Meerut: खेल उद्योग के लिए मशहूर उत्‍तर प्रदेश का यह शहर कभी था रावण की ससुराल
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Meerut: खेल उद्योग के लिए मशहूर उत्‍तर प्रदेश का यह शहर कभी था रावण की ससुराल
मेरठ को रावण की ससुराल भी कहा जाता है. यहां रावण की पत्‍नी मंदोदरी का जन्‍म हुआ था. (फाइल फोटो)

आजादी के लिए 1857 की क्रांति (1857 Revolution for Independence) में देश के लिए शहादत (Martyrdom) देने वाले स्‍वतंत्रता सेनानियों (Freedom Fighters) की याद में मेरठ (Meerut) का शहीद स्‍मारक (Martyr Memorial ) बनाया गया है.

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  • Last Updated: September 4, 2020, 1:30 PM IST
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मेरठ. पश्चिमी यूपी के मेरठ (Meerut) शहर का इतिहास काफी गहरा है. पौराणिक कहानियों (Mythological Stories) में मेरठ को रावण का ससुराल भी कहा गया है और महाभारत में पांडवों-कौरवों की राजधानी हस्तिनापुर. मेरठ दो पवित्र नदियों गंगा और यमुना के बीच बसा हुआ है. मेरठ (Meerut) को 'भारत का खेल नगर' (Sports City of India) भी कहते हैं, जिसका कारण यहां पर विशाल खेल उद्योग का होना है. 1857 की क्रांति (Revolution of 1857) का बिगुल बजाने वाला जिला, ऐतिहासिक नौचंदी मेले (Historic Nauchandi Fair) या फिर वह शहर जहां का बल्ला थामकर सचिन, धोनी और विराट जैसे क्रिकेटरों ने देश-दुनिया में अपना परचम लहराया है. इस शहर की कई खासियत है.

क्रिकेट के बल्‍ले के लिए भी मशहूर है आज का मेरठ
मेरठ की एक पहचान खेल के उपकरणों को लेकर है. उत्‍तर भारत में मेरठ में बने क्रिकेट के बल्‍लों (बैट) को बेहद उम्‍दा माना जाता है. भारतीय क्रिकेट टीम में कई ऐसे खिलाड़ी हैं, जो मेरठ में बने बल्‍लों से ही क्रिकेट खेलते हैं. इतना ही नहीं, सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग, महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली जैसे क्रिकेट खिलाडि़यों ने अपनी शतकीय पारी मेरठ में बने बल्‍लों से पूरी की है. स्‍थानीय सूत्रों के अनुसार, मेरठ में वर्तमान समय में खेल उपकरणों के निर्माण से जुड़ी करीब 2 हजार से अधिक फैक्‍टरियां हैं. यहां से हर साल, करीब 500 करोड़ रुपए से अधिक के खेल उपकरण विदेशों के निर्यात क‍िए जाते हैं.

मेरठ की नई पहचान क्रिकेट बैट से भी है. यहां बने बैट का इस्‍तेमाल सचिन, धोनी और विराट जैसे क्रिकेटर भी करते हैं. (फाइल फोटो)
मेरठ की नई पहचान क्रिकेट बैट से भी है. यहां बने बैट का इस्‍तेमाल सचिन, धोनी और विराट जैसे क्रिकेटर भी करते हैं. (फाइल फोटो)

मेरठ में हुआ था रावण की पत्‍नी मंदोदरी का जन्‍म


मेरठ (Meerut) को पहले मयराष्‍ट्र (Mayrashtra) के नाम से जाना था. दानव राज मय की पुत्री मंदोदरी (Mandodari) का जन्‍म मयराष्‍ट्र यानी आज के मेरठ में हुआ था. मेरठ में आज भी वह मंदिर मौजूद हैं, जहां मंदोदरी पूजा करने जाया करती थी. इस मंदिर का नाम बाबा श्री बिल्लेश्वर नाथ महादेव मंदिर (Baba Shri Billeshwar Nath Mahadev Temple) है. मान्‍यता है कि इसी मंदिर में मंदोदरी ने भगवान शिव की घोर तपस्‍या की थी. मंदोदरी की तपस्‍या से खुश होकर भगवान शिव ने न केवल उसे दर्शन दिए, बल्कि वरदान मांगने को कहा. मंदोदरी ने भगवान शिव को सर्वशक्तिशाली और विद्वान ब्राह्मण के साथ विवाह का वरदान मांगा. जिसके बाद, मंदोदरी का विवार रावण (Rawan) के साथ हुआ था. मान्‍यता यह भी है कि मंदोदरी और रावण की शादी जोधपुर (Jodhpur) के मंडोर (Mandor) में हुआ था.

