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Krishna Janmashtami 2021: कृष्ण जन्मभूमि के लिए माहौल बनाएगी VHP, जन्माष्टमी पर होंगे पूरे देश में कार्यक्रम

श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए माहौल बनाने की खातिर वीएचपी इस बार देशभर में कार्यक्रम करेगी.

श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए माहौल बनाने की खातिर वीएचपी इस बार देशभर में कार्यक्रम करेगी.

Shri Krishna Janmabhoomi: राम मंदिर निर्माण (Ram Mandir Construction) की रफ्तार तेज होने के बाद विश्व हिंदू परिषद (Vishva Hindu Parishad) ने अब श्री कृष्ण जन्मभूमि मामले को धीरे-धीरे आगे बढ़ाने की तैयारी की है. इस बार 31 अगस्‍त को जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2021) के दिन विहिप पूरे देश में कार्यक्रम करेगी.

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नई दिल्‍ली. राम मंदिर निर्माण (Ram Mandir Construction) का कार्य अब तेजी चल रहा है और 2023 के अंत तक मंदिर का गर्भगृह तैयार होकर रामलला को विराजमान करने की तैयारी है. राम जन्मभूमि के बाद विश्व हिंदू परिषद (Vishva Hindu Parishad) अब कृष्ण जन्मभूमि (Shri Krishna Janmabhoomi) मामले को धीरे-धीरे आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. यही नहीं, विहिप इस बार कृष्ण जन्माष्टमी पर देशभर में बड़े कार्यक्रम आयोजित करेगा. जबकि कार्यक्रमों का क्या प्रारूप होगा, इसको लेकर योजना तैयार की जा रही है.

विहिप कार्याध्यक्ष आलोक कुमार के मुताबिक, जन्माष्टमी के दिन विहिप अपना स्थापना दिवस मनाती है. इस बार जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2021) 30 अगस्त के दिन मनाई जाएगी. इस बार हमारा जन्माष्टमी को बड़े स्तर पर मनाने का कार्यक्रम है. इस बार हम 30 अगस्त से एक हफ्ता पहले यानी 22 अगस्त से लेकर 30 अगस्त के एक हफ्ते बाद तक पूरे देश भर में कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे. इस दौरान तरह तरह के कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे. कार्यक्रमों की तैयारियों को लेकर लगातार मंथन किया जा रहा है.

विहिप का कृष्ण जन्मभूमि को लेकर ये है प्‍लान
2019 में राम मंदिर पर फैसला आने के बाद अब विहिप कृष्ण जन्मभूमि का अभियान चलाने जा रही है. जहां एक तरफ कृष्ण जन्मभूमि को लेकर मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तो वहीं दूसरी ओर अब विश्व हिंदू परिषद आगामी जन्माष्टमी पर पूरे देश में कार्यक्रम करने का प्लान बना रही है, ताकि अब कृष्ण जन्मभूमि मामले को लेकर माहौल तैयार किया जा सके.

बता दें कि मथुरा के श्रीकृष्ण विराजमान व शाही ईदगाह मस्जिद (Shahi Eidgah Mosque) के कब्जे में 13.37 एकड़ जमीन के मालिकाना हक का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल हुई है, जिसमें कृष्ण जन्मभूमि की जमीन को समझौते के जरिये मस्जिद को देने को चुनौती दी गई है. याचिका में कहा गया है कि हिंदुओं के साथ धोखा करके कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की संपत्ति बिना किसी कानूनी अधिकार के अनधिकृत रूप से समझौता करके शाही ईदगाह को दे दी गई जो कि गलत है. कोर्ट घोषित करे कि श्रीकृष्ण जन्म सेवा संस्थान की ओर से 12 अगस्त, 1968 को शाही ईदगाह के साथ किया गया समझौता बिना क्षेत्राधिकार के किया गया था.

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डेंगू बुखार से ज्‍यादा खतरनाक डेंगू संबंधित ये दो बीमारियां, महज एक दिन में हो रही मरीज की मौत

देश में डेंगू से ज्‍यादा डेंगू शॉक सिन्‍ड्रोम और डेंगू हैमरेजिक फीवर से मौतें हो रही हैं. 
Dengu Shock syndrome and Hemorrhagic fever:

Dengu Shock syndrome and Hemorrhagic fever: डेंगू संबंधित दोनों बीमारियां डेंगू शॉक सिन्‍ड्रोम और डेंगू हैमरेजिक फीवर ज्‍यादातर मौतों के लिए जिम्‍मेदार हैं. डेंगू के दूसरी या तीसरी स्‍टेज पर पहुंचने और पर्याप्‍त इलाज न मिलने के कारण स्‍थानीय स्‍तर पर इन बीमारियों से मरीजों की जान जा रही है.

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नई दिल्‍ली. देश में डेंगू बुखार का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. देश के कई राज्‍यों में डेंगू (Dengue) के मरीज बड़ी संख्‍या में अस्‍पतालों में पहुंच रहे हैं. वहीं सौ से ज्‍यादा बच्‍चों और बड़ों की मौत ने इस बीमारी को लेकर चिंता पैदा कर दी है. हालांकि डेंगू के मामलों के दौरान इस बार एक नया ट्रेंड दिखाई दे रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू बुखार (Dengue Fever) से ज्‍यादा खतरनाक इस समय डेंगू से ही संबंधित दो बीमारियां साबित हो रही हैं. यही वजह है कि इस बार ये बीमारी जानलेवा है और मरीजों की मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है.

एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा में डेंगू के नोडल अधिकारी बनाए गए प्रोफेसर मृदुल चतुर्वेदी ने न्‍यूज18 हिंदी से बातचीत में बताया कि डेंगू के जो मामले आ रहे हैं उनमें देखा गया है कि डेंगू बुखार से लोगों या बच्‍चों की जान नहीं गई बल्कि डेंगू की अगली स्‍टेज या कहें कि डेंगू संबंधित दोनों बीमारियां डेंगू शॉक सिन्‍ड्रोम (Dengue Shock Syndrome) और डेंगू हैमरेजिक फीवर (Dengue Hemorrhagic Fever) ज्‍यादातर मौतों के लिए जिम्‍मेदार हैं. एसएन  मेडिकल कॉलेज में आसपास के जिलों से रैफर होकर आने वाले अधिकतर मामले भी ऐसे ही रहे हैं जिनमें ये दो बीमारियां पाई गई हैं. हालांकि डेंगू के दूसरी या तीसरी स्‍टेज पर पहुंचने और पर्याप्‍त इलाज न मिलने के कारण स्‍थानीय स्‍तर पर इन बीमारियों से मरीजों की जान जा रही है.

अगस्‍त से उत्‍तरी भारत और खासतौर पर उत्‍तर प्रदेश के कई जिलों में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. dengue

अगस्‍त से उत्‍तरी भारत और खासतौर पर उत्‍तर प्रदेश के कई जिलों में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.

प्रोफेसर चतुर्वेदी कहते हैं कि कोविड की तरह ही डेंगू का भी कोई स्‍पष्‍ट इलाज नहीं है. मुख्‍य रूप से मरीज में डेंगू की पुष्टि होने के बाद उसके लक्षणों के आधार पर इलाज किया जाता है. उसकी हर ए‍क गतिविधि को मॉनिटर किया जाता है और उसको देखते हुए मरीज को आहार और दवाओं की संतुलित खुराक दी जाती है.

