'रिवाल्वर दादी' के आगे पस्त हैं अच्छे-अच्छे शूटर

86 साल की शूटर चंद्रो ने तोमर ने शूटिंग में सैकड़ों मैडल अपने नाम किए हैं.

  • Share this:
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले बागपत में एक बुजुर्ग महिला उन लोगों के लिए मिशाल बनी है जो उम्र के आखिरी पड़ाव पर हार मान जाते है. 86 साल की शूटर चंद्रो ने तोमर ने शूटिंग में सैकड़ों मैडल अपने नाम किए हैं. देश ही नहीं, विदेशों में भी शूटिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है. इस वक्त वह गांव और आसपास की लड़कियों को शूटिंग के गुर सिखा रही हैं. इस कारनामे की वजह से यह महिला पूरे इलाके में शूटर दादी के नाम से मशहूर है.

चंद्रो ने आम खिलाड़ियों की तरह युवा अवस्था से शूटिंग शुरू नहीं की, बल्कि बुजुर्ग अवस्था में शुरू की थी. जानकारी के मुताबिक शूटर दादी चंद्रो अपनी पोती शेफाली को निशानेबाजी सिखाने के लिए उसके साथ डॉ राजपाल की जोहड़ी गांव में शूटिंग रेंज पर उसके साथ जाया करती थी.

दादी ने भी एक दिन वहां रखी पिस्टल से निशाना लगाया, उसे देखकर सब अचंभित रह गए. दादी ने पिस्टल से टारगेट को भेद दिया, सभी ने दादी के निशाने को काफी सराहा तो दादी के मन में भी कुछ कर गुजरने की आई. दादी समाज की बंदिशों को छोड़कर निशानेबाज दादी बन गई.



दादी ने 2002 से देश और विदेश में निशानेबाजी की प्रतियोगिताओं में भाग लिया और कई मैडल अपने नाम किए. आज 86 साल की उम्र में भी चंद्रो सटीक निशाना लगाती है. लड़कियां आगे बढ़ें इसके लिए वह उन्हें कोचिंग देकर निशानेबाजी के गुर भी सिखाती हैं. दादी की काबिलियत के चलते उन्हें देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सम्मानित कर चुके हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज