मथुरा: कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके पुजारी ने किया श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर से ईदगाह हटाने का विरोध

मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि के स्वामित्व की मांग को लेकर एक याचिका दाखिल हुई है. (Photo: News 18)
मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि के स्वामित्व की मांग को लेकर एक याचिका दाखिल हुई है. (Photo: News 18)

महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता महेश पाठक (Mahesh Pathak) ने कहा कि 20वीं सदी में दोनों पक्षों के बीच समझौता होने के बाद मथुरा में मंदिर-मस्जिद का कोई विवाद नहीं है.

  • भाषा
  • Last Updated: September 28, 2020, 8:27 AM IST
  • Share this:
मथुरा. उत्तर प्रदेश के मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान (Shri Krishna Janmsthan) परिसर के पास स्थित शाही ईदगाह मस्जिद (Shahi Eidgah Masjid) को हटाने के लिए कोर्ट में याचिका दायर की गई है. रविवार को पुजारियों के एक संगठन ने इसकी निंदा की है. अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा ने 17वीं सदी की मस्जिद को हटाने के लिए कुछ लोगों द्वारा कोर्ट में याचिका दाखिल करने पर उनकी आलोचना की है. पुजारियों ने कहा कि ऐसे मुद्दे उठाकर कुछ लोग मथुरा के शांति-सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं.

महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेश पाठक ने कहा कि 20वीं सदी में दोनों पक्षों के बीच समझौता होने के बाद मथुरा में मंदिर-मस्जिद का कोई विवाद नहीं है. ऐसे में कुछ बाहरी लोग मंदिर-मस्जिद जैसे मुद्दे उठाकर मथुरा की शांति और सद्भाव को बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि दोनों समुदायों के बीच सद्भाव है और अगल-बगल में धार्मिक स्थल का अस्तित्व भावनात्मक एकजुटता का उदाहरण है.

इन्होंने दायर की है याचिका



गौरतलब है कि लखनऊ निवासी रंजना अग्निहोत्री समेत आधा दर्जन लोगों ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और शाही ईदगाह प्रबंध समिति के मध्य पांच दशक पूर्व हुए समझौते को अवैध बताते हुए उसे निरस्त कर मस्जिद की पूरी जमीन मंदिर ट्रस्ट को सौंपने का अनुरोध किया है. सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन ने शुक्रवार को मथुरा की एक अदालत में दाखिल की गई याचिका में कहा है कि 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान एवं शाही ईदगाह प्रबंध समिति के बीच हुआ समझौता पूरी तरह से गलत है तथा उसे निरस्त किया जाए.
जैन ने बताया कि जिस जमीन पर मस्जिद बनी है, वह श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट के नाम पर है. ऐसे में सेवा संघ द्वारा किया गया समझौता गलत है. इसलिए उक्त समझौते को निरस्त करते हुए मस्जिद को हटाकर मंदिर की जमीन उसे वापस करने की मांग की गई है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज