भारतीय समाज के विघटन का कारण बनेगा SC-ST कानून: शंकराचार्य स्वरूपानंद

शंकराचार्य ने कहा कि हम भी चाहते हैं कि दलित वर्ग का कल्याण हो. वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ें और विकास की ओर अग्रसर हों. उनके साथ किसी तरह का भेदभाव न हो और न ही उनपर किसी तरह का जुल्म हो.

News18 Uttar Pradesh
Updated: September 9, 2018, 7:16 AM IST
भारतीय समाज के विघटन का कारण बनेगा SC-ST कानून: शंकराचार्य स्वरूपानंद
शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती
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Updated: September 9, 2018, 7:16 AM IST
मथुरा प्रवास के दौरान द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा संशोधित रूप में लाया गया अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) कानून भारतीय समाज में विघटन का कारण बनेगा. उन्होंने कहा कि हर जाति में अच्छे और बुरे लोग होते हैं. कानून के वर्तमान प्रावधान के मुताबिक, अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों द्वारा केवल शिकायत किए जाने पर सवर्णों को जेल भेज दिया जाएगा. यह गलत है. इससे समाज में एक दूसरे के प्रति आक्रोश की भावना बढ़ेगी और सामाज का विघटन शुरू हो जाएगा.

शंकराचार्य ने कहा कि हम भी चाहते हैं कि दलित वर्ग का कल्याण हो. वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ें और विकास की ओर अग्रसर हों. उनके साथ किसी तरह का भेदभाव न हो और न ही उनपर किसी तरह का जुल्म हो. लेकिन, इस कानून की मदद से उनका भला नहीं होने वाला है. इस कानून से जातिगत भेदभाव और बढ़ जाएगा और समाज पीछे की ओर चला जाएगा. समाज पीछे की ओर जाएगा तो देश भी आगे की बजाए पीछे की ओर जाएगा.

आरक्षण को लेकर सवर्ण समाज कोई नहीं बल्कि पूरे देश को खड़ा होना चाहिए जो दलित हैं उनको भी खड़ा होना चाहिए क्योंकि देश की इस तरह तरक्की नहीं हो सकती. हम चाहते हैं जो दलित समाज है वह समाज के साथ समरसता बना कर चले. वही मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा इनकी जो नियत है वह राम मंदिर बनाने कि नहीं है, अगर इनको राम मंदिर बनाना ही था तो बीपी सिंह को क्यों नहीं सम्मिलित किया. आप कहते हैं बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और जब बेटी नहीं बचेगी तो बहू कहां से लाओगे. देश में भी प्रतिभाशाली हैं अगर सब विदेश में चले जाएंगे तो देश की उन्नति कैसे होगी क्योकि सब विदेश भाग रहे हैं.

बता दें कि मार्च 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने एक सरकारी अधिकारी की याचिका पर फैसला सुनाते हुए SC/ST एक्ट के प्रावधानों को नरम किया था. कोर्ट ने कहा कि इस कानून के तहत मामला दर्ज होने पर तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी. मामले की शुरुआती जांच के बाद ही आरोपी को गिरफ्तार किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दलित संगठनों ने विरोध किया था.

(रिपोर्ट: नितिन कुमार गौतम)

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