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अपना अस्तित्व खो चुकी बूढ़ी गंगा नदी को फिर से मिल सकती है संजीवनी

बूढ़ी

बूढ़ी गंगा के पुल पर नक्शे को चेक करते अधिकारी

वर्षो से संजीवनी की तलाश का इंतजार कर रही बूढ़ी गंगा को एक बार फिर से संजीवनी मिलने की उम्मीद है. मंडल कमिश्नर सुरेंद्र सिंह के निर्देश?

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    मेरठः- भारतीय सांस्कृतिक(Indian Cultural)
    राजधानी हस्तिनापुर(Hastinapur) की विरासत बूढ़ी गंगा
    (Old Ganga ) को बचाने के लिए एक बार फिर से प्रशासन सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है. जी हां पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) शहर से 48 किलोमीटर दूर हस्तिनापुर स्थित बूढ़ी गंगा के अस्तित्व को बचाने के लिए एक बार फिर से मुहिम शुरू हो गई है. जिसके लिए मेरठ मंडल कमिश्नर सुरेंद्र सिंह द्वारा एक कमेटी बनाई गई है. जिसको बूढ़ी गंगा के अस्तित्व को फिर से खोजने एवं संवारने का दायित्व सौंपा गया है. मंडल कमिश्नर के निर्देश के बाद टीम सक्रिय होकर हस्तिनापुर के उन जंगलों में एक बार फिर से खोजबीन में जुट गई है. जिन जंगलों के बीच कभी बूढ़ी गंगा निरंतर बहती रहती थी.

    पांडव और द्रौपदी बूढ़ी गंगा के जल से करते थे स्नान
    पौराणिक कथाओं की माने तो इसी बूढ़ी गंगा के निर्मल जल का पांडव उपयोग करते थे. पांडव, द्रौपदी इसी बूढ़ी गंगा के जल से स्नान कर भोले बाबा की पूजा अर्चना करते थे. लेकिन कहीं ना कहीं इस इतिहास इस संस्कृति को बचाने के लिए जिस प्रकार कार्य होना चाहिए था, वह नहीं हुआ.गौरतलब है कि प्रियंक भारती, असिस्टेंट प्रोफेसर, संस्थापक व अध्यक्ष नेचुरल साइंसेज ट्रस्ट, वर्षों से हस्तिनापुर के इतिहास को संवारने के लिए कार्य कर रहे हैं. उन्होंने ही बूढ़ी गंगा के अस्तित्व को बचाने के लिए शासन को पत्र भेजा था. उन्हीं के प्रस्ताव को देखते हुए एक बार फिर से मंडल के कमिश्नर द्वारा बूढ़ी गंगा को बचाने के लिए निर्देश जारी किए हैं.

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