घर पर भी हो सकता है सामान्‍य डेंगू का इलाज
प्रो. चतुर्वेदी कहते हैं कि मेडिकल साइंस के हिसाब से डेंगू को तीन भागों में बांटा गया है. क्लासिकल (साधारण) डेंगू फीवर, डेंगू हेमरेजिक फीवर (DHF) और डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS). जहां तक सामान्‍य या साधारण डेंगू की बात है तो बिना लक्षणों वाले कोविड की तरह ही यह घर में अपने आप ठीक हो जाता है. इसके लिए बस मरीज के आहार का ध्‍यान रखना होता है और कोई भी जटिल स्थिति पैदा न हो. जबकि बाकी दोनों बीमारियां मरीज के लिए जानलेवा हो सकती हैं. इन दोनों बीमारियों का इलाज अस्‍पताल में ही संभव है. इन बीमारियों में मरीज के शरीर के अन्‍य अंगों पर प्रभाव पड़ने लगता है और उसकी हालत बिगड़ने लगती है.

क्‍या है डेंगू शॉक सिन्‍ड्रोम
डेंगू शॉक सिंड्रोम डेंगू का ही बढ़ा हुआ या अगला रूप है. यह डेंगू बुखार की दूसरी और तीसरी स्‍टेज में होता है. जब मरीज का बुखार कई दिन तक नहीं उतरता है और बदन दर्द भी होने लगता है तो इसकी शुरुआत होती है. होंठ नीले पड़ने लगते हैं. त्‍वचा पर लाल चकत्‍ते और दाने तेजी से उभरते हैं. साथ ही मरीज की नब्‍ज बहुत धीमे चलने लगती है. इसमें मरीज का तंत्रिका तंत्र खराब होने लगता है और वह लगभग सदमे की हालत में आ जाता है. इसलिए इसे डेंगू शॉक सिंड्रोम कहा जाता है. डेंगू के दौरान ब्‍लड प्रेशर भी नापना जरूरी होता है. अगर बीपी घटने लगे तो स्थिति गंभीर हो जाती है. ऐसी स्थिति में मरीज को अस्‍पताल में भर्ती कराना सबसे जरूरी होता है.

क्‍या है डेंगू हैमरेजिक फीवर

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चार सालों में सबसे अधिक मरीज डेंगू के मिले हैं. साथ ही डेंगू शॉक सिन्‍ड्रोम और हैमरेजिक फीवर इस बार खतरनाक भी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock)

डेंगू का बुखार अगर बढ़ता जाए और फिर मरीज के अंदर या बाहर रक्‍तस्‍त्राव शुरू हो जाए तो वह मरीज के लिए खतरनाक हो जाता है. डेंगू में रक्‍त धमनियों में रक्‍तस्राव होने के कारण ही इसे हैमरहेजिक फीवर (Dengue Hemorrhagic Fever) कहा जाता है. मरीज के कान, नाक, मसूढ़े, उल्‍टी या मल से खून आने लगता है. ऐसे मरीज को बहुत बेचेनी होती है और उसकी प्‍लेटलेट्स और श्‍वेत रक्‍त कणिकाएं बहुत तेजी से गिर जाती हैं. त्‍वचा पर गहरे नीले या काले रंग के बड़े बड़े चकत्‍ते पड़ जाते हैं.

महज एक दिन में हो रही बच्‍चों की मौत
मथुरा में तैनात महामारी विज्ञानी डॉ. हिमांशु मिश्र कहते हैं कि डेंगू के मुकाबले डेंगू शॉक सिन्‍ड्रोम और डेंगू हैमरेजिक फीवर इतने खतरनाक हैं कि इनकी चपेट में आने के बाद बच्‍चे एक दिन के भीतर दम तोड़ रहे हैं. वो कहते हैं कि मथुरा के आसपास डेंगू से हुई मौतें इसी कारण हुई हैं. कई-कई दिनों से बुखार में पड़े बच्‍चे जब अपना होश-हवास खोने लगते हैं तो परिजन अस्‍पताल लेकर आते हैं और डेंगू की गंभीर स्थिति में पहुंचे बच्‍चों या बड़ों को बचाना काफी मुश्किल हो जाता है. ऐसे में जरूरी है कि डेंगू के मरीजों के लक्षणों का विशेष ध्‍यान रखा जाए.

डेंगू को लेकर ये रखें ध्‍यान

. अगर बच्‍चे या बड़े को बुखार है तो उसे पैरासीटामोल दें और घर पर ही लि‍क्विड डाइट देने के साथ मच्‍छरों से बचाव का ध्‍यान रखें.

. बुखार के मरीज का बार-बार बीपी जांचते रहें. साथ ही बच्‍चा है तो उससे पूछते रहें कि कहीं से खून तो नहीं आ रहा है. अगर ऐसा कोई लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें.

. एक या दो दिन में बुखार उतर रहा है तो घबराने की बात नहीं है लेकिन अगर बुखार बढ़ रहा है तो उसे अस्‍पताल लेकर आएं और डॉक्‍टर को दिखाएं.

. अगर बुखार के साथ ही बच्‍चे के शरीर पर च‍कत्‍ते पड़ रहे हैं, वह अचेतावस्‍था में जा रहा है और उसे ठंड व कंपकंपी आ रही है तो ये लक्षण गंभीर हैं. ऐसे में बच्‍चे को बिना देर किए अस्‍पताल में लेकर पहुंचें.

. बच्‍चों को पूरी आस्‍तीन के कपड़े पहनाकर रखें, मच्‍छरों से बचाव करें. कहीं भी पानी जमा न होने दें. साफ-सफाई का ध्‍यान रखें.

Dengue Fever: क्‍या यूपी-बिहार में कोरोना जितना गंभीर हो गया है डेंगू, बढ़ते मामलों पर ये बोले विशेषज्ञ

देश में डेंगू के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. राज्‍यों में कोविड के लिए तैयार किए गए इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर को डेंगू के इलाज में इस्‍तेमाल किया जा रहा है.

Dengue fever: देश के कई राज्‍यों में डेंगू कहर बरपा रहा है. यूपी, एमपी, बिहार, हरियाणा, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्‍यों में डेंगू के मरीजों बढ़ने के साथ ही इससे अभी तक 100 से ज्‍यादा बच्‍चों की मौत हो चुकी है. बीमारी के कहर के कारण डेंगू के मरीजों के लिए अब कोविड डेडिकेटेड सुविधाओं को इस्‍तेमाल किया जा रहा है.

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नई दिल्‍ली. कोरोना के घटते मामलों से जहां देश को राहत मिल रही है वहीं मौसमी बीमारियों ने एकाएक पैर पसार लिए हैं. यूपी, बिहार, मध्‍य प्रदेश, हरियाणा और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्‍यों में बड़ी संख्‍या में बच्‍चे और बड़े डेंगू (Dengue) और वायरल फीवर (viral Fever) की चपेट में आ रहे हैं. इन राज्‍यों में अभी तक 100 से ज्‍यादा बच्‍चों की मौत इन मौसमी बीमारियों से हो चुकी है. ऐसे में इन मौसमी बीमारियों के भी कोरोना (Covid-19) की तरह गंभीर होने की आशंकाएं जताई जा रही हैं.

