साल 1971 में आखिरी बार खोले गए तहखाने के इतने लंबे समय तक बंद रहने से वास्तुदोष तो उत्पन्न हो ही सकते हैं. साथ ही जल रिसाव और गैस बनने से कोई बड़ी दुर्घटना भी घटित हो सकती है. उन्होंने कहा पूर्व में एक बार मंदिर परिसर में टाइल के नीचे मिले गढ्डे को आनन-फानन में भर दिया गया था, जो कि चिंताजनक बात है.

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