Covid-19: मेरठ के 300 गांव हुए कोरोना मुक्त, नहीं मिला एक भी केस, लोगों ने ऐसे वायरस को हराया

मेरठ के गांवों में कोरोना को हराने का कैसा संकल्प ले लिया गया है इसका उदाहरण मेरठ का मटौर गांव है.

मेरठ के कई गांवों में कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए सेल्फ-लॉकडाउन के फॉर्मूले का असर. जिले के डीएम ने कहा- 53 राजस्व गांव में बीमारी का एक भी एक्टिव केस नहीं, 201 गांवों में भी लगातार ठीक हो रहे लोग.

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मेरठ. कोरोना वायरस को हराने की तरफ मेरठ बढ़ चला है. इसका अंदाज़ा आप इस बात से लगाइए कि यहां सभी राजस्व गांवों में टेस्टिंग ट्रेसिंग के बाद आए आंकडे़ उत्साहित करने वाले हैं. मेरठ के 300 गांव ऐसे हैं जहां कोरोना का एक भी केस नहीं पाया गया है. मेरठ के ज़िलाधिकारी के बालाजी का कहना है कि घर- घर सर्वे के बाद ये आंकड़े सामने आए हैं. मेरठ के ज़िलाधिकारी बालाजी का कहना है कि 53 अन्य गांव भी एक्टिव कोरोऩा केसेज़ बाहर आ गए हैं. इन 53 गांवों में भी अब कोरोना का संक्रमण आज की तारीख में नहीं है. उन्होंने कहा कि प्रत्येक राजस्व गांव में निगरानी की जा रही है. डीएम ने बताया कि हर गांव को कोरोना मुक्त करने का पूर्ण प्रयास है. डीएम ने कहा कि वर्तमान में मेरठ के सिर्फ 201 राजस्व गांवों में कोरोना का संक्रमण है, जहां लगातार लोग ठीक हो रहे हैं.

मेरठ के रजपुरा ब्लॉक के ज्ञानपुर, पचपेड़ा, दत्तावली, शेखपुरा, राली चौहान, गांवड़ी, अब्दुल्लापुर, उल्देपुर, सोफीपुर, कसेरुखेड़ा, सैनी, पतला, मसूरी, भगवानपुर ,आलमपुर और मुरलीपुर सहित तकरीबन तीन सौ गांव ऐसे हैं जहां अब कोरोना का एक भी केस नहीं है. इन गांवों ने कोरोना कर्फ्यू के साथ- साथ सेल्फ लॉकडाउन का पालन किया और अपने गांव को कोरोना मुक्त कर दिया.

गांव में बाहरी लोगों के प्रवेश पर लगाई पाबंदी
मेरठ के गांवों में कोरोना को हराने का कैसा संकल्प ले लिया गया है इसका उदाहरण मेरठ का मटौर गांव है. इस गांव में बीते दिनों ग्रामीणों ने गांव के बाहर एक बैनर लगा दिया था. जिसमें बाहरी लोगों के प्रवेश पर पाबंदी की बात लिखी गई थी. ग्रामीणों ने अपने गांव के बाहर बैरिकैडिंग की थी. इस गांव के लोगों ने पोस्टर में सबसे उपर लिखा कि अपनी सुरक्षा अपने हाथ. उचित दूरी मुंह पर मास्क ज़रूरी. पोस्टर की अगली लाइन में लिखा गया है बाहरी प्रवेश निषेध है. अगली लाइन में विस्तार से लिखा गया है कि कोरोना महामारी रोकने के लिए गांव में बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित है. फल और सब्ज़ी विक्रेताओं के लिए भी आवश्यक निर्देश दिए गए हैं. लिखा गया कि विक्रेता गांव मटौर का निवासी हो. मुंह पर मास्क व हाथ में दस्ताने हों. केवल उन ग्राहकों को फल व सब्जी दें, जो मास्क लगाए हों. सामग्री का मूल्य उचित हो. नियम तोड़ने पर 2000 रुपए जुर्माना लगाने की बात भी पोस्टर पर लिखी गई थी.

सेल्फ लॉकडाउन का ये फॉर्मूला कमाल
ग्राम प्रधान की ओर से जारी इस पोस्टर में लिखा गया है कि कोरोना हर जगह बारात लेकर पहुंच चुका है. न ही किसी से हाथ मिलाएं. नमस्ते करके काम चलाइए. कोरोना का दूर भगाईए का स्लोगन लिखा हुआ है. आगे लिखा हुआ है घर में रहकर न हों बेचैन, तोड़ें कोविड 19 की ये चेन. ऐसे ही कई अऩ्य गांवों ने भी सेल्फ लॉकडाउन का पालन करके महामारी के वायरस को हरा दिया है. इसी का नतीज़ा है कि मेरठ में लगातार कोरोना का ग्राफ नीचे आ रहा है. प्रशासन भी ग्रामीणों के सेल्फ लॉकडाउन के इस फॉर्मूले को कारगर मान रहा है.