यूपी के कई जिलों खासकर मथुरा, फिरोजाबाद, एटा, मैनपुरी, कानपुर, लखनऊ, मेरठ और प्रयागराज आदि में डेंगू और वायरल फीवर के मरीजों के साथ ही मृतकों की संख्‍या भी बढ़ रही है. इन मामलों को लेकर स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार देश में डेंगू काफी खतरनाक स्थिति में है. आईसीएमआर की ओर से भी कहा गया है कि इस बार डेंगू के डीटू स्‍ट्रेन (D2 Strain) के चलते मौतें ज्‍यादा हो रही हैं. यह डेंगू का खतरनाक स्‍ट्रेन है. वहीं वायरल फीवर के अलावा स्‍क्रब टाइफस (Scrub-Typhus) और लैप्‍टोस्‍पाइरोसिस जैसी नई बीमारी भी फैल रही है.

लहर की तरह आता है डेंगू-चिकनगुनिया  

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) में ऑपरेशनल रिसर्च ग्रुप ऑफ द नेशनल टास्‍क  फोर्स फॉर कोविड-19 डॉ. नरेंद्र कुमार अरोड़ा कहते हैं कि डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां लहर की तरह आती हैं. यह लहर तीन से चार साल में भी आ सकती है, उससे ज्‍यादा भी समय ले सकती है. 2017-18 के बाद 2021 में इस बार डेंगू के मामले तेजी से बढ़े हैं और मौतें भी हुई हैं. डॉ. अरोड़ा कहते हैं कि डेंगू इस बार ज्‍यादा असर कर रहा है लेकिन राज्‍यों में जिला स्‍तर पर कोविड के मरीजों के लिए की गई व्‍यवस्‍थाएं आज अस्पतालों में मौजूद हैं. पिछले सालों के मुकाबले इस बार स्‍वास्‍थ्‍य विभाग ज्‍यादा मजबूत स्थिति में है. ऐसे में डेंगू पर नियंत्रण पाया जा सकता है. हालांकि लोगों को अपने स्‍तर पर भी मच्‍छरों से बचाव और डेंगू की चपेट में आने से बचने के अलावा इससे प्रभावित होने पर तत्‍काल इलाज के लिए जाना होगा.

कोविड इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर, बेड का हो रहा इस्‍तेमाल

मथुरा जिला महामारी विज्ञानी डॉ. हिमांशु मिश्र ने बताया कि डेंगू से निपटने के लिए जिला अस्‍पतालों में मच्‍छरदानी के साथ बेड की व्‍यवस्‍थाएं की गई है. कोरोना के दौरान राज्‍य सरकार की ओर से सभी जिलों में इंटीग्रटेड कोविड कमांड सेंटर्स (ICCC) बनाए गए थे. ये मुख्‍य रूप ये हेल्‍पलाइन सेंटर्स थे जहां कोविड के मामलों को रिपोर्ट करने पर जिला स्‍तर से एंबुलेंस आदि की सुविधा दी जाती थी. अब कोविड के मामले तो न के बराबर हैं. ऐसे में आईसीसीसी को डेंगू या वायरल फीवर के लिए हेलप्‍लाइन सेंटर (Helpline Center) के रूप में इस्‍तेमाल किया जा रहा है. यहां तक कि कोई भी व्‍यक्ति सामान्‍य बुखार (Fever) को लेकर भी यहां फोन कर सकता है.

डॉ. मिश्र कहते हैं कि इसके अलावा कोविड मरीजों के लिए बनाए गए कोविड डेडिकेटेड बेड्स (Covid Dedicated Beds) को भी डेंगू के मरीजों के लिए उपयोग में लाया जा रहा है. वहीं कोविड को लेकर बने आईसीयू बेड (ICU Bed) या पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट (PICU) को भी मथुरा की तरह सभी जिलों में जहां मौसमी बीमारियों के मरीज सामने आ रहे हैं, इस्‍तेमाल किया जा रहा है. फिलहाल डेंगू या वायरल फीवर से निपटने के लिए सुविधाओं या स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारियों की कमी नहीं है.

 कोविड जितना भयंकर नहीं है डेंगू

आगरा एसएन मेडिकल कॉलेज में डेंगू फीवर को लेकर नोडल अधिकारी बनाए गए प्रोफेसर मृदुल चतुर्वेदी का कहना है कि पिछले 10-15 सालों के बाद यूपी में डेंगू के इतने मामले सामने आए हैं और इसकी वजह भी डीटू स्‍ट्रेन बताई जा रही है. 90 के दशक में दिल्‍ली में कुछ केस डीटू स्‍ट्रेन के मिले थे लेकिन यहां यह स्‍ट्रेन नहीं मिलता था और ऐसे में डेंगू से मौतें भी कम होती थीं. इस बार मरीज बढ़ रहे हैं. एसएन में आसपास के जिलों जैसे शिकोहाबाद, एटा, इटावा, मैनपुर से रोजाना आधा दर्जन मामले गंभीर डेंगू मरीजों के आ रहे हैं. ये या तो रैफर किए हुए केस होते हैं या डेंगू के शॉक सिंड्रोम या हैमरेजिक स्थिति में पहुंच चुके मरीज होते हैं. हालांकि इसके बावजदू हालात काबू में हैं. मेडिकल कॉलेज हों या राज्यों के सरकारी अस्पताल इनमें पिछले साल से कोविड मैनेजमेंट में लगे मेडिकल उपकरण, बेड, आईसीयू सुविधाएं, डॉक्टर्स और स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारी लगे हैं.

मौसमी बुखार बच्‍चों के लिए क्‍यों हो रहा है जानलेवा, बता रहे हैं विशेषज्ञ

Viral Fever in UP: यूपी में डेंगू और वायरल बुखार का कहर जारी है और यह बच्‍चों के लिए जानलेवा हो रहा है.  (फाइल फोटो)

Viral Fever in children: महामारी विज्ञानी डॉ. हिमांशु मिश्र का कहना है कि वायरल फीवर के बच्‍चों के लिए जानलेवा बनने की एक सबसे बड़ी वजह जो सामने आई है वह यह है कि वायरल या डेंगू की चपेट में आने के बाद सरकारी अस्‍पतालों में भर्ती हुए ज्‍यादातर बच्‍चे कुपोषित या कम पोषित हैं. जिसकी वजह से इनका शरीर बीमारी का मुकाबला करने में सक्षम नहीं है.

