श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: मथुरा के बाजारों में रौनक पर GST, नोटबंदी का दिख रहा असर

दुकानदार अजय लुटिया कहते हैं कि जीएसटी की वजह से बाज़ारो में रौनक पहले की अपेक्षा कम दिखाई दे रही है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: September 2, 2018, 1:03 PM IST
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: मथुरा के बाजारों में रौनक पर GST, नोटबंदी का दिख रहा असर
मथुरा वृंदावन के बाजारों में जीएसटी, नोटबंदी का असर. Photo: News 18
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Updated: September 2, 2018, 1:03 PM IST
देश बाहर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम मची हुई है. क्या बाजार, क्या मंदिर, क्या घर सभी जगह कान्हा ही कान्हा दिखाई दे रहे हैं. लोग लड्डू गोपाल के जन्म को एक नई खुशी एक नई कामना ओर मनोकामना के साथ मनाना चाहते हैं. जिसके लिए लोगों ने तैयारियां कर रखी हैं तो कुछ व्यस्त दिनचर्या के चलते अभी भी खरीददारी में लगे हुए हैं. कान्हा की नगरी मथुरा वृंदावन में जहां दुकानों में एक से बढ़कर एक कान्हा के श्रृंगार का सामान सजा हुआ है तो वहीं कान्हा के भक्त भी बड़े ही भक्तिभाव से अपने कान्हा के श्रृंगार के लिए सामान लेने में जुटे हैं.

एक ओर जहां कान्हा के भक्त जितने चाव से पोषक झूला मुरली पालना लेने में लगे हुए हैं तो वहीं दुकानदार भी दिल खोल कर सामान दिखाने में लगा हुआ है. दुकानदार भी इस बात के प्रयास में लगे हुए हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग खरीददारी करें. दुकानदार मुकुल अग्रवाल ने बताया कि यह एक ऐसा पर्व है, जिसे 50 रुपये से लेकर 5 लाख के साथ बड़े ही आंनद ओर हर्ष के साथ मनाया जा सकता है. हालांकि इस रौनक पर जीएसटी और नोटबंदी का भी असर देखने को मिल रहा है.  वहीं व्यापारी संदीप मालपानी कहते हैं जीएसटी, नोटबंदी के कारण कस्टमर थोड़े कम हैं. जीएसटी, नोटबंदी के कारण 13 से 20 प्रतिशत व्यापार पर असर आया है.

दुकानदार अजय कुमार कहते हैं कि जीएसटी की वजह से बाज़ारो में रौनक पहले की अपेक्षा कम दिखाई दे रही है लेकिन हर कोई चाहता है जन्माष्टमी के माध्यम से भगवान उनके यहां जन्म ले. उनके घर मे मंगल और खुशियां बिखरे. इसलिए पहले 1000 का सामान लेता था, अब 500 ओर 700 का ही लेकर जाता है.

 

बाजार में पहले जैसी रौनक नहीं है


Businessman in Mathura
व्यापारी अजय कुमार. Photo: News 18


नोटबन्दी व जीएसटी के बाद से बाजारो में भले ही बिक्री कम हुई हो लेकिन आज भी बाज़ारों की रौनक छोटे बड़े कान्हाओं के रंग से गुलजार हैं और लोग बस उस पल के लिए लालायित हैं. जब नंद के घर आनंद होने की छटा में उनके घर मे भी आनंद और परमानंद की बरसात हो.

(रिपोर्ट: नितिन गौतम)

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