राज्यपाल ने जाहिर की दीक्षांत समारोह को हिंदी में संचालित करने की इच्छा

‘जब हम अपने हर विशेष पारिवारिक एवं सामाजिक कार्यों के समय स्थानीय वेशभूषा धारण करते हैं तो जिन्दगी के इतने अहम पड़ाव (डिग्री हासिल करते वक्त) पर ही क्यों दूसरों की सभ्यता को जबरिया धारण करते हैं.’’

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 31, 2018, 11:32 PM IST
राज्यपाल ने जाहिर की दीक्षांत समारोह को हिंदी में संचालित करने की इच्छा
राज्यपाल राम नाईक ने दिखाया हिंदी के प्रति प्रेम (फाइल फोटो)
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Updated: August 31, 2018, 11:32 PM IST
राज्य के 28 विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति होने के चलते राज्यपाल राम नाईक ने दीक्षांत समारोह को हिंदी में संचालित करने की इच्छा जाहिर की है. इससे पहले दीक्षांत समारोह में पहने जाने वाले परिधान पारंपरिक वेशभूषा (पैंट-कमीज़, रोब व हैट) को परिवर्तित करके भारतीय कर दिया था.

राज्यपाल यहां पं. दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विवि एवं गौ अनुसंधान संस्थान के 8वें दीक्षांत समारोह में शामिल होने यहां पहुंचे थे. अपना अध्यक्षीय भाषण समाप्त करने से पूर्व कुलाधिपति ने उम्मीद जताई, ‘‘जिस प्रकार भारतीय परिधान लागू कर दिया गया है उसी प्रकार भारतीय भाषा- राष्ट्रभाषा हिन्दी को ही दीक्षांत समारोह की आधिकारिक भाषा के रूप में मान्य कर लिया जाए, तो बेहतर होगा. उनका आशय दीक्षांत समारोह के संचालन एवं सम्भाषण की भाषा भी परिवर्तित कर दिए जाने से संबंधित था.’’

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गौरतलब है कि इससे  पहले 2016 में जब वे पहली बार आए थे, तब उन्होंने दीक्षांत समारोह के दौरान अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में सौ वर्षों से भी अधिक समय से चली आ रही अंग्रेजी राज के पारम्परिक परिधानों से मुक्ति पा लेने का आह्वान किया था.

उन्होंने तब कहा था, ‘जब हम अपने हर विशेष पारिवारिक एवं सामाजिक कार्यों के समय स्थानीय वेशभूषा धारण करते हैं तो जिन्दगी के इतने अहम पड़ाव (डिग्री हासिल करते वक्त) पर ही क्यों दूसरों की सभ्यता को जबरिया धारण करते हैं.’’

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उन्होंने हिंदी को तवज्जो देने का कारण बताते हुए कहा, ‘‘हिन्दी जहां हमारी अपनी भाषा है, वहीं हिन्दी उन अभिभावकों के लिए भी आसानी से समझ आने वाली भाषा है, जिनके बच्चे यहां एक स्नातक के रूप में उच्च शिक्षा प्राप्त देश व समाज की सेवा करने के लिए निकलते हैं.’’
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