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नई दिल्‍ली. देश में अगस्‍त महीने से एकाएक मौसमी बुखार या वायरल फीवर (Viral Fever) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इस रहस्‍यमयी बुखार की चपेट में आ चुके यूपी, एमपी सहित कई राज्‍यों में मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही मौतों के भी मामले सामने आ रहे हैं. मथुरा, फिरोजाबाद, कानपुर, लखनऊ, एटा, मैनपुरी, प्रयागराज सहित कई जिलों के हजारों की संख्‍या में वायरल फीवर के मरीज अस्‍पतालों में भर्ती हैं. वहीं बिहार, हरियाणा और मध्‍य प्रदेश के कई जिलों में मौसमी बुखार (Seasonal Fever) के मरीज अस्‍पतालों में इलाज करा रहे हैं. लगभग सभी राज्‍यों में मिल रहे वायरल फीवर के मरीजों में सबसे ज्‍यादा संख्‍या बच्‍चों की सामने आ रही है. इतना ही नहीं इलाज में हो रही कमी के कारण रोजाना बच्‍चे दम तोड़ रहे हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि मौसमी बुखार, वायरल फीवर और डेंगू (Dengue) इस बार काफी खतरनाक हो रहे हैं वहीं बच्‍चे इन बीमारियों की चपेट में इस बार तेजी से आ रहे हैं. यूपी के कई जिलों और खासतौर पर मथुरा-फिरोजाबाद में फैली बीमारी और बच्‍चों की मौतों को लेकर महामारी विज्ञानी डॉ. हिमांशु मिश्र ने न्‍यूज 18 हिंदी से बातचीत में कहा कि छह सालों के बाद पश्चिमी यूपी या मथुरा-फिरोजाबाद आसपास में वायरल (Viral) या मौसमी बुखार और डेंगू के इतने ज्‍यादा मामले सामने आए हैं और मौतें भी हो रही है. पिछले कुछ सालों तक पूर्वी यूपी के कुछ जिलों में स्‍क्रब टाइफस (Scrub Typhus) एक या दो मामले मिलते थे और उनकी भी ट्रैवल हिस्‍ट्री होती थी लेकिन पहली बार है कि इन मरीजों की कोई ट्रैवल हिस्‍ट्री नहीं देखने को मिली लेकिन बीमारी मिल रही है. वहीं लेप्टोस्पायरोसिस पूरी तरह नई बीमारी है.

बच्‍चों में मौसमी बुखार इसलिए हो रहा है जानलेवा

डॉ. मिश्र कहते हैं कि हर साल मौसमी बुखार या वायरस से होने वाली बीमारियां जैसे वायरल फीवर और इन्‍फ्लूएंजा आदि होती थीं. इन बीमारियों का भी एक तय सर्कल होता का कि करीब सात या आठ दिन में मरीज ठीक हो जाएगा. चूंकि यह वातावरण बदलने के कारण बीमारी पैदा होती रही है इसलिए बच्‍चे भी चपेट में आते थे लेकिन इस बार यह बच्‍चों की मौतों की भी खबरें आ रही हैं. बच्‍चों के लिए जानलेवा बनने की एक सबसे बड़ी वजह जो सामने आई है वह यह है कि इस बार सरकारी अस्‍पतालों में भर्ती हुए ज्‍यादातर बच्‍चे कुपोषित या कम पोषित हैं. उन्‍हें पर्याप्‍त रूप से भोजन या पोषणयुक्‍त आहार नहीं मिलता जिसकी वजह से बुखार की चपेट में आने पर उनका शरीर बीमारी का मुकाबला नहीं कर पा रहा है और वे दम तोड़ रहे हैं. वायरल या इन्‍फ्लूएंजा भी वायरस जनित बीमारियां ही हैं इनसे लड़ने के लिए शरीर में प्रतिरोधक क्षमता या शक्ति का होना जरूरी है.

मौसमी बुखार के लिहाज से ये महीने काफी संवेदनशील

एपिडेमिलॉजिस्‍ट डॉ. मिश्र कहते हैं कि अप्रैल-मई से लेकर सितंबर-अक्‍तूबर तक मौसमी बीमारियों का खतरा सबसे ज्‍यादा रहता है. इस दौरान बारिश का मौसम और वातावरण में नमी के कारण वायरस (Virus) और बैक्‍टीरिया दोनों को ही पनपने में मदद मिलती है. इसके साथ ही बारिश के कारण होने वाले पानी के जमाव के बाद मच्‍छरों का पनपना शुरू हो जाता है. इस बार जो कुछ नई बीमारियां दिखाई दी हैं जैसे स्‍क्रब टाइफस या लैप्‍टोस्‍पाइरोसिस आदि इसके लिए भी बारिश के कारण ग्रामीण इलाकों में बढ़ने वाली झाड़‍ियां, वहां पैदा हो रहे कीट आदि जिम्‍मेदार हैं. ऐसे में कोरोना के प्रति तो लोग सावधान रहे हैं लेकिन अन्‍य मौसमी बीमारियों को लेकर सावधानी नहीं बरती गई है. साफ पानी में मच्‍छरों का लार्वा नष्‍ट नहीं किया गया है.

क्‍या कोरोना ने कमजोर की है बच्‍चों की इम्‍यूनिटी

डा. मिश्र कहते हैं कि इस बारे में अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता. इसे लेकर कई रिसर्च चल रही हैं जिनमें यह देखा जा रहा है कि क्‍या कोरोना के कारण बच्‍चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हुई है जिसकी वजह से वे वायरल लोड को नहीं झेल पा रहे हैं या सामान्‍य बुखार भी उन्‍हें ज्‍यादा तकलीफ दे रहा है. हां लेकिन एक चीज है कि जो बच्‍चे सही आहार पहले से ले रहे हैं वे इस मौसमी बुखार से उबर रहे हैं.

धान की खेती में पैदा हुआ डेंगू का मच्‍छर

पश्चिमी यूपी के जिन जिलों डेंगू के मामले बढ़े हैं वहां एक चीज और देखी गई है कि इन जिलों के आसपास धान की खेती की गई है. मध्‍य जून से ही यहां धान (Paddy) की रोपाई शुरू की गई है. धान के लिए साफ पानी की जरूरत होती है और खेतों में पानी भरा रहता है. ऐसी आशंका है कि धान के पानी में डेंगू के मच्‍छरों का लार्वा पनपा है. चूंकि डेंगू का मच्‍छर 10 दिन में ही पनप जाता है ऐसे में यह भी एक वजह हो सकती है इन इलाकों में डेंगू के फैलने की.

बच्‍चों पर शुरू से ध्‍यान देना जरूरी, बीमारी में ये करें उपाय

डॉ. कहते हैं कि मौसमी बीमारी, मौसम जनित है ऐसे में उसे रोक पाना संभव नहीं है लेकिन सावधानी और ध्‍यान देकर उससे बचाव किया जा सकता है जो सभी को करना चाहिए. खासतौर पर बच्‍चों को संभालना बेहद जरूरी है. मौसमी बुखार या वायरल फीवर से बचने के लिए भी कोरोना की तरह ही सुरक्षा नियमों का पालन करना जरूरी है. चाहे इन्‍फ्लूएंजा हो या वायरल फीवर, ये सभी वायरस जनित हैं और एक से दूसरे में फैलने वाली बीमारियां हैं. ऐसे में अभिभावक बच्चों को सार्वजनिक स्थानों पर कम से कम ले जाने, सोशल डिस्‍टेंसिंग रखने और साफ-सफाई व हाथ धोने की आदत डालें.

अगर कोई बच्‍चा बुखार की चपेट में है तो उसे कोई भी दवा अपने आप देने या बिना किसी मेडिकल प्रेक्टिशनर की सलाह के दवा देना नुकसानदेह हो सकता है. इस बार यूपी में कई गांवों से आए मरीजों में ये देखा गया है कि वे अपने आस-पास मौजूद झोलाछाप डॉक्‍टरों से ही दवा दिलवाते रहे और बाद हालात काफी जटिल हो गए.

