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मथुरा: छह मुस्लिम समेत दस शरणार्थी चाहते हैं भारत की नागरिकता

भाषा
Updated: January 15, 2020, 9:57 PM IST
मथुरा: छह मुस्लिम समेत दस शरणार्थी चाहते हैं भारत की नागरिकता
पाकिस्तान से आए 10 शरणार्थियों को चाहिए भारत की नागरिकता

पाकिस्तान (Pakistan) में हिन्दुओं (Hindu) का हर प्रकार से उत्पीड़न किया जाता है. हिन्दू परम्परा के अनुसार पुरुषों को सिर पर शिखा (चोटी) नहीं रखने दी जाती तो महिलाओं के माथे पर बिन्दी लगाने पर ऐतराज किया जाता है.

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मथुरा. केंद्र सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship amendment law) लागू किए दिए जाने के बाद उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मथुरा (mathura) जनपद से 4 पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थियों सहित कुल 10 लोगों ने भारतीय नागरिकता पाने के लिए आवेदन किया है.

30 साल से भारत में रह रही है महिला
इनमें से चार हिन्दू वे हैं, जो पाकिस्तान में ही पैदा हुए और वहीं रहते आए थे. लेकिन समय के साथ बढ़ते अत्याचारों के बाद भारत आ गए और फिर बार-बार वीजा अवधि बढ़वाते हुए यहीं रहने लगे. इनमें एक महिला को तो यहां रहते हुए 30 वर्ष हो चुके हैं. जबकि तीन अन्य को भी 10 से 15 साल बीत चुके हैं.

पाकिस्तान में हमेशा बना रहता है अपहरण का डर

सरकारी सूत्रों के अनुसार, स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) को मुहैया कराई गई जानकारी के अनुसार 62 वर्ष की राधाबाई वर्ष 1989 में भारत आई थीं. उस समय उनकी उम्र मात्र 32 वर्ष थी. वह अपने पति के साथ भारत आई थीं. उनके पति की मौत हो चुकी है. उनके दो पुत्र व तीन पुत्री हैं. उन्होंने बताया है कि पाकिस्तान में हमेशा अपहरण का डर बना रहता था.

पाकिस्तान में महिलाओं को नहीं लगाने देते बिंदी
इसी तरह वृंदावन में रहने वाली जयाबाई कराची से यहां तब आई थीं जब होली के दिन ही उनके चचेरे भाई को सरेआम गोली मार दी गई थी. उनके दो पुत्र आनन्द व ऋषिकेश हैं. उनके मुताबिक, पाकिस्तान में हिंदुओं का हर प्रकार से उत्पीड़न किया जाता है. हिंदू परम्परा के अनुसार, पुरुषों को सिर पर शिखा (चोटी) नहीं रखने दी जाती तो महिलाओं के माथे पर बिन्दी लगाने पर ऐतराज किया जाता है. मंदिरों में जाने से रोका जाता है.
6 मुस्लिम महिलाएं भी चाहती है भारत का वीजा
जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्र ने बताया, ‘भारतीय नागरिकता चाहने वाले जनपद में रह रहे विदेशी नागरिकों में कुल 10 व्यक्ति शामिल हैं, जो सभी पाकिस्तानी नागरिक हैं और यहां लंबे समय से रह रहे हैं. इनमें से 4 हिंदू हैं और 6 मुस्लिम महिलाएं हैं, जो मूलतः पाकिस्तानी नागरिक हैं और निकाह के बाद यहां आई हैं.’

स्थानीय अभिसूचना इकाई के प्रभारी निरीक्षक केपी कौशिक ने बताया, ‘इस कानून के तहत सीधे तौर पर पाकिस्तान, अफगानिस्तान व बांग्लादेश में रह रहे अल्पसंख्यक (हिन्दू, जैन, सिख, बौद्ध, पारसी और ईसाई) शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्राविधान है. लेकिन अन्य के बारे में जो भी निर्णय लेना होगा, सरकार ही लेगी. हमने इस बारे में मांगी गईं सभी संबंधित सूचनाएं सरकार को भेज दी हैं.’

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First published: January 15, 2020, 8:50 PM IST
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