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मकर संक्रांति पर रूठ जाती है सास और मनाती है बहू, दिलचस्‍प है ये परंपरा

मकर संक्रांति पर ब्रज में एक परंपरा प्रचलित है. इस दिन सास रूठती है बहू मनाती है.
मकर संक्रांति पर ब्रज में एक परंपरा प्रचलित है. इस दिन सास रूठती है बहू मनाती है.

Makar Sankranti 2021: ब्रज के जानकार योगेंद्र सिंह छोंकर बताते हैं कि ब्रज के लोक काव्‍य में भी सास और बहू का रिश्‍ता आमतौर पर टॉम और जेरी जैसा दिखता है. चाहे फाल्‍गुन की होली हो या सावन के झूले या सांझी के लोक काव्‍य, सभी में सास के प्रति कटुता देखने को मिलती है. लेकिन मकर संक्रांति एक ऐसा त्‍यौहार है जब यह इस कटुता को भरने का मौका बनकर आता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 14, 2021, 4:44 PM IST
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नई दिल्‍ली. मकर संक्रांति (Makar Sankranti) को देशभर में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है लेकिन ब्रज की बात ही अलग है. यहां हर एक त्‍यौहार पर अलग-अलग परंपराएं हैं और उन्‍हें  बड़े ही आनंद के साथ निभाया भी जाता है. मकर संक्रांति पर ऐसी ही एक परंपरा है सास के रूठने और बहू के मनाने की. ये परंपरा कई सदियों से चली आ रही है. कहा जाता है यशोदा मैया ने भी इसी तरह अपनी सास को मकर संक्रांति के दिन मनाया था. जिसके बाद से यह प्रेम के प्रतीक के रूप में परंपरा बन गई.

बेहद ही दिलचस्‍प इस परंपरा के बारे में ब्रज (Brij) के जानकार योगेंद्र सिंह छोंकर बताते हैं कि ब्रज के लोक काव्‍य में भी सास और बहू का रिश्‍ता आमतौर पर टॉम और जेरी जैसा दिखता है. चाहे फाल्‍गुन की होली हो या सावन के झूले या सांझी के लोक काव्‍य, सभी में सास के प्रति कटुता देखने को मिलती है. लेकिन मकर संक्रांति एक ऐसा त्‍यौहार है जब यह इस कटुता को भरने का मौका बनकर आता है. इस दिन रूठी हुई सास को मनाने की रस्‍म अदा की जाती है.

इस दिन बहू के मनाने के बाद सास उसे आर्शीवाद देती है और साल भर की गलतियों को माफ कर देती है..
Makar Sankranti 2021: इस दिन बहू के मनाने के बाद सास उसे आर्शीवाद देती है और साल भर की गलतियों को माफ कर देती है..




ऐसे रूठती है सास और मनाती है बहू
मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के दिन सास गुस्‍सा होकर अपने घर से निकल जाती है और किसी पड़ोसन के घर जा बैठती है. कहा जाता है कि पहले सासें अपने गांव के कूओं के पास जा बैठती थीं या गांव से शहर को जाने वाले रास्‍ते पर जा बैठती थीं. इसके बाद बहू अपनी हमउम्र तमाम महिलाओं के साथ लोटे में जल, सास के लिए नए कपड़े, श्रंगार का सामान, तिलकुट, गजक,रेबडी आदि लेकर सास को मनाने जाती है. ये सभी महिलाएं रास्‍ते भी गीत गाती हैं. सास के पास पहुंचकर बहू पैर पकड़ती है और सामान देकर उनसे क्षमा मांगती है. थोड़ी देर में सास अपना गुस्‍सा  भूलकर बहू को माफ कर देती है. उसके द्वारा लाया गया सामान प्रेम से लेती है, उसे गले लगाती है और वापस घर को लौट चलती है.

गांवों में आज भी होता है इस परंपरा का निर्वाह

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