डॉ. मिश्र कहते हैं कि बच्‍चे के खाने में लिक्विड डाइट को ज्‍यादा से ज्‍यादा दें. सादा खाना दें. मरीज को हरी सब्जियां दें. एंटीऑक्सीडेंट और प्रोटीन से भरपूर खाना दें ताकि बीमारी से लड़ने के लिए शरीर को पोषक तत्‍व मिल सकें. इसके अलावा अगर बच्‍चे या बड़े को तीन दिन से ज्‍यादा बुखार है और उतर नहीं रहा है तो डॉक्‍टर को दिखाएं. जरूरी जांचें करवाएं.

इसके अलावा मच्‍छरों से बचाव करें. बच्‍चों को पहले से ही खाने में पोषणयुक्‍त खाना दें. ताकि बीमारी के प्रभाव को कम किया जा सके.

राधाष्‍टमी: 13-14 सितंबर को बरसाना में मनेगा जन्‍मोत्‍सव, प्रशासन ने की है ये व्‍यवस्‍था  

बरसाना में 13-14 सितंबर को राधाष्‍टमी महोत्‍सव मनाया जा रहा है.

Radha Ashtami: यूपी रोडवेज की ओर से 30 बसें कोसी से बरसाना के लिए रवाना होंगी वहीं 70 बसें मथुरा से गोवर्धन होते हुए बरसाना के लिए जाएंगी. ये बसें 13-14 सितंबर को सुबह से रात तक फेरे लगाएंगी. जिससे कि जन्‍मोत्‍सव में शामिल होने के लिए जाने वाले भक्‍तों को परेशानियों का सामना न करना पड़े.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 11, 2021, 19:33 IST
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नई दिल्‍ली. ब्रज के बरसाना में 13 और 14 सितंबर को राधारानी का जन्‍मोत्‍सव मनाया जा रहा है. इसके लिए बरसाना के साथ ही मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन और रावल के मंदिरों में जाने वाले भक्‍तों के लिए विशेष व्‍यवस्‍थाएं की गई हैं. उत्‍तर प्रदेश परिवहन निगम की ओर से श्रद्धालुओं के लिए 100 रोडवेज बसें चलाई जा रही हैं जो बरसाना जाएंगी. हालांकि मथुरा और वृंदावन के लिए वाहनों की व्‍यवस्‍था सामान्‍य रहेगी.

यूपी रोडवेज की ओर से 30 बसें कोसी से बरसाना के लिए रवाना होंगी वहीं 70 बसें मथुरा से गोवर्धन होते हुए बरसाना के लिए जाएंगी. ये बसें 13-14 सितंबर को सुबह से रात तक फेरे लगाएंगी. जिससे कि जन्‍मोत्‍सव में शामिल होने के लिए जाने वाले भक्‍तों को परेशानियों का सामना न करना पड़े.

राधाष्टमी महोत्सव को लेकर पहले ही डीएम नवनीत चहल और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर बैठक कर चुके हैं. जिसमें खासतौर पर बरसाना में आने वाली गाड़ि‍यों को देखते हुए विभिन्‍न पार्किंगों में लाइट की व्‍यवस्‍था करने, मंदिरों के अलावा आसपास के परिसरों में साफ सफाई रखने, श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी और शौचालयों की व्‍यवस्‍था करने के लिए निर्देश दिए हैं.

भंडारा करने से पहले लेनी होगी अनुमति  

राधाष्‍टमी के दौरान बरसाना में मेला लगता है और वहां सैकड़ों की संख्‍या में लोग भंडारे कराते हैं लेकिन अब कोरोना को देखते हुए कड़ी व्‍यवस्‍था की गई है. इस बार परिसर में भंडारा करने से पहले प्रशासन से एनओसी लेने के लिए पांच हजार रुपये जमा कराने होंगे और फिर भंडारा लगाने की अनुमति मिलेगी. हालांकि इन्‍हें मेला परिसर के बाहर ही लगाना होगा.

UP News: मथुरा के वृन्दावन, नंदगांव, बरसाना, गोवर्द्धन और इन इलाकों में नहीं बिकेगा शराब और मांस

मथुरा पर CM योगी का बड़ा फैसला, कृष्ण जन्मस्थल के 10 km का इलाका तीर्थस्थल घोषित (File photo)

Mathura News: 2017 में भाजपा की सरकार बनने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने साल 2018 में वृन्दावन, नंदगांव, बरसाना, गोवर्द्धन, गोकुल, बलदेव और राधाकुण्ड को तीर्थ स्थल क्षेत्र घोषित करने के आदेश दिये थे.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने शुक्रवार को बड़ा फैसला लिया हैं. सीएम योगी ने जन्मस्थल के 10 वर्ग किलोमीटर के दायरे को तीर्थ स्थल घोषित किया है. धर्मार्थ कार्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में अभी सात स्थलों को तीर्थ स्थल क्षेत्र का दर्जा दिया गया है. ये सभी के सभी मथुरा के ही हैं. 2017 में भाजपा की सरकार बनने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने साल 2018 में वृन्दावन, नंदगांव, बरसाना, गोवर्द्धन, गोकुल, बलदेव और राधाकुण्ड को तीर्थ स्थल क्षेत्र घोषित करने के आदेश दिये थे. वैसे तो प्रदेश में धार्मिक नगरियां बहुत हैं लेकिन, सरकार द्वारा औपचारिक तौर पर घोषित तीर्थ स्थल क्षेत्र मथुरा के यही सात हैं.

बता दें कि इस क्षेत्र में 22 नगर निगम वार्ड क्षेत्र आते हैं, जिसे तीर्थ स्थल घोषित किया गया है. इससे पहले यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने मथुरा में ही जन्माष्टमी भी मनाई थी, जिसके बाद तीर्थस्थल घोषित किए जाने का यह फैसला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा था. सीएम आफिस ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी. तीर्थ स्थल क्षेत्रों में मांस और शराब की बिक्री पर बैन रहेगा.

बता दें कि यूपी में तीर्थस्थलों के विकास का काम चल रहा है. अयोध्या, वाराणसी, मथुरा आदि में सुविधाएं पहले की मुकाबले बेहतर हो रही हैं. अयोध्या में डेढ़ साल पहले आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से जारी है. माना जा रहा है कि साल 2014 से पहले तक भव्य राम मंदिर का निर्माण पूरा हो जाएगा.

