Mathura News: BJP ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नेताओं के साथ वृंदावन में की बैठक, इस मुद्दे पर हुई चर्चा

यह बैठक वृंदावन के ​केशवधाम में हुयी. (सांकेतिक फोटो)

बैठक (Meeting) के दौरान बंसल ने पार्टी कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक अनुकूल माहौल बनाने के लिए तैयार करने पर जोर दिया.

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    मथुरा. भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शनिवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पार्टी पदाधिकारियों की बैठक (Meeting) की. इसका उद्देश्य प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में पार्टी की संभावनाओं को बेहतर करना था. यह बैठक वृंदावन के ​केशवधाम में हुयी, जिसकी अध्यक्षता पार्टी के प्रदेश महासचिव(संगठन) सुनील बंसल ने की. बैठक के दौरान बंसल ने पार्टी कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक अनुकूल माहौल बनाने के लिए तैयार करने पर जोर दिया. सूत्रों ने कहा कि बैठक के दौरान, पार्टी के नेताओं ने महामारी से निपटने में सरकार की कुछ कथित चूक को लेकर लोगों के बीच कथित नाराजगी को शांत करने के लिए सक्रिय कदम उठाने का फैसला किया.

    वहीं, कल खबर सामने आई थी कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव 2022 में होने हैं, लेकिन हाल में हुए पंचायत चुनाव ने एक बार फिर बड़े दलों की पोल खोल दी. पंचायत चुनाव में पहली बार राजनीतिक दलों ने जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए अधिकृत प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन अच्छी खासी संख्या निर्दलीय की रही. इस उठापटक ने राजनीतिक दलों को छोटे दलों की ओर देखने को फिर से मजबूर किया है. उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पहले ही साफ संकेत दे चुके हैं.

    करीब 290 पंजीकृत दलों ने अपने उम्मीदवार उतारे थे
    राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सभी पार्टियों की कोशिश रहेगी कि छोटे दलों के साथ समझौता हो. बीजेपी की दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह का अपना दल (सोनेलाल) और निषाद पार्टी के नेताओं से मिलना बताता है कि गठबंधन पॉलिटिक्स शुरु हो चुकी है. भारतीय जनता पार्टी के मुकाबले अपनी मजबूती साबित करने के लिए उत्तर प्रदेश के सभी प्रभावी दलों को भी गठबंधन की जरूरत महसूस होने लगी है. चूंकि इस राज्य में छोटे-छोटे कई दल जातियों की बुनियाद पर ही अस्तित्व में आये हैं, इसलिए उनका समर्थन फायदेमंद हो सकता है.  वैसे तो उत्तर प्रदेश में वर्ष 2002 से ही छोटे दलों ने गठबंधन की राजनीति शुरू कर जातियों को सहेजने की पुरजोर कोशिश की है, लेकिन इसका सबसे प्रभावी असर 2017 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिला. जब राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय दलों के अलावा करीब 290 पंजीकृत दलों ने अपने उम्मीदवार उतारे थे.

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