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श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद : मथुरा की अदालत में नए सिरे से शुरू हुई सुनवाई

अदालत 29 सितंबर को फैसला सुनाएगी कि यह वाद वह स्वीकार कर रही है या खारिज.

अदालत 29 सितंबर को फैसला सुनाएगी कि यह वाद वह स्वीकार कर रही है या खारिज.

Next hearing on September 29 : श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद को लेकर जिला न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बात सुन ली है. वे अब 29 सितंबर को वाद को स्वीकार करने या खारिज करने पर अपना निर्णय सुनाएंगे.

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    मथुरा. उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद की अदालत में श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद को लेकर एक वर्ष पूर्व दाखिल किए गए मामले में मुकदमा दर्ज किए जाने अथवा याचिका खारिज किए जाने के मुद्दे पर सोमवार को जिला न्यायाधीश की अदालत में पुनः नए सिरे से सुनवाई की गई, जिसमें दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात रखी.

    उल्लेखनीय है कि लखनऊ की रहनेवाली सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री सहित आधा दर्जन लोगों ने बीते साल 22 सितंबर को दीवानी न्यायाधीश सीनियर डिवीजन मथुरा की अदालत में वाद दायर किया था कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और शाही ईदगाह इंतजामिया कमेटी के बीच पहले जो समझौता हुआ था, वह पूरी तरह से अवैध है. याचिका में कहा गया था कि इसलिए शाही ईदगाह को ध्वस्त कर उक्त संपूर्ण (13.37 एकड़) भूमि उसके मूल स्वामी श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट को सौंप दी जाए. लेकिन अदालत ने उनका यह वाद खारिज कर दिया. इसके बाद उन्होंने जनपद न्यायाधीश की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की. इस याचिका पर सुनवाई के बीच दो बार जनपद न्यायाधीशों का स्थानांतरण हो चुका है.

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    अब नए न्यायाधीश विवेक संगल ने सोमवार को मामले को समझने के लिए दोनों पक्षों से उनके तथ्य मांगे, जिसपर करीब एक घंटे तक बहस चली. वादियों की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, हरिशंकर जैन और पंकज वर्मा ने बहस की. अन्य पक्षों में इंतजामिया कमेटी के अलावा श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव भी मौजूद रहे. प्रथम परिवादी यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन की ओर से इस बार उनका पैरवीकर्ता गैरहाजिर रहा.

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    वादी अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री ने बताया कि जिला न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बात सुन ली है. वे अब 29 सितंबर को वाद को स्वीकार करने या खारिज करने पर अपना निर्णय सुनाएंगे. गौरतलब है कि इसी प्रकरण में कई अन्य संस्थाओं और वादियों की ओर से मथुरा की अदालत में करीब आधा दर्जन से अधिक कई अन्य मामले भी विचाराधीन हैं, जिनपर इस वाद के फैसले से खासा असर पड़ने की संभावना है.

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