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मऊ में 12 हजार चावल की बोरियां चढ़ गई बारिश की भेंट

मऊ में 12 हजार चावल की बोरियां चढ़ गई बारिश की भेंट

मऊ जिले के रेलवे स्टेशन पर पंजाब से आया हजारों बोरी चावल बेमौसम की बारिश की भेंट चढ़ गया.  रेलवे स्टेशन पर अनाज भीगने का यह कोई पहला वाक्या नहीं है. इसके पहले भी कई बार आनाज बारिश की भेंट चढ़ चुका है, जिसकी खबरें मीडिया ने प्रमुखता के साथ उठाई लेकिन इसके बावजूद आज तक कोई मुकम्मल व्यवस्था न तो ठेकेदार की तरफ से की गई और ना ही विभाग की तरफ से कोई व्‍यवस्‍था की गई।

मऊ जिले के रेलवे स्टेशन पर पंजाब से आया हजारों बोरी चावल बेमौसम की बारिश की भेंट चढ़ गया.  रेलवे स्टेशन पर अनाज भीगने का यह कोई पहला वाक्या नहीं है. इसके पहले भी कई बार आनाज बारिश की भेंट चढ़ चुका है, जिसकी खबरें मीडिया ने प्रमुखता के साथ उठाई लेकिन इसके बावजूद आज तक कोई मुकम्मल व्यवस्था न तो ठेकेदार की तरफ से की गई और ना ही विभाग की तरफ से कोई व्‍यवस्‍था की गई।

मऊ जिले के रेलवे स्टेशन पर पंजाब से आया हजारों बोरी चावल बेमौसम की बारिश की भेंट चढ़ गया.  रेलवे स्टेशन पर अनाज भीगने का यह कोई पहला वाक्या नहीं है. इसके पहले भी कई बार आनाज बारिश की भेंट चढ़ चुका है, जिसकी खबरें मीडिया ने प्रमुखता के साथ उठाई लेकिन इसके बावजूद आज तक कोई मुकम्मल व्यवस्था न तो ठेकेदार की तरफ से की गई और ना ही विभाग की तरफ से कोई व्‍यवस्‍था की गई।

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मऊ जिले के रेलवे स्टेशन पर पंजाब से आया हजारों बोरी चावल बेमौसम की बारिश की भेंट चढ़ गया.  रेलवे स्टेशन पर अनाज भीगने का यह कोई पहला वाक्या नहीं है. इसके पहले भी कई बार आनाज बारिश की भेंट चढ़ चुका है, जिसकी खबरें मीडिया ने प्रमुखता के साथ उठाई लेकिन इसके बावजूद आज तक कोई मुकम्मल व्यवस्था न तो ठेकेदार की तरफ से की गई और ना ही विभाग की तरफ से कोई व्‍यवस्‍था की गई।

पंजाब से आने वाले यह चावल गरीबों को कोटेदारों द्वारा वितरित किए जाने वाले चावल है. चावल को एफसीआई के गोदाम में रखा जाता है, जिसके बाद उसको पूरे जिले में वितरित किए जाने का काम किया जाता है. हालांकि इस मामले में एफसीआई की तरफ से इस तरह के मामले में कहा जाता है कि जब तक उनके गोदाम में नहीं रखा जाता है तब तक उनकी तरफ से कोई व्यवस्था नहीं की जाती है.

गोदाम में रखने के बाद उनकी जिम्मेदारी होती है, फिलहाल भारत सरकार द्वारा एफसीआई के लिए भेजे गए चावल की 12000 हजार बोरियां पानी में भीगकर पूरी तरह से खराब हो चुकी हैं और माल गोदाम के स्टाफ के कर्मचारियों का कहना है कि उसकी व्यवस्था कराई गई है.

फिलहाल इस मामले मे स्थानीय लोगों का मानना है सरकार के सरकारी अनाज का हाल यही रहता है. गौरतलब हो कि सरकार द्वारा सरकारी अनाज के हाल बेहाल है, जिसको मीडिया अपनी जिम्मेदारी समझते हुए बार-बार दिखाने का प्रयास करता है, लेकिन सरकारी मिशनरी है कि उसकी कानों पर जू तक नहीं रेंगता है ऐसा ही इस बार भी हुआ है सारे सरकारी दावे खोखले साबित रह गए.

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