मार्च 2020 तक UP में लगाए जाएंगे 22 करोड़ पौधे, साफ्टवेयर बताएगा, कितना कार्बन सोखेगा पेड़

आज के इस हाईटेक युग को हम प्रदूषण युग भी कह सकते हैं. हम हरे पेड़ काटकर कंक्रीट के जंगल तैयार करते जा रहे हैं. ऐसे में शासन ने वन विभाग सहित तमाम अन्य विभागों को प्रदेश में अगले साल मार्च 2020 तक 22 करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य दिया है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: June 7, 2019, 4:29 PM IST
मार्च 2020 तक UP में लगाए जाएंगे 22 करोड़ पौधे, साफ्टवेयर बताएगा, कितना कार्बन सोखेगा पेड़
मार्च 2020 तक UP में लगाए जाएंगे 22 करोड़ पौधे, साफ्टवेयर बताएगा, कितना कार्बन सोखेगा पेड़.
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Updated: June 7, 2019, 4:29 PM IST
आज के इस हाईटेक युग को हम प्रदूषण युग भी कह सकते हैं. हम हरे पेड़ काटकर कंक्रीट के जंगल तैयार करते जा रहे हैं. ऐसे में शासन ने वन विभाग सहित तमाम अन्य विभागों को प्रदेश में अगले साल मार्च 2020 तक 22 करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य दिया है. उत्तर प्रदेश में 9.18 फीसद वनावरण है. हरियाली बढ़ाने के लिए शासन की ऐसे पौधे लगाने की तैयारी है, जो कार्बन सोखने के साथ ज्यादा मात्रा में आक्सीजन देते हैं. आपने जो पौधा लगाया है, वह अपने जीवनकाल में कितना कार्बन सोखेगा.

अब एक विशेष साफ्टवेयर इसकी जानकारी देगा. उत्तर प्रदेश में 22 करोड़ पौधरोपण के दौरान पहली बार इस कार्बन सिक्वेट्रेशन तकनीक का प्रयोग होगा. इस प्रयोग से यह पता चल जाएगा कि पौधरोपण के 50 साल बाद ग्रीन हाउस गैसों में कितनी कमी आएगी. यही नहीं, हर व्यक्ति खुद के रोपे गए पौधे से सोखी गई सीओटू यानी कार्बन डॉइ ऑक्साइड का स्तर भी जान सकेगा.

जुलाई से मार्च 2020 तक चलाया जाएगा पौधरोपण अभियान
शासन जुलाई से मार्च 2020 तक पौधरोपण अभियान जारी रखेगा. हर पौधा अपने जीवनकाल में कितना कार्बन डाई आक्साइड अवशोषित करेगा, इसके आकलन के लिए भारत की दो कंपनियों टाटा एनर्जी रिसर्च इंस्टीटयूट यानी टेरी और नेशनल इन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीटयूट यानी नीरी के अतिरिक्त विदेशी एजेंसियों से भी बात चल रही है.

फीड की जाएगी हर पेड़ की सीओटू सोखने की क्षमता
ऐसी एजेंसियां एक खास साफ्टवेयर के जरिए हर पेड़ की सीओटू सोखने की क्षमता फीड करेंगी. इससे पता लगेगा कि 22 करोड़ पौधे अपने जीवनकाल में वायुमंडल को कितना शुद्ध बना पाएंगे. ग्रीन हाउस गैसों में कमी के साथ ही घने वनों के आसपास तापमान, वर्षा एवं मिट्टी की उर्वरा शक्ति की भी परख होगी. पेड़ कार्बन डाई आक्साइड सोखते हैं. घने हरे क्षेत्र में सीओटू को रोककर उसे अन्य गैसों से अलग कर लिया जाता है. पेड़ों के मध्य सीओटू की खपत का पता लगाया जाता है. मेरठ में 18.5 लाख पौधे लगाए जाएंगे.

मेरठ और सहारनपुर मंडल में लगाए जाएंगे 1 करोड़ 82 लाख पेड़
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साथ ही मेरठ और सहारनपुर मंडल में तकरीबन 1 करोड़ 82 लाख पेड़ लगाए जाएंगे. प्रदेश सरकार पेड़ों की निगरानी के लिए जीपीएस, ड्रोन, सेटेलाइट आदि तकनीकों का प्रयोग करेगी. वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी, मोबाइल एप समेत सरकार पौधरोपण की थर्ड पार्टी मानीटरिंग भी कराएगी. हर पंचायत को एक इकाई मानकर जियो टैगिंग की जाएगी. हर गांव में एक ट्री-गार्जियन नियुक्त होगा, जिसे विन विभाग 16 जून तक प्रशिक्षित करेगा. हरियाली बढ़ने का असर स्थानीय तापमान, मौसम, भूमि कटाव व बारिश पर भी पड़ता है. एक पेड़ अपने जीवनकाल में कई वातानुकूलित मशीनों से ज्यादा ताजगी देता है.

एक पेड़ के इतने लाभ
50 साल की उम्र में एक पेड़ 150 किलो कार्बन डाई आक्साइड सोखता है. 17.50 लाख रुपये की आक्सीजन पैदा करता है. वायु प्रदूषण रोकने के लिए 35 लाख रुपये के खर्च को कम करता है. भूमि कटाव होने पर 18 लाख रुपये का खर्च रोकता है. 41 लाख रुपये के पानी की रिसाइकिलिंग करता है. न्यू़ज़ 18 की टीम ने मेरठ के संजय वन का भी जायज़ा लिया, जहां एक लाख से ज्यादा पौधे रोपे जाने को तैयार रखे गए हैं. ये पेड़ शीशम सागौन, यूकेलिप्टस सहित तकरीबन 45 किस्म के हैं.

सरकार 15 जुलाई से 25 मार्च 2020 तक पौधरोपण का कार्यक्रम बना चुकी है. पहली बार कार्बन सिक्वेट्रेशन तकनीक से हर पेड़ के ज़रिए जीवनकाल में सोखी जाने वाली कार्बन डाईआक्साइड का पता किया जा सकेगा. हर व्यक्ति यह जान सकेगा कि उसके रोपे गए पौधे का वायुमंडल शुद्धिकरण में कितना योगदान रहा. वायुमण्डल को शुद्ध करने के लिए वन विभाग तो तैयारी कर ही रहा है. आप भी एक पेड़ अवश्य लगाइए और वातावरण को शुद्ध करने में अपना अहम योगदान दीजिए.

रिपोर्ट – उमेश श्रीवास्तव

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First published: June 7, 2019, 4:29 PM IST
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