Mau News: 7 वर्ष की सजा वाले बंदियों की शुरू हुई रिहाई, निःशुल्क मिलेगी वकीलों की मदद

7 वर्ष की सजा वाले बंदियों की शुरू हुई रिहाई

इसमे जेल अधीक्षक (Jail Superintendent) के सहयोग के लिए पांच पीएलबी और पांच पैनल अधिवक्ताओं को नामित किया गया है. जो जेल प्रशासन का सहयोग करेगें.

  • Share this:
मऊ. प्रदेश की जेलों में कोरोना संक्रमण (Corona Infection) फैलने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) और हाईपावर कमेटी की बैठक में सात वर्ष की सजा वाले बंदियों को रिहा करने का आदेश दिया गया है. इसके लिए जिला जज ने दो न्यायिक अधिकारियों को नामित किया है. जिसमें एडीजे एफटीसी आसिफ इकबाल रिजवी को सत्र न्यायालय द्धारा विचारणीय मामलों में जेल अधीक्षक की ओर से भेजे गए प्रार्थना पत्र पर रिहा करने का आदेश जैसा उचित समझेंगे पारित करेगें. वहीं मजिस्ट्रेट न्यायालय द्धारा विचारणीय मामलों मे निरुद्ध मामलों मे जेल अधीक्षक की ओर से भेजे गए प्रार्थना पत्र पर न्यायिक मजिस्ट्रेट/ सिविल जज जूनियर डिवीजन सदर वकील रिहा करने के लिए जैसा उचित समझेंगे आदेश पारित करेगें.

बंदियों को यह सुविधा निःशुल्क जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से उपलब्ध कराए जाने की जिम्मेदारी दी गई है. इसमे जेल अधीक्षक के सहयोग के लिए पांच पीएलबी और पांच पैनल अधिवक्ताओं को नामित किया गया है. जो जेल प्रशासन का सहयोग करेगें. और क्रमवार एक- एक दिन के अंतराल पर जिला जेल पहुंचकर जेल के स्टाफ का सहयोग करेगें. इसमें रामप्रीत कुशवाहा, बृजेश सिंह, फतेहबहादुर सिंह, निर्मला यादव और ज्ञान प्रकाश उपाध्याय को नामित किया गया है.

UP: योगी सरकार का बड़ा ऐलान, पोस्ट Corona मरीजों को मिलेगी फ्री में इलाज की सुविधा

दरअसल, यह पूरी व्यवस्था जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से बंदियों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है. अगर किसी बंदी से अथवा उसके पैरवीकार से कोई इसके लिए रूपयों की मांग करेगा तो वह कदाचार यानि भ्रष्टाचार की श्रेणी में आएगा. उसके विरुद्ध कार्यवाही की जा सकती है. ऐसे में आमजन ऐसे किसी के बहकावे में न आएं. अगर उनका मामला हाईपावर कमेटी की ओर से जारी गाइडलाइंस में आता है तो वह निःशुल्क रिहा हो जाएगा. अगर कोई पैसे की मांग करता है तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मऊ अथवा मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के यहा शिकायत कर सकता है.