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Meerut: अंग्रेजों का कोई चपरासी भी आता था तो बड़े-बुजुर्ग गांव खाली कर देते थे- स्वतंत्रता सेनानी खन्ना

Meerut: अंग्रेजों का कोई चपरासी भी आता था तो बड़े-बुजुर्ग गांव खाली कर देते थे- स्वतंत्रता सेनानी खन्ना

Freedom Fighter krishan kumar khanna:मेरठ में रहने वाले स्वतंत्रता सेनानी कृष्ण कुमार खन्ना ने महात्मा गांधी से प्रेरित होकर 1942 में अंग्रेजी हुकूमत का झंडा उतारकर फेंक दिया था. इस वजह से उन्‍हें सात साल की जेल हुई थी. खन्ना मूल रूप से लाहौर पाकिस्तान के रहने वाले हैं.

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रिपोर्ट- विशाल भटनागर

मेरठ. देशभर में आजादी के अमृत महोत्सव (Azadi Ka Amrit Mahotsav) को धूमधाम से मनाया जा रहा है.इस महोत्सव मुख्य उद्देश्य युवाओं को और देशवासियों को आजादी के असली महत्व के बारे में समझाने के साथ उसकी पहचान कराना है. साथ ही साथ उन सभी क्रांतिकारियों, स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में युवा पीढ़ी को समझाना है, जिन्होंने देश को आजाद कराने में अपना बलिदान और प्रमुख योगदान दिया था.

इसी कड़ी में स्वतंत्रता सेनानी कृष्ण कुमार खन्ना ( Freedom Fighter krishan kumar khanna) से News18local की टीम ने खास बातचीत की. वैसे तो स्वतंत्रा सेनानी रहे कृष्ण कुमार खन्ना की उम्र 98 वर्ष हो गई है, लेकिन इस आयु में भी उनकी आवाज में पहले जैसी ही धमक सुनाई देती है.पेश हैं स्वतंत्रता सेनानी खन्ना से खास बातचीत के कुछ अंश…

  • कब उतारा था अंग्रेजों का झंडा?
    वर्ष 1942 में ही लाहौर के शेखुपुरा (Sheikhupura Pakistani) में अंग्रेज हुकूमत की भरी अदालत में जाकर उनके झंडे को उतार कर फेंक दिया था. अपना राष्ट्रीय ध्वज वहां पर लगा दिया था और नारेबाजी शुरू कर दी थी. हालांकि लोग डर गए थे और मुझे ही बोलने लगे कि अरे क्यों उतारा आपने ये झंडा, ये गलत है. मैं डटा रहा और कहा कि ये गलत नहीं बल्कि सही है.
  • झंडा फेंकने के बाद क्या हुआ?
    जब झंडा उतराकर फेंक दिया और अपना राष्ट्रीय ध्वज लगाया तो अंग्रेजी हुकूमत के सैनिकों ने पकड़ लिया. इसके बाद जज ने झंडा उखाड़कर फेंकने और राष्ट्र ध्वज लगाने के लिए 7 साल की सजा सुनाई. पुलिस ने जेल भेज दिया.
  • आप कभी महात्मा गांधी से मिले?
    राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से तो नहीं मिला, लेकिन वर्ष 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के समय राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रेरक वाणी जरूर सुनी थी. गांधी जी की वाणी इतनी प्रेरक थी कि हर कोई उनसे जुड़ता जा रहा था. गांधी जी से जुड़ने के बाद अंग्रेजों की गोलियां और उनकी धमकियां भी ना के बराबर ही लगने लगी.
  • कैसा था गुलामी का दौर?
    अगर अंग्रेज का कोई चपरासी या कोई सिपाही किसी भी गांव की तरफ निकल जाता था, तो उस गांव के बड़े बुजुर्ग गांव को खाली कर देते थे. छोटे-छोटे बच्चे रह जाते थे क्योंकि अंग्रेजी सैनिक काफी जुल्म करते थे, इसीलिए सभी लोग उनसे डरते थे. हालांकि 1942 के बाद एक ऐसी क्रांति उत्पन्न हुई कि धीरे-धीरे जनता ने अंग्रेजों का विरोध करना शुरू कर दिया.
  • Tags: Azadi Ka Amrit Mahotsav, Mahatma Gandhi news, Meerut news

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