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मथुरा में शाही ईदगाह के सर्वे के लिए दाखिल हुआ प्रार्थना पत्र, कोर्ट 1 जुलाई को करेगी सुनवाई

कोर्ट ने मथुरा की अदालत को चार महीने में सुनवाई पूरी कर आदेश करने का निर्देश दिया है. (फाइल फोटो)

कोर्ट ने मथुरा की अदालत को चार महीने में सुनवाई पूरी कर आदेश करने का निर्देश दिया है. (फाइल फोटो)

इससे पहले गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद से जुड़े मूल वाद में अधीनस्थ अदालत को याची की ओर से दाखिल दो अर्जियों का निस्तारण जल्द करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने मथुरा की अदालत को चार महीने में सुनवाई पूरी कर आदेश करने का निर्देश दिया है.

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मथुरा. श्रीकृष्‍ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह के मामले में अब सर्वे के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया है. श्री कृष्ण विराजमान के वंशज होने का दावा करने वाले मनीष यादव ने मथुरा कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र दिया है. सिविल जज सीनियर डिवीजन के न्यायालय में दिए प्रार्थना पत्र में शाही ईदगाह के अंदर अधिवक्ता कमिश्नर नियुक्त कर वीडियोग्राफी सर्वे कराने की मांग की है. इस पर एक जुलाई को सुनवाई होगी. बता दें कि प्रार्थी मनीष यादव, महेन्‍द्र प्रताप सिंह और दिनेश शर्मा ने एक ही तरह की अलग-अलग याचिका लगाई थी. इनमें कोर्ट कमिश्‍नर नियुक्‍त करके ईदगाह की वीडियोग्राफी कराए जाने की मांग की गई थी. कोर्ट ने याचिका को स्‍वीकार कर लिया है. इसके साथ ही सभी वादियों को एक ही तारीख एक जुलाई दी है.

मनीष यादव की तरफ से दाखिल किए गए इस प्रार्थना पत्र पर आज सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में सुनवाई हुई. इसके अलावा केशव देव जी विराजमान मामले में वाद संख्या 950 /2020 के पक्षकार महेंद्र प्रताप ने भी प्रार्थना पत्र दाखिल किया था. मनीष यादव और महेंद्र प्रताप सिंह के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करने के बाद न्यायालय ने केस की सुनवाई की अगली तारीख 1 जुलाई दे दी. श्रीकृष्ण जन्मभूमि व शाही ईदगाह मामले में लगातार शाही ईदगाह के सर्वे की मांग का सचिव श्रीकृष्ण जन्मस्थान ने स्वागत किया है और कहा है कि सत्य को सामने लाने के लिए सर्वे जरूरी है. और इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए.

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मनीष यादव की तरफ से कोर्ट में दिए प्रार्थना पत्र में लिखा है कि ईदगाह में प्राचीन शिलालेख व पौराणिक साख्य मौजूद हैं जो ईदगाह में दबा दिए गए हैं. और पौराणिक संख्या को अदृश्य कर दिया गया है. इस स्थिति को अदालत के समक्ष लाना आवश्यक है. किसी वरिष्ठ अधिवक्ता को कमिश्नर नियुक्त कर मौके की रिपोर्ट मंगाई जाए. इससे पहले गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद से जुड़े मूल वाद में अधीनस्थ अदालत को याची की ओर से दाखिल दो अर्जियों का निस्तारण जल्द करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने मथुरा की अदालत को चार महीने में सुनवाई पूरी कर आदेश करने का निर्देश दिया है.

Tags: Allahabad high court, Bjp government, CM Yogi, Mathura Krishna Janmabhoomi Controversy, Mathura news, Mathura police, UP Police उत्तर प्रदेश, Yogi government

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