मथुरा-वृंदावन में 10 वर्ग किमी. का दायरा तीर्थस्‍थल घोषित, नहीं बिकेगा मांस और शराब

योगी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए मथुरा वृंदावन को तीर्थस्‍थल घोषित कर दिया है, इस संबंध में सीएम योगी ने कृष्‍ण जन्माष्टमी पर अपनी मंशा जाहिर की थी. (फाइल फोटो)

Uttar Pradesh News: योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया, मथुरा वृंदावन को तीर्थस्‍थल घोषित किया गया, अब 22 नगर निगम वार्ड के क्षेत्र में मांस और शराब की बिक्री पर रहेगा प्रतिबंध.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार ने मथुरा वृंदावन को लेकर बड़ा फैसला किया है. अब श्रीकृष्‍ण जन्मस्‍थल के दस किमी. के दायरे को तीर्थस्‍थल घोषित कर दिया गया है. इस क्षेत्र में आने वाले 22 नगर निगम वार्ड के क्षेत्रों में शराब और मांस की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा. गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस संबंध में कृष्‍ण जन्माष्टमी पर इशारा किया था. सीएम योगी ने मथुरा में कहा था कि इस स्‍थल को तीर्थस्‍थल घोषित किया जाना चाहिए और यहां पर शराब व मांस की बिक्री नहीं होनी चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि अधिकारियों से इस संबंध में वे प्रस्ताव मांगेंगे.

सीएम योगी ने कहा था कि मैं खुद प्रशासन से कहूंगा कि इसके लिए योजना बना कर प्रस्ताव पेश करें. इस पर काम किया जाएगा. साथ ही उन्होंने कहा कि किसी को परेशान नहीं होने दिया जाएगा और सभी का व्यवस्थित तौर पर पुर्नवास होगा. सीएम ने साफ तौर पर कहा था कि जिन भी लोगों के व्यवसाय पर इससे फैसले से फर्क पड़ेगा उन्हें दूसरी जगहों पर काम दिया जाएगा और इस क्षेत्र से हटाया जाएगा.

सीएम योगी ने कहा था कि 2017 में पहले यहां नगर निगम का गठन करवाया गया. फिर नगर निगम के गठन के साथ यहां के सात पवित्र स्थलों को तीर्थ स्थल घोषित करवाया और तीर्थस्थल घोषित होने के बाद अब यहां पर सब की इच्छा है कि इन सभी क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का मद्यपान या मांस का सेवन न हो और ये होना चाहिए.

बड़ों के मुकाबले बच्‍चों पर डेंगू का खतरा ज्‍यादा, एक्‍सपर्ट बोले, इस बार तेजी से बढ़ रहे मामले

अगस्‍त से उत्‍तरी भारत और खासतौर पर उत्‍तर प्रदेश के कई जिलों में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.  Photo-News18 English

Dengue cases: उत्‍तर-भारत में अगस्‍त महीने से अचानक बढ़े डेंगू के मामलों पर स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार डेंगू का कहर खतरनाक हो सकता है. साथ ही बड़ों की अपेक्षा बच्‍चों में डेंगू बुखार की चपेट में आने का खतरा ज्‍यादा होता है.

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नई दिल्‍ली. भारत में कोरोना की दूसरी लहर (Corona Second Wave) के मामले अभी आना बंद नहीं हुए हैं कि डेंगू (Dengue) के रूप में एक और मुसीबत सामने आ रही है. उत्‍तर-प्रदेश के कई जिलों में बड़ी संख्‍या में सामने आ रहे डेंगू के मामलों के साथ-साथ पूरे उत्‍तर-भारत में मच्‍छरों (Mosquito) से पनपने वाली इस बीमारी को लेकर चिंता पैदा हो गई है. बुखार (Fever) से पीड़ि‍त मरीजों में डेंगू संक्रमण (Dengue Infection) की पुष्टि के साथ ही मौतों की संख्‍या भी लगातार बढ़ रही है. इनमें बड़ों के साथ-साथ बड़ी संख्‍या में बच्‍चे भी शामिल हैं.

राजधानी दिल्‍ली में भी अगस्‍त से अभी तक डेंगू के 100 से ज्‍यादा मामले सामने आ चुके हैं. वहीं यूपी में पिछले हफ्ते तक डेंगू के 497 मामले सामने आ चुके हैं. मथुरा में 107, फिरोज़ाबाद में 49 डेंगू के मामले सामने आये हैं. इसके अलावा, वाराणसी में 69, लखनऊ में 84, कानपुर में 21, बस्ती में 11 जबकि मेरठ में 10 मामले बताए गए हैं. बाकी के ज़िलों में डेंगू के मामले कम हैं लेकिन धीरे-धीरे यह बीमारी अपने पैर पसार रही है. इसके अलावा डेंगू मरीजों की मौत भी बड़ी संख्‍या में हो रही है.

उत्‍तर-भारत में अगस्‍त महीने से अचानक बढ़े डेंगू के मामलों पर स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार डेंगू का कहर खतरनाक हो सकता है. इसकी कई वजहें हैं. नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) से रिटायर्ड पब्लिक हेल्‍थ स्‍पीकर डॉ. सतपाल कहते हैं कि इस साल डेंगू के आंकड़ों को देखें तो इसके खतरनाक होने को लेकर कई बातें सामने आ रही हैं.

इस बार डेंगू के खतरनाक होने के ये हो सकते हैं कारण

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पिछले कुछ दिन से यूपी में कोरोना से ज़्यादा केस डेंगू के होने के आंकड़े सामने आ रहे हैं .

डॉ. सतपाल कहते हैं कि पहले से चली आ रही कोरोना बीमारी के बाद अब इसका भी संक्रमण एक चुनौती बन सकता है. देशभर में स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र की ज्‍यादातर व्‍यवस्‍था कोविड से निपटने में जुटी हुई है ऐसे में एक और ऐसी बीमारी का पनप जाना, जिसका कोई सटीक इलाज नहीं है और जिससे बचाव के लिए कोई वैक्‍सीन (Vaccine) भी अभी तक नहीं आई है ऐसे में न केवल मेडिकल क्षेत्र के लिए बल्कि इलाज के लिए दौड़ लगाते आम लोगों के लिए भी काफी मुश्किल पैदा कर सकता है.

वे कहते हैं कि दूसरा कारण यह है कि डेंगू का अपना एक चक्र होता है. करीब चार से पांच साल में यह ज्‍यादा जानलेवा या भयंकर होकर सामने आता है. पिछले कुछ सालों के आंकड़े देखें तो केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2017 डेंगू के 1,88,401 मामले सामने आए थे जिनमें से 325 लोगों की मौत हो गई थी. उसके बाद डेंगू के मरीजों का आंकड़ा काफी नीचे पहुंच गया था. ऐसे में 2017 के बाद अब 2021 में एक बार फिर डेंगू अपने चक्र के अनुसार असर दिखा सकता है.

वहीं तीसरी कारण यह हो सकता है कि हर साल डेंगू के ज्‍यादा मामले सितंबर के आखिर या अक्‍तूबर में सामने आते थे जबकि इस बार अगस्‍त के अंत से ही डेंगू के केस बढ़ने लगे हैं. ऐसे में अक्‍तूबर आते-आते ये मामले कितने हो जाएंगे और मौतों का आंकड़ा भी बढ़ सकता है, इसका अंदाजा ही लगाया जा सकता है.

चौथा कारण बारिश (Rain) और अव्‍यवस्‍था दोनों ही हैं. इस बार बारिश हुई है लेकिन रुक-रुक कर हुई है और इससे पानी जमा होता रहा है. या तो कम बारिश हो तो पानी सूख जाता है या ज्‍यादा बारिश हो तो पानी को निकालने के इंतजाम किए जाते हैं लेकिन बारिश होने और फिर रुकने के चलते व्‍यवस्‍था इंतजाम पूरी तरह नहीं किए गए हैं जो कि डेंगू के एडीज मच्‍छर को बढ़ावा देने में मददगार है. मात्र 10 दिन के अंदर लार्वा बनने से लेकर मच्‍छर बनने तक का काम हो जाता है ऐसे में एक से दो महीने में कितने मच्‍छर पनप जाएंगे यह अनुमान लगाया जा सकता है.