मेरठ में प्राचानी मूर्तियों की भी बड़ी श्रृंखला देखने को मिली है. (फाइल फोटो) A large range of oriental sculptures have also been seen in Meerut. (File photo)

मेरठ में प्राचानी मूर्तियों की भी बड़ी श्रृंखला देखने को मिलती है. (फाइल फोटो)

बाबा औघड़ नाथ मंदिर (Baba Augharnath Temple)
मेरठ कैंट (Meerut Cant) में स्थित यह मंदिर भगवान शिव (Temple Lord Shiva) को समर्पित है. यह कहा जाता है कि भारत की आजादी की पहली लड़ाई सन् 1857 में यहीं पर लड़ी गई थी, जिसके बाद यह चिंगारी आग में तब्दील हो गई. काली पलटन ‘ब्रिटिश आर्मी’ के सैनिक, मंदिर परिसर के कुएं में पानी पीने आते थे. मंदिर के मुख्य पंडित द्वारा प्रतिबंधित कारतूस (जिसमे गाय का मांस मिला होने का आरोप था) के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया, जिसने सैनिकों की हिंसक प्रतिक्रिया को उकसाया और इसी के परिणाम स्वरूप 10 मई, 1857 में ब्रिटिश शासन (British Rule) के खिलाफ सबसे पहली इतनी बड़ी जंग (War) छिड़ी थी.

1857 के स्‍वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की याद में यह स्‍मारक बनाया गया था. (फाइल फोटो)
1857 के स्‍वतंत्रता संग्राम में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की याद में यह स्‍मारक बनाया गया था. (फाइल फोटो)


शहीद स्‍मारक (martyr Memorial)
शहीद स्मारक (martyr Memorial) मेरठ जो भारत के उन शहीदों को समर्पित है, जो भारत की आजादी की 1857 की प्रथम लड़ाई का हिस्सा बने थे. यह स्मारक दिल्ली रोड पर लगभग सिटी रेलवे स्टेशन (City Railway Station) से नॉर्थ-ईस्ट से 6 किमी पर स्थित है.2007 में उत्‍तर प्रदेश सरकार द्वारा शहीद स्‍मारक में एक पुस्‍तकालय भी शुरूआत की गई है. इस पुस्‍तकालय में कला, इतिहास संस्कृति और स्‍वतंत्रता संग्राम से जुड़ी पुस्‍तकों को संजोया गया है.

पांडव किला (Pandava Fort)
यह किला मेरठ (Meerut) के बरनावा (Barnava) में स्थित है. महाभारत (Mahabharata) से संबंध रखने वाले इस किले में अनेक प्राचीन मूर्तियां (Ancient Sculptures) देखी जा सकती हैं. कहा जाता है कि यह किला पांडवों (Pandav) ने बनवाया था. दुर्योधन (Duryodhana) ने पांडवों को उनकी मां सहित यहां जीवित जलाने का षडयंत्र रचा था, किन्तु वे एक भूमिगत मार्ग से बच निकले थे.आजकल ये स्थान बागपत (Baghpat) में मिलता है.

मेरठ के मुख्‍य आकर्षण
मेरठ (Meerut) के मुख्‍य आकर्षण और पर्यटन केंद्रो में द्रोपदी की रसोई (kitchen of Draupadi), जैन श्वेतांबर मंदिर (Jain Shwetambar Temple), शाहपीर मकबरा (Shahpir Tomb), हस्तिनापुर मंदिर (Hastinapur Temple), हस्तिनापुर तीर्थ (Hastinapur Tirtha), रोमन कैथोलिक चर्च ( Roman Catholic Church), सेंट जॉन चर्च (St. John's Church),  सूरज कुंड (Suraj Kund), नंगली तीर्थ (Nangali Tirtha), जामा मस्जिद (Jama Masjid), हस्तिनापुर अभयारण्य (Hastinapur Sanctuary), मनसा देवी मंदिर (Mansa Devi Temple), गांधी बाग (Gandhi Bagh) और अष्‍टपद (Ashtapad) भी शामिल हैं.

राजनैतिक परिदृश्‍य (Political Scenario)
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की गंगा व यमुना नदियों के बीच बसी मेरठ लोकसभा सीट (Meerut Parliamentary Seat ) 2014 के आम चुनाव में भाजपा (BJP) के राजेंद्र अग्रवाल (Rajendra Agrawal) इस सीट से जीते थे. इससे पहले, 2004-09 तक यह सीट बीएसपी (BSP) के हाथ में रही थी और 2009 के बाद से वर्तमान समय तक यहां बीजेपी का वर्चस्व है.
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