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गांधी जयंती: मेरठ के इस बरगद ने 1943 से सहेज रखी है गांधी की याद, रोचक है वजह

गांधी जयंती: मेरठ के इस बरगद ने सहेज रखी है गांधी की याद,

गांधी जयंती: मेरठ के इस बरगद ने सहेज रखी है गांधी की याद,

Mahatma Gandhi: मेरठ कॉलेज में आज भी स्मारक और बरगद का पेड़ मौजूद हैं. जहां एक समय में गांधी जी के अनशन तोड़ा था. मेरठ कॉलेज के छात्रों और अन्य नागरिकों ने इसी स्थान पर महायज्ञ का आयोजन किया था. जो 194 घंटे चला था.

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मेरठ. गांधी जयंती (Gandhi Jayanti) पर समूचा देश बापू को नमन कर रहा है. क्रान्ति की नगरी मेरठ Meerut और गांधी का अदभुत नाता है. यहां बापू दो बार आए और दोनों बार उनका दौरा ऐतिहासिक था. इस शहर से महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की कई यादें जुड़ी हैं, जिनमें मेरठ कॉलेज स्थित एक बरगद के पेड़ का भी नाता बापू से जुड़ा हुआ है. 1943 में जब गांधी ने अपना अनशन तोड़ा था तो यहां 194 घंटे का महायज्ञ हुआ था.

क्रान्ति की नगरी मेरठ इतिहास की साक्षी है. आज़ादी के दीवानों ने तो यहां 10 मई 1857 को क्रांति का बिगुल फूंका था. अपने जीवनकाल में गांधी दो बार मेरठ आए. पहली बार 22 जनवरी 1920 को उनका आगमन हुआ. इतिहासकार डॉक्टर अमित पाठक बताते हैं कि महात्मा गांधी दिल्ली से मेरठ के देवनागरी इंटर कॉलेज पहुंचे थे. यहां सभी वर्गों के लोग इकट्ठा थे. उनके शहर भ्रमण के लिए बग्गी तैयार की गई थी. इसी बग्गी पर गांधी जी बैठकर मेरठ के घंटाघर पहुंचे थे, जहां उन्होंने ऐतिहासिक भाषण दिया था. ये सभा हिंदू मुस्लिम एकता की भी मिसाल बनी थी. इतिहासकार बताते हैं कि यहां हिंदू भाईयों ने चांद तारा तो मुस्लिम भाईयों ने पीला टीका लगाकर गांधी जी का स्वागत किया था.

इसके बाद गांधी जी मेरठ के सनातन धर्म हॉल पहुंचे थे. यहां उन्होंने महिलाओं को संबोधित किया था. इसके बाद सबसे बड़ा आयोजन मेरठ के जिम खाना मैदान में हुआ था. यहां गांधी जी का नाता मेरठ के एक बरगद के पेड़ से भी है. मेरठ कॉलेज में आज भी स्मारक और बरगद का पेड़ मौजूद हैं. जहां एक समय में गांधी जी के अनशन तोड़ा था तो मेरठ कॉलेज के छात्रों और अन्य नागरिकों ने इसी स्थान पर महायज्ञ का आयोजन किया था. जो 194 घंटे चला था.

वाकई में गांधी जी की हर कहानी प्रेरित करती है. इसीलिए तो मेरठ स्थित गांधी आश्रम में आज भी चरखे पर सूत कातकर हर वर्ष उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किये जाते हैं. गांधी जी के सिद्धान्तों को उनके उसूलों को याद किया जाता है. मेरठ में गांधी जयंती के अवसर पर मेरठ को इकोलॉजिकल पार्क का तोहफा भी इस वर्ष मिल गया. मेरठ कैंट में सेना ने इस इकोलॉजिकल पार्क का शुभारंभ किया. पार्क के माध्यम से इंडो पाक वॉर 1971 के शहीदों को नमन किया गया. इसी पार्क को दो हजार प्रकार के विभिन्न पौधों से सजाया गया.

इकोलॉजिकल गार्डन में फल, फूल, औषधि और ऑक्सीजन वाले पौधे लगाए गए हैं. ये पार्क भी शांति का ही संदेश देता नज़र आता है. गांधी जयंती के शुभ अवसर पर आप सभी को शुभकामनाएं.

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