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OMG! जिस नवजात को पॉलिथीन में पैक कर मरने के लिए छोड़ दिया, उसे अपनाने को लोग कर रहे दुआ

नवजात बच्ची इस समय अस्‍पताल में भर्ती है.
नवजात बच्ची इस समय अस्‍पताल में भर्ती है.

मेरठ (Meerut) के शताब्दी नगर में कूड़े के ढेर मिली नवजात बच्‍ची को चाइल्‍डलाइन (Childline) की मदद से अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है, जहां वह पहले से बेहतर है. जबकि इस बच्‍ची को अपनाने (Adoption) के लिए 15 से अधिक परिवार प्रार्थना और दुआ कर रहे हैं.

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मेरठ. उत्‍तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) के शताब्दी नगर में कूड़े के ढेर में मिली नवजात बच्ची को गोद (Adoption) लेने वालों का तांता लगा हुआ है. कहते हैं कि जाको राखे साईंया मार सके ना कोय. यकीनन जिस नवजात बच्ची को उसके माता-पिता ने पॉलिथीन में पैक कर मरने के लिए छोड़ दिया गया था उसे बचाकर अपनी गोद भरने के लिए लोगों का तांता लगा हुआ है. कूड़े के ढेर में मिली इस बच्ची को गोद लेने के लिए अब तक 15 परिवार सामने आ चुके हैं. इस बच्‍चे को बचाने में चाइल्‍डलाइन (Childline) ने अहम भूमिका निभाई है.

लोग कर रहे प्रार्थना
लोग प्रार्थना कर रहे हैं कि काश ये बिटिया उनके नसीब में आ जाये. पुलिस की टीम जहां नवजात को मरने के लिए छोड़ने वाले माता-पिता की तलाश कर रही है तो वहीं इस बेटी को अपने घर का चिराग बनाने के लिए लोग दुआ कर रहे हैं. फिलहाल ये बेटी हॉस्पिटल में जिंदगी की जद्दोजहद कर रही है. डॉक्टर्स इस बच्ची का इलाज कर रहे हैं लेकिन उसे अभी भी क्रिटिकल केयर यूनिट में रखा गया है.

चाइल्डलाइन ने बच्‍ची को बचाया
एक तरफ क्रूर माता-पिता जिन्होंने बच्ची को पॉलिथीन में कूड़े की तरह पैक कर मरने के लिए गंदगी के ढेर पर फेंक दिया था, तो दूसरी तरफ भला हो चाइल्डलाइन का जिन्होंने बच्ची का जीवन बचा लिया और उसे अस्पताल पंहुचाया. जबकि अब बच्ची पहले से बेहतर महसूस कर रही है. सोचिए उस वक़्त इस नवजात पर क्या बीत रही होगी जब वो पॉलिथीन में पैक थी और एक एक सांस के लिए संघर्ष कर रही थी, लेकिन कहते हैं न कि मारने वाले से बड़ा बचाने वाला होता है. लोगों ने पॉलिथीन के अंदर से बच्चे के रोने की आवाज सुनी और चाइल्‍डलाइन को सूचना दी और आखिरकार इस बच्ची को जीवन नसीब हुआ.



ये बच्ची अब किलकारियां भर रही है, लेकिन बहुत जल्द उसे एक नया आशियाना मिल जाएगा. ये बेटी तो जिस घर भी पंहुच जाएगी वहां रोशनी लुटायेगी, लेकिन इस नवजात को मरने के लिए छोड़ने वालों पर पुलिस कार्रवाई कब तक होती है ये लाख टके का सवाल है.
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