मथुरा: सारस्वत समाज ने किया रावण दहन का विरोध, बताया- ब्रह्म हत्या के समान

मथुरा में सारस्वत समाज के लोगों ने किया लंकेश रावण का पूजन
मथुरा में सारस्वत समाज के लोगों ने किया लंकेश रावण का पूजन

Mathura News: यमुना किनारे सारस्वत समाज के लोगों ने रावण का पुतला दहन किए जाने की परंपरा पर रोक लगाने की मांग की. साथ ही उन्होंने प्रखंड विद्वान रावण का पूजन किया. इस अवसर पर लंकेश मंडल के संयोजक ओमवीर सारस्वत ने कहा कि हिंदू पद्धति में मृत व्यक्ति का अंतिम संस्कार करने के बाद बार-बार उसके पुतले का दहन करना मान्य नहीं है.

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मथुरा. 25 अक्टूबर यानी रविवार को पूरे देश में दशहरा (Dussehara) का पर्व बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है. इस बार कोविड-19 के चलते अधिकतर जगह पुतला दहन के कार्यक्रम संपन्न नहीं हो रहे हैं, लेकिन आमतौर पर रावण (Ravana) के पुतले दहन के साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व को मानते हुए लोग बड़े उल्लास और उमंग के साथ दशहरा का पर्व मनाते थे. लेकिन कान्हा की नगरी मथुरा (Mathura) में दशहरा के पर्व पर सारस्वत समाज के लोगों पिछले कई सालों से  रावण का पूजन करते हुए आ रहे हैं और रावण के पुतला दहन लीला का विरोध करते हुए इस पर रोक की मांग भी उनके द्वारा लगातार की जाती है.

विजयादशमी पर हुआ रावण का पूजन

आज भी यमुना किनारे सारस्वत समाज के लोगों ने रावण का पुतला दहन किए जाने की परंपरा पर रोक लगाने की मांग की. साथ ही उन्होंने प्रखंड विद्वान रावण का पूजन किया. इस अवसर पर लंकेश मंडल के संयोजक ओमवीर सारस्वत ने कहा कि हिंदू पद्धति में मृत व्यक्ति का अंतिम संस्कार करने के बाद बार-बार उसके पुतले का दहन करना मान्य नहीं है. भगवान राम के आचार्य महादेव के परम भक्त प्रकांड विद्वान रावण का पुतला दहन करना ब्रह्म हत्या से कम नहीं है. उन्होंने कहा कि हमें भगवान राम के आदर्शों का पालन करते हुए रावण का पुतला दहन नहीं करना चाहिए. भगवान राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए लंकेश से पूजन कराया था. वह स्वयं जानकी जी को साथ लेकर पूजन करने के लिए आए थे तो फिर हमारी हिंदू समाज के लोग किस बुराई के कारण उनका प्रतिवर्ष पुतला दहन करते हैं.



मृत व्यक्ति के पुतले का दहन अपमान
हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार मृत व्यक्ति का पुतला दहन करना एक अपमान की श्रेणी में आता है, जिसकी कानून भी इजाजत नहीं देता है. हमारे संविधान में भी किसी व्यक्ति की धार्मिक आस्थाओं को ठेस पहुंचाना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है. समाज का कुछ वर्ग महाराज दशानन के पुतला दहन को करके समाज के एक वर्ग का और उनकी धार्मिक आस्थाओं का अपमान करते हैं. यह अशोभनीय है.
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