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मथुरा: मस्जिद के स्थानांतरण को लेकर दायर 2 याचिकाओं पर सुनवाई करेगी अदालत

इसकी सुनवाई की अगली तारीख 10 मार्च तय की गई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
इसकी सुनवाई की अगली तारीख 10 मार्च तय की गई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

जिला शासकीय अधिविक्ता संजाइ गौर ने कहा कि इनमें से एक याचिका वकील शैलेंद्र सिंह और चार अन्य लोगों ने दायर की थी. वहीं, अन्य याचिका हिंदू आर्मी (Hindu Army) प्रमुख मनीष यादव ने दायर की थी.

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मथुरा. कटरा केशव देव मंदिर (Katra Keshav Dev Temple) के निकट से शाही मस्जिद (Royal mosque) को स्थानांतरित करने मामले में दायर दो याचिकाओं को शनिवार को अदालत ने स्वीकार कर लिया. जिले के शासकीय अधिवक्ता से यह जानकारी मिली. सिविल जज (प्रवर वर्ग) नेहा बानौदिया ने याचिकाओं को स्वीकार कर लिया और इसकी सुनवाई की अगली तारीख 10 मार्च तय की. जिला शासकीय अधिविक्ता संजाइ गौर ने कहा कि इनमें से एक याचिका वकील शैलेंद्र सिंह और चार अन्य लोगों ने दायर की थी. वहीं, अन्य याचिका हिंदू आर्मी (Hindu Army) प्रमुख मनीष यादव ने दायर की थी.

दरअसल, मथुरा में शाही मस्जिद के अलावा अन्य कई मस्जिदों को लेकर भी विवाद चल रहा है. बीते साल श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही ईदगाह के मामले में भी मनीष यादव ने भगवान श्रीकृष्ण का वंशज बताते हुए अदालत में दावा पेश किया था. जिसमें उन्होंने 1967 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान की जमीन को लेकर शाही ईदगाह के साथ हुए समझौते की डिक्री (न्यायिक निर्णय) को रद्द कर ईदगाह को ध्वस्त करके उक्त जमीन कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट को वापस करने की मांग की थी.

सेवा संस्थान के सचिव को पक्ष बनाया था
गौरतलब है कि इससे पूर्व लखनऊ निवासी अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री आदि आधा दर्जन भक्तों ने भगवान की ओर से याचिका दाखिल कर यही मांगें जनपद की अदालत में रखी थीं. उन्होंने उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन, शाही ईदगाह मैनेजमेंट कमेटी के सचिव, श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के प्रबंधक न्यासी तथा श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव को पक्ष बनाया था.
अदालत में शोकावकाश घोषित कर दिया गया था


मनीष यादव ने भी अधिवक्ताओं के माध्यम से इन्हीं सब को प्रतिवादी बनाते हुए 15 दिसम्बर को एक दावा सिविल जज (प्रवर वर्ग) नेहा भदौरिया की अदालत में दाखिल किया था. जिसमें अदालत ने इस संबंध में 22 दिसंबर को पुन: सुनवाई तय की थी. मंगलवार को यादव अदालत में पेश हुए, लेकिन एक अधिवक्ता के आकस्मिक निधन के कारण अदालत में शोकावकाश घोषित कर दिया गया था.
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