डॉ. सतपाल कहते हैं कि कोरोना के चलते लोग कोविड अनुरूप व्‍यवहार अपना रहे हैं और घरों के अंदर रह रहे हैं लेकिन वे मच्‍छरों को लेकर लापरवाह हो रहे हैं. जिससे डेंगू या मलेरिया के मच्‍छर को पैदा होने में मदद मिल रही है. इसके अलावा सालों से स्‍कूल बंद हैं, बहुत ज्‍यादा सफाई भी नहीं हुई है, अभी स्‍कूल भी खुल गए हैं, वहां भी बच्‍चों के लिए खतरा हो सकता है.

बड़ों के मुकाबले बच्‍चों के लिए ज्‍यादा खतरनाक है डेंगू

पब्लिक हेल्‍थ एक्‍सपर्ट डॉ. सतपाल बताते हैं कि बड़ों की अपेक्षा बच्‍चों पर डेंगू बुखार का खतरा ज्‍यादा होता है. इसकी तमाम वजहें हैं.

. पहला बच्‍चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बड़ों के मुकाबले कम होती है. या फिर उत्‍तर भारत में पोषणयुक्‍त भोजन के मामले में बच्‍चे काफी पीछे हैं ऐसे में शरीर में शक्ति न होने के कारण बच्‍चे डेंगू का बुखार होने पर उसे झेल पाने में कमजोर साबित होते हैं.

. इसमें सबसे पहले बुखार आता है और बच्‍चे पूरी तरह अपनी बीमारी नहीं बता पाते, जिसके कारण कई दिनों या हफ्तों तक उन्‍हें सही इलाज नहीं मिल पाता और वे डेंगू की चपेट में आने के कारण गंभीर रूप से बीमार हो जाते हैं. बच्‍चों की प्‍लेटलेट्स गिर जाती हैं लेकिन इसका भी पता नहीं चल पाता है.

. बच्‍चे खेलने-कूदने के दौरान खुले में घूमते हैं या फिर घरों में रहते हैं तो मच्‍छरों को लेकर विशेष रूप से सतर्क नहीं रह पाते और बता भी नहीं पाते. इस कारण भी वे मच्‍छरों का आसान शिकार होते हैं और डेंगू से संक्रमित हो जाते हैं.

. डेंगू में अंदरूनी ब्‍लीडिंग होती है फिर चाहे वह नाक से हो, कान से या मल के रास्‍ते हो. यह काफी खतरनाक स्‍तर का डेंगू होता है लेकिन बच्‍चे इस पर ध्‍यान नहीं देते और बता भी नहीं पाते जिससे वे गंभीर स्थिति में पहुंच जाते हैं.

. डेंगू होने के बाद भी करीब 4-5 दिन बाद अगर जांच कराई जाए तभी इसका पता चल पाता है जबकि मलेरिया का आज मच्‍छर काटने पर बुखार आया है तो जांच में तत्‍काल पता चल जाता है ऐसे में जांच रिपोर्ट में सही बीमारी पता चलने में लगने वाले समय के कारण भी  खतरा बढ़ जाता है.

मथुरा पुलिस और लुटेरों के बीच चलीं गोलियां, लखटकिया बदमाश घायल, तीन साथी भी गिरफ्त में

उत्तर प्रदेश पुलिस के अफसर. (File Photo)

Crime in UP : उत्तर प्रदेश के मथुरा में पिछले दिनों हुए 1 करोड़ के लूटकांड के आरोपियों और पुलिस के बीच काफी देर फायरिंग हुई. पुलिस ने लुटेरों को गिरफ्तार करते हुए कथित तौर पर 45 लाख रुपए की बरामदगी भी की.

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मथुरा. एक बुलियन कारोबारी से करीब दो हफ्ते पहले दिनदहाड़े एक करोड़ की लूट को अंजाम देने वाले बदमाश आखिर पुलिस के हत्थे चढ़ गए. मथुरा के थाना कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत माल गोदाम रोड पर उस समय पुलिस और बदमाशों की आमने-सामने की भिड़ंत हो गई जब वॉंटेड अपराधियों की धरपकड़ के लिए कोतवाली पुलिस मुस्तैद थी. सूचना के आधार पर पुलिस ने बदमाशों की घेराबंदी करते हुए उन्हें आत्मसमर्पण करने के लिए कहा लेकिन बदमाशों ने पुलिस के बीच घिरता देख आत्मसमर्पण की जगह फायरिंग कर दी. पुलिस की जवाबी फायरिंग में एक बदमाश पैर में गोली लगने से घायल हो गया और उसके 3 साथी पुलिस की गिरफ्त में आ गए.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पुलिस ने इन बदमाशों के कब्ज़े से 45 लाख के आसपास की नगदी बरामद की. अब तक पुलिस 1 करोड़ 5 लाख की रकम में से कुल 90 लाख तक वसूल चुकी है. इस संबंध में एसएसपी गौरव ग्रोवर ने बताया कि मुठभेड़ में घायल बदमाश अरविंद 1 लाख का इनामी है. इसी अरविंद ने 16 अगस्त को अपने साथियों के साथ मिलकर दिनदहाड़े बुलियन कारोबारी से लूट की वारदात को अंजाम दिया था.

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मथुरा पुलिस और लुटेरों के बीच हुई फायरिंग में एक लाख का इनामी बदमाश घायल हुआ.

कैसे हुई थी लूट की वारदात?
बीते 16 अगस्त को मथुरा में शहर कोतवाली इलाके में बाग बहादुर पुलिस चौकी से महज़ 50 मीटर दूर बुलियन व्यापारी राजकुमार अग्रवाल के साले के लड़के अंकित बंसल के साथ वारदात हुई थी, जब वह अपने बहनोई का एक करोड़ पांच लाख रुपये स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में जमा कराने जा रहा था. इस वारदात का पुलिस ने गुरुवार को दस दिन बाद 26 अगस्त को खुलासा कर 7 आरोपियों को जेल भेज दिया था और अब उसके बचे हुए साथियों को भी धर दबोचा.

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लूट की वारदात को अंजाम देने वालों में से पुलिस ने नितेश पुत्र गिरप्रसाद, तरुण चौधरी पुत्र अर्जुन, जीतू उर्फ जितेंद्र पुत्र हरिश्चंद, गिर प्रसाद पुत्र जसवंत सिंह, जगवीरी पत्नी गिरप्रसाद निवासी भवोकरा थाना जेवर गौतमबुद्ध नगर, अजय पुत्र गोकुल सिंह निवासी कोलाहार नौहझील व मुखबिर कोमल पुत्र बनवारी निवासी महादेव घाट मथुरा को गिरफ्तार किया था.

क्या कोरोना की तीसरी लहर है मथुरा-फिरोजाबाद में बच्चों की मौत, जानिए Experts की राय

UP: मथुरा और फिरोजाबाद में अब तक 50 मासूम बच्चों की मौत से हड़कंप मचा हुआ है.

