Mathura News: सेना में भर्ती के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, तीन गिरफ्तार

एसएसपी ने बताया कि मामले में नामजद तीन आरोपियों सोनू (24), महेंद्र सिंह (26) और शरद उर्फ देवव्रत (36) को गिरफ्तार कर लिया गया है.(प्रतीकात्मक तस्वीर)

एसएसपी ने बताया कि मामले में नामजद तीन आरोपियों सोनू (24), महेंद्र सिंह (26) और शरद उर्फ देवव्रत (36) को गिरफ्तार कर लिया गया है.(प्रतीकात्मक तस्वीर)

पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर (Gaurav Grover) ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि फौज में भर्ती कराने के नाम पर युवकों से ठगी की जा रही है.

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मथुरा. मिलिट्री इंटेलीजेंस (Military Intelligence) से मिली सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने सेना में भर्ती के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर (Gaurav Grover) ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि फौज में भर्ती कराने के नाम पर युवकों से ठगी की जा रही है. उन्होंने बताया कि मथुरा के फरह थाना पुलिस (Farah Thana Police) को शिकायत मिली थी. शिकायतकर्ता ब्रजमोहन ने बृहस्पतिवार को दी शिकायत में कहा था कि कुछ लोगों ने उसके बेटे को सेना में भर्ती कराने के नाम पर एक लाख 10 हजार रुपये ले लिये और फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिया. इसके बाद वे चार लाख रुपये और मांग रहे थे.

एसएसपी ने बताया कि मामले में नामजद तीन आरोपियों सोनू (24), महेंद्र सिंह (26) और शरद उर्फ देवव्रत (36) को गिरफ्तार कर लिया गया है. उन्होंने कहा कि इनके अन्य राज्यों में भी तार जुड़े होने को लेकर जांच की जा रही है.

 39 जीटीसी रेजिमेंट का कैप्टन बताने लगा

वहीं, कुछ इसी तरह की खबर बीते मार्च महीने में वाराणसी में सामने आई थी. तब उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सेना का फर्जी अधिकारी बनकर लोगों को चूना लगाने वाले शातिर ठग को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. वाराणसी के शिवपुर के रहने वाले राजवीर सिंह पर आर्मी में भर्ती करवाने के नाम पर लाखों की ठगी का आरोप है. पुलिस के मुताबिक, राजवीर ने वर्ष 2008 में आर्मी में भर्ती होने की परीक्षा दी थी लेकिन पास नहीं हो सका. इसके बाद उसके शातिर दिमाग में फर्जी आर्मी अफसर  बनने का आइडिया आया और उसने लोगों को विश्वास दिलाने के लिए आर्मी की ड्रेस सिलवा ली. इसके बाद वो सबको खुद को वाराणसी कैंटोनमेंट में स्थित 39 जीटीसी रेजिमेंट का कैप्टन बताने लगा.
इसे पकड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी

नकली आर्मी अफसर बनने के बाद राजवीर ने सेना में नौकरी दिलाने के नाम पर शिकार ढूंढना शुरू किया. इस दौरान बेरोजगारी की मार झेल रहे कुछ युवा उसके झांसे में आ गए. इनमें से एक वाराणसी के ही लोहता निवासी अमरनाथ यादव से उसने 14 लाख रुपये आर्मी में नौकरी दिलाने के नाम पर ले लिये. बाद में राजवीर ने इसी तरह कई और लोगों को भी बेवकूफ बनाकर उनसे लाखों रूपये ऐंठे. इतना ही नहीं राजवीर ओएलएक्स पर भी आर्मी का जवान बनकर लोगों को ठगने लगा. आर्मी इंटेलिजेंस को जब इसकी भनक लगी तो उन्होंने इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस से की जिसके बाद एसटीएफ को इसे पकड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.

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