ऐसा समाज बनना चाहिए जिसमें राष्ट्रवाद कूट-कूटकर भरा हो: आरएसएस प्रमुख मोहन राव भागवत

संघ प्रमुख मोहन राव भागवत ने कहा कि आज समाज में जितनी भी जातियां हैं सभी ने अपने संगठन बना रखे हैं. हमारा मकसद उन तक पहुंचना होना चाहिए. उनमें सद्भाव पैदा कर एक ऐसा समाज तैयार किया जाए जिसमें राष्ट्रवाद का भाव कूट-कूटकर भरा हो.

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 29, 2019, 11:58 PM IST
ऐसा समाज बनना चाहिए जिसमें राष्ट्रवाद कूट-कूटकर भरा हो: आरएसएस प्रमुख मोहन राव भागवत
ऐसा समाज बनना चाहिए जिसमें राष्ट्रवाद कूट-कूटकर भरा हो: आरएसएस प्रमुख मोहन राव भागवत. (फाइल फोटो)
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Updated: July 29, 2019, 11:58 PM IST
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सद्भावना समिति की द्विदिवसीय बैठक के समापन सत्र को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन राव भागवत ने कहा कि आज समाज में जितनी भी जातियां हैं सभी ने अपने संगठन बना रखे हैं. हमारा मकसद उन तक पहुंचना होना चाहिए. उनमें सद्भाव पैदा कर एक ऐसा समाज तैयार किया जाए जिसमें राष्ट्रवाद का भाव कूट-कूटकर भरा हो.

उन्होंने कहा, ‘‘हमें हर वर्ग में अपने संबंध इस तरह बनाने हैं कि लोग एक-दूसरे के घरों पर जाकर उनके साथ भोजन कर सकें. उनके दुख दर्द में शामिल हों. समाज में जो भी कुरीतियां हैं उन्हें दूर किया जाए. समाज को संगठित करने के लिए सभी मिल-जुलकर काम करें और जातिय संगठनों को समझाएं कि वह पहले हिंदू हैं और बाकी सब उसके बाद हैं.’’

आरएसएस के सूत्रों के अनुसार, यूं तो देश भर में ही संघ को और भी ताकतवर बनाने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन संघ इस समय उन राज्यों पर ज्यादा जोर दे रहा है, जहां शाखाओं की संख्या कम है. ऐसे राज्यों में संघ ने शाखाएं बढ़ाने का फैसला लिया है. पश्चिम बंगाल और केरल के साथ पूर्वोत्तर के सभी राज्यों - अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मेघालय और मिजोरम में आरएसएस अपनी सक्रियता में तेजी लाएगा. विशेष तौर पर इन राज्यों में स्कूली स्तर से ही बच्चों को संघ की विचारधारा से जोड़ने के लिए वहां नए स्कूल भी खोले जाएंगे. आदिवासी क्षेत्रों में चलाए जा रहे एकल विद्यालयों की संख्या में भी वृद्धि की जाएगी. बैठक के अंतिम दिन तीन सत्र हुए, जिनमें सामाजिक सद्भाव बढ़ाने पर जोर दिया गया.

संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ संघ के सह सरकार्यवाह भैया जी जोशी, दत्तात्रेय होसबोले, कृष्णगोपाल और सुरेश सोनी ने भी प्रचारकों को संबोधित किया. रविवार को मोहन भागवत ने जहां वृन्दावन के सुदामा कुटी आश्रम में पहुंचकर सुतीक्ष्ण दास महाराज के कार्यक्रम में भाग लिया, वहीं सोमवार को वे महावन में यमुना किनारे रमणरेती स्थित श्रीकृष्ण उदासीन आश्रम में महंत शरणानन्द के यहां पहुंचे. उन्होंने संत-महात्माओं के साथ बैठक कर हिन्दू समाज की स्थिति पर विचार-विमर्श करते हुए संत समाज से मदद मांगी. उन्होंने वहां संतों के साथ ही प्रसाद ग्रहण किया. इस दौरान गीता मनीषी महामण्डलेश्वर संत ज्ञानानंद वृन्दावन के कई अन्य संत मौजूद थे.

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First published: July 29, 2019, 11:52 PM IST
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