अखिलेश के साथ नहीं बनी बात, राजभर का ऐलान- अकेले लड़ेंगे उपचुनाव

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 25, 2019, 10:37 PM IST
अखिलेश के साथ नहीं बनी बात, राजभर का ऐलान- अकेले लड़ेंगे उपचुनाव
राजभर का उपचुनावों को लेकर ऐलान

साथ ही ये भी साफ किया है कि चुनावों के बाद किसी भी दल के साथ समझौता हो सकता है, हमारे लिए सारे विकल्प खुले हैं.

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उत्तर प्रदेश(Uttar pradesh) की राजनीति कभी सीधी चाल नहीं चलती एक बार फिर से ये साबित हो गया.  भारतीय समाज पर्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर(Om Prakash rajbhar) ने ऐलान किया है कि वो 13 सीटों पर होने वाले उपचुनावों में अकेले लड़ेंगे. साथ ही ये भी साफ किया है कि चुनावों के बाद किसी भी दल के साथ समझौता हो सकता है, हमारे लिए सारे विकल्प खुले हैं. ये सारी बातें उन्होंने कोपागंज थाना क्षेत्र के फतेपुर गांव में एक जनसभा के दौरान कही.

पहले कहा था 27 अगस्त को होगा फैसला
वहीं पिछले दिनों ये अटकलें तेज हो गई थी कि अखिलेश यादव और राजभर मिलकर यूपी में 13 सिटों पर उपचुनाव लड़ेंगे. ऐसा इसलिए भी कि बलिया (Ballia) पहुंचे ओपी राजभर से जब अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) से हुई मुलाकात को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'अखिलेश से हमारी अनौपचारिक मुलाक़ात थी. राजनीति में ये एक शिष्टाचार है. रही बात समझौते की तो वो किसी के भी साथ हो सकता है.' वहीं पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरविंद राजभर ने साफ कहा कि सपा के साथ गठबंधन पर पार्टी 27 अगस्त को फैसला करेगी.

उपचुनाव की तैयारी में जुटी है भासपा

रविवार को ओम प्रकाश राजभर बलिया (Ballia) के बेल्थरा रोड तहसील पहुंचे. जहां उन्होंने भासपा की सदस्यता अभियान व कार्यकर्ता बैठक के दौरान पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से आगामी दिनों में यूपी विधानसभा की रिक्त 13 सीटों पर होने वाले उपचुनाव की तैयारी में जुट जाने की बात कही. इस दौरान उन्होंने कहा कि राजनीति में सम्भावनाएं रहती है और गठबंधन किसी के साथ स्थायी नहीं रहता है.

मुलाकात को बताया था राजनीतिक शिष्टाचार
वही जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि सपा मुखिया अखिलेश यादव से आपकी मुलाक़ात को मान लिया जाए कि आप यूपी विधान सभा के उप चुनाव में सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे? इस पर उन्होंने कहा कि अखिलेश से हमारी अनौपचारिक मुलाक़ात थी. हम सत्ता में थे तो भी अखिलेश से, मुलायम सिंह से, मायावती व प्रियंका गांधी से मिलते थे और आज भी सबसे मिलते हैं. राजनीति में ये एक शिष्टाचार है. रही बात समझौते की तो वो किसी के भी साथ हो सकता है.
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(आनंद मिश्रा की रिपोर्ट)

 

 

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First published: August 25, 2019, 9:34 PM IST
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