नंदगांव मंदिर सेवायत ने उठाए सवाल, 12 बजे कौन पढ़ता है नमाज, षड़यंत्र की है आशंका

मथुरा के बरसाना ि‍स्थित नंदगांव के नंद महल मंदिर में नमाज पढ़ने की तस्‍वीरें वायरल होने पर मंदिर पुजारी कान्‍हा गोस्‍वामी ने सवाल उठाए हैं

बरसाना के नंदगांव के नंद महल मंदिर (Nand Mahal Temple) में मुस्लिम (Muslim) युवकों द्वारा नमाज पढ़ने के मामले में सेवायत कान्‍हा गोस्‍वामी (Kanha Goswami) का कहना है कि पूरे घटनाक्रम को देखने के बाद ऐसा लगता है कि इनका उद्धेश्‍य नमाज (Namaz) पढ़ना न होकर किसी षड़यंत्रकारी योजना के तहत मंदिर में नमाज की तस्‍वीरें खिंचवाना रहा होगा.

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मथुरा. बरसाना स्थित नंदगांव के नंद महल  मंदिर (Nand Mahal Temple) में नमाज पढ़ने का मामला तूल पकड़ चुका है. वहीं पुलिस ने आरोपी फैजल (Faisal) को दिल्‍ली के जामिया नगर से गिरफ्तार भी कर लिया है. आरोपी से पूछताछ की जा रही है. इसी बीच फैजल के खिलाफ पुलिस में शिकायत देने वाले नंद मंदिर के सेवायत कान्‍हा गोस्‍वामी (Kanha Goswami) ने आरोपियों के नमाज की तस्‍वीरों को लेकर सवाल उठाए हैं. साथ ही किसी सांप्रदायिक साजिश (Communal Conspiracy) का भी अंदेशा जताया है.

न्‍यूज18 हिंदी से बातचीत में कान्‍हा गोस्‍वामी ने कहा कोई भी व्‍यक्ति सिर्फ पांच मिनट में नमाज (Namaz) कैसे पढ़ सकता है. उन्‍होंने बताया कि 29 अक्‍तूबर को सुबह पौने 12 बजे फैजल सहित चार लोग नंद महल के गेट नंबर एक पर पहुंचे थे. जिनमें से दो लोगों के हिंदू नाम और दो के मुस्लिम नाम बताए गए. इसके बाद हुई बातचीत का वीडियो कान्‍हा गोस्‍वामी ने अपने फोन में रिकॉर्ड करवाया. जिसका समय 11 बजकर 59 मिनट है. इस बातचीत के तुरंत बाद जब कान्‍हा गोस्‍वामी मंदिर में भोग लगाने गए और पांच से सात मिनट में वापस लौटे तब तक ये चारों मंदिर से जा चुके थे. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि कोई भी व्‍यक्ति पांच मिनट में नमाज कैसे पढ़ सकता है. इसके अलावा जो मुस्लिम धर्म के जानकारों का कहना है कि दोपहर में 12 बजे नमाज नहीं पढ़ी जाती. सामान्‍य दिनों के अलावा जुमे की नमाज भी 12:45 के बाद ही पढ़ी जाती है. फिर इन लोगों ने बिना नमाज के वक्‍त के नमाज पढ़ते हुए तस्‍वीरें क्‍यों खिंचवाईं.

कान्‍हा कहते हैं कि ऐसा अनुमान है कि इन लोगों ने किसी षड़यंत्र या सांप्रदायिक साजिश के तहत मंदिर में नमाज पढ़ते हुए तस्‍वीरें खिंचवाई हैं. पूरे घटनाक्रम को देखने के बाद ऐसा लगता है कि इनका उद्धेश्‍य नमाज पढ़ना न होकर किसी षड़यंत्रकारी योजना के तहत मंदिर में नमाज की तस्‍वीरें खिंचवाना रहा हो.

सेवायत बताते हैं कि जब इन लोगों ने मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति मांगी तब भी ये बहुत भक्ति भाव का प्रदर्शन कर रहे थे. इन्‍होंने मौजूद लोगों को रामचरितमानस की चौपाई सुनाने के साथ ही कृष्‍ण को लेकर तमाम श्रद्धापूर्ण बातें कहीं. इसके साथ ही मंदिर के पुजारियों के सामने न कोई तस्‍वीर खिंचवाई और न ही कोई वीडियो बनाई. ये सब महज पांच मिनट के अंदर किया गया काम है.

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