जन्माष्टमी विशेष: यहां कान्हा की पोशाक है हिन्दू-मुस्लिम सौहार्द की मिसाल

वृन्दावन के घर-घर में इन दिनों पोशाकों को पूरा करने का काम चल रहा है. कान्हा को पहनाई जाने वाली पोशाकों का काम अधिकतर मुस्लिम कारीगर करते हैं.

News18 Uttar Pradesh
Updated: September 2, 2018, 12:22 PM IST
जन्माष्टमी विशेष: यहां कान्हा की पोशाक है हिन्दू-मुस्लिम सौहार्द की मिसाल
मथुरा में जन्माष्टमी पर सजे बाजार Photo: News 18
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Updated: September 2, 2018, 12:22 PM IST
लीलावतार प्रेमावतार के जन्म का जैसे-जैसे समय नजदीक आता जा रहा है, वैसे-वैसे उनके श्रृंगार के लिए बननी वाली पोशाकों के काम मे तेजी आती जा रही है. भारत के साथ ही पूरे विश्व के मंदिरों में जन्मोत्सव के बाद कान्हा को नई पोषाक पहनाई जाती है. मथुरा वृन्दावन में ही बनी हुई पोशाकों को ही हर कोई पहनाना चाहता है, इसलिए पोशाकों का काम यहां साल भर होता है. जन्माष्टमी के मौके पर इन पोशाकों की डिमांड बढ़ जाती है और करीगर दिन-रात एक करके ऑर्डर्स पूरा करते हैं. इस बार कृष्ण जन्मस्थान पर भगवान कृष्ण को पीताम्बरी पोषक पहनाई जाएगी, जिनकी तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है.

वृन्दावन के घर-घर में इन दिनों पोशाकों को पूरा करने का काम चल रहा है. कान्हा को पहनाई जाने वाली पोशाकों का काम अधिकतर मुस्लिम कारीगर करते हैं. इन लोगों का मानना है कि प्रेम और कर्म का संदेश देने वाले भगवान कृष्ण की पोशाक बनाना उनके लिए बड़े ही हर्ष का विषय है.

मुस्लिम कारीगरों ने बताया कि उनका भी यही प्रयास रहता है कि उनके किए गए काम से कान्हा सुंदर से सुंदर दिखाई दें. हर कोई उनकी बनाई हुई पोशाकों की तारीफ करे. कान्हा को सुंदर दिखने के बाद जैसे लोग सुकून ओर शांति का एहसास करते हैं, उससे कही उनको सुख मिलता है.

एक तरफ जहां कारीगर इन पोशाकों को पूरा करने में लगे हुए हैं. वहीं बड़े-बड़े कारखाने तैयार होने वाली पोशाकों को फाइनल कर उनको पार्सल कर भेजने में लगे हुए हैं. अजय कुमार, मुकुल अग्रवाल और दीपक मालपानी पोषाक कारोबारी हैं. वह बताते हैं कि सुंदर और मनमोहक छवि में दिखने वाले मुरलीधर यूं ही इतने सुंदर दिखायी नहीं देते. इसके पीछे भी कारीगरों की बड़ी मेहनत होती है. सबसे पहले पोषक जो बनाई जाती है, उनको कागज पर उतारा जाता है. उसके बाद उसको कई हाथों से होते हुए एक सुंदर रूप में तैयार किया जाता है. इसमें कलर कंट्रास्ट का भी ख्याल रखा जाता है. साथ ही इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि पिछली बार की तैयार पोशाकों से इस बार की पोशाक कैसे अधिक सुंदर दिखयी देंगी.

(रिपोर्ट: नितिन कुमार)

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