UP News: यूपी सरकार के आंकड़े के मुताबिक 1 सितम्बर की सुबह 8 बजे तक मथुरा में 8 जबकि फिरोजाबाद में 42 बच्चों की मौत हो चुकी है.

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लखनऊ. पिछले एक हफ्ते में ही उत्तर प्रदेश के दो जिलों मथुरा (Mathura) और फिरोजाबाद (Firozabad) में 50 मासूम बच्चों की मौत हो गयी है. ये सरकारी आंकड़ा है. बच्चों को पहले तेज बुखार हुआ फिर पेट में दर्द और दो से तीन दिनों में ही मौत होने लगी. अब सरकारी अमले ने दोनों जिलों में डेरा डाल दिया है. उम्मीद है हालात जल्द ठीक हो जायेंगे. लेकिन, इन दोनों जिलों में हो रही बच्चों की बीमारी क्या कोरोना की तीसरी लहर (COVID-19 Third Wave) की दस्तक है? ये सवाल हर किसी की जुबान पर तैर रहा है.

बहुत से लोगों ने इसे कोरोना की संभावित तीसरी लहर से जोड़ दिया है. बच्चों को हो रहे बुखार को रहस्यमयी बताया जा रहा है. लेकिन, सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है. बच्चों की बिगड़ती तबीयत और हो रही मौतों के पीछे कोई और जिम्मेदार है.

सरकारी आंकड़े के मुताबिक 1 सितम्बर की सुबह 8 बजे तक मथुरा में 8 जबकि फिरोजाबाद में 42 बच्चों की मौत हो चुकी है. मथुरा में बीमार हुए बच्चों के 184 सैम्पलों की जांच में डेंगू के 91, स्क्रबटाइफस के 29 और लैप्टो स्पोइरोसिस के 48 मामले पुष्ट हुए हैं. फिरोजोबाद में जांच के लिए सैम्पल भेजे गये हैं. नतीजे आने बाकी हैं.

फिरोजोबाद में कैम्प कर रहे वेक्टर बॉर्न डिजीजेज के ज्वाइण्ट डायरेक्टर डॉ. अवधेश यादव ने कहा कि एक भी बीमार बच्चा कोरोना पॉजिटिव नहीं मिला है. सभी की कोरोना जांच की गयी है. सभी डेंगू, मलेरिया और स्क्रबटाइफस के मरीज मिले हैं. कोरोना का बच्चों की बीमारी से दूर-दूर तक लेना नहीं है. इसे किसी भी सूरत में कोरोना की संभावित तीसरी लहर से जोड़कर नहीं देखना चाहिए. ऐसी अफवाह से समस्यायें और गंभीर हो जायेंगी.

तो फिर बच्चों की मौत क्यों हो रही है?

मथुरा और फिरोजोबाद में बुखार से सिर्फ बच्चों की ही मौत नहीं हुई है बल्कि बड़े भी मौत के शिकार हुए हैं. ये जरूर है कि बच्चों की संख्या बहुत ज्यादा है. लखनऊ से मथुरा और फिरोजाबाद गई डॉक्टरों की टीम ने कहा कि बीमारी का सही समय पर इलाज हो जाता तो बच्चों की जान बचाई जा सकती थी. गांव में झोलाछाप डाक्टरों ने बुखार उतारने के लिए दवाओं की ओवरडोज दे दी. साथ ही स्टेरायड भी दे दिया. इससे बुखार तो उतर गया लेकिन, तबीयत बिगड़ती चली गयी. तीन दिन के बाद बच्चे शॉक में चले गये. फिर एक-एक कर शरीर के अंग फेल होते गये और बच्चों की मौत होती गयी.

ऐसे में बच्चों को न तो कोई रहस्यमयी बीमारी या बुखार हुआ है और ना ही ये कोरोना की संभावित तीसरी लहर है. बल्कि ये इलाज में लापरवाही और गांव-गांव में चिकित्सीय सुविधा के अभाव का नतीजा है.

मथुरा में मुस्लिम डोसा विक्रेता का स्टॉल तोड़ने वाला लड़का पकड़ा गया, अन्य की तलाश जारी

गौरतलब है कि यह घटना 18 अगस्त को कोतवाली क्षेत्र में स्थित विकास बाजार में घटी थी. (सांकेतिक फोटो)

Mathura Crime News: आरोपी 18 अगस्त को विकास बाजार में ‘श्रीनाथ डोसा कॉर्नर’ के नाम से दुकान करने वाले मुस्लिम युवक की दुकान पर कथित रूप से तोड़फोड़ करने वाले युवकों में शामिल बताया जा रहा था.

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मथुरा. यूपी के मथुरा में मुस्लिम डोसा विक्रेता (Muslim Dosa Seller) के स्टाल पर तोड़फोड़ के दो हफ्ते बाद आरोपी लड़कों में से एक को पुलिस ने गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है. पकडे गए लड़के का नाम श्रीकांत बताया गया है. कहा गया है कि वह 18 अगस्त को विकास बाजार में ‘श्रीनाथ डोसा कॉर्नर’ (Shrinath Dosa Corner) के नाम से दुकान करने वाले मुस्लिम युवक की दुकान पर तोड़फोड़ करने वाले युवकों में शामिल था. थाना कोतवाली प्रभारी सूरज प्रकाश शर्मा ने बताया कि पुलिस श्रीकांत के अलावा दूसरे हमलावरों की भी तलाश कर रही है.

शर्मा के अनुसार श्रीकांत ने अपने साथियों के नाम और उनकी पहचान भी बता दी है. उन्होंने बताया कि श्रीकांत ने अपना अपराध कुबूल कर लिया है. श्रीकांत का कहना है कि ‘‘हम लोग किसी राजनीतिक दल के सदस्य नहीं हैं बल्कि कृष्णभक्त हैं. इसीलिए हम एक मुस्लिम दुकानदार द्वारा अपनी दुकान का नाम अपने इष्ट देव के नाम पर न रखकर श्रीनाथजी (, भगवान श्रीकृष्ण का ही एक अन्य रूप) के नाम पर रखने से नाराज थे’’. इन सभी हमलावरों ने उसे अल्लाह या खुदा के नाम पर दुकान का बोर्ड लगाने को कहा था.

श्रीकांत गिरफ्तार
गौरतलब है कि यह वारदात 18 अगस्त को कोतवाली क्षेत्र में विकास बाजार में हुई थी. उस दिन कुछ युवकों ने खुद को कृष्ण भक्त बताते हुए सदर थाना क्षेत्र के तकिया मोहल्ला निवासी मुस्लिम युवक इरफान की ढकेल का ‘श्रीनाथ पॉवभाजी कॉर्नर’ नाम का बोर्ड तोड़ दिया था तथा उसे अपने देवता के नाम पर बोर्ड बनाने की सलाह दी थी. पिछले दिनों इस घटना का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद पुलिस सक्रिय हुई और इरफान से तहरीर लेकर रविवार को मुकदमा दर्ज किया और आरोपी युवकों की तलाश शुरु की गई और आज एक आरोपी श्रीकांत को गिरफ्तार कर लिया गया.

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