यहां लंगूर को मिलती है चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के बराबर की सैलरी, शिफ्ट में ड्यूटी

Umesh Srivastava | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 24, 2019, 10:30 PM IST
यहां लंगूर को मिलती है चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के बराबर की सैलरी, शिफ्ट में ड्यूटी
मेरठ के चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी में लंगूर को तैनात किया गया है.

मेरठ (Meerut) के चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी (Chaudhary Charan Singh University) में बंदरों का आतंक है. यहां बंदरों की संख्या हजा़रों में पहुंच चुकी है. बंदरों को भगाने के लिए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में यहां लंगूर को तैनात किया गया है.

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क्या कोई लंगूर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के बराबर सैलरी पा सकता है? आपको इस बात पर विश्‍वास नहीं होगा लेकिन, मेरठ (Meerut) के चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी (Chaudhary Charan Singh University) में एक लंगूर को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के बराबर सैलरी मिल रही है. दरअसल, मेरठ के चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी में बंदरों का आतंक है. यहां बंदरों की संख्या हजा़रों में पहुंच चुकी है. बंदरों को भगाने के लिए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में यहां लंगूर को तैनात किया गया है. इस लंगूर की बाकायदा शिफ्ट लगती है और कभी-कभी तो इसे ओवरटाइमम भी करना पड़ता है.

मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में आजकल लंगूर और बंदरों के बीच ठनी हुई है. सैकड़ों बंदरों को दूर भगाने का जिम्मा एक लंगूर के भरोसे है. यहां एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में इस लंगूर को सिर्फ इसलिए तैनात किया गया है ताकि वह विश्वविद्यालय में बंदरों के आतंक को खत्म कर सके. लंगूर को तकरीबन 10 हज़ार रुपये से ज्यादा दिए जा रहे हैं ताकि वो बंदरों को दूर भगा सके. आजकल की इस बेरोज़गारी में इस अनोखी नौकरी को पाकर लंगूर के साथ-साथ उसका मालिक भी बेहद ख़ुश नज़र आ रहे हैं.

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मेरठ का चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय


इस लंगूर का काम है कि विश्वविद्यालय में आए दिन बंदरों से परेशानी को निजात दिलाए. लंगूर के मालिक को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का वेतन भत्ता दिया जाता है. लंगूर का नाम चंदा है, लंगूर को 24 घंटे कभी भी ड्यूटी पर बुलाया जा सकता है ताकि वह बंदरों के आतंक से निजात दिला सके. जब से विश्वविद्यालय में इस लंगूर की नियुक्ति हुई है, तब से यूनिवर्सिटी में बंदरों का आतंक खत्म हो गया है.

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यूनिवर्सिटी में ये लंगूर अपने मालिक के साथ घूम-घूम कर बंदरों से निपट रहा है.


लंगूर को पालने वाले युवक का कहना है कि इस विद्यालय में बंदरों का आतंक इस तरह है कि बच्चों की किताबें लेख उठाकर ले जाते थे. लैब और क्लास में घुसकर आतंक मचाते थे. बंदरों के आतंक से पूरा विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र काफी परेशान थे. विश्वविद्यालय पढ़ने वाले छात्रों का कहना है कि जब भी क्लास खोली जाती थी या पार्क में बैठकर पढ़ते थे तो बंदर किताब उठाकर ले जाते थे और काफी परेशान कर देते हैं. इससे उनकी पढ़ाई में काफी परेशानी हो रही थी. लाइब्रेरी में और लैब में काम करने वाले छात्रों के शोध में भी काफी परेशानी होती थी लेकिन अब जब से यह चंदा नाम की लंगूर को तैनात किया गया है तब से बंदरों का आतंक खत्म हो गया है. आज विश्वविद्यालय में हर कोई बंदर के आतंक से राहत महसूस कर रहा है.

बंदरों के आतंक से विश्वविद्यालय प्रशासन भी काफी परेशान था. शिक्षण के साथ-साथ यहां रहने वाले क्वार्टर पर भी बंदरों के आतंक से काफी लोग परेशान थे. भले ही उसको एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के बराबर वेतनमान देना पड़ रहा है लेकिन आज बंदर के आतंक से विश्वविद्यालय कैंपस पूरी तरह मुक्त हो चुका है. इस यूनिवर्सिटी कैम्पस में आजकल ये लंगूर सबकी आंखों का तारा बन गया है.
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First published: August 24, 2019, 6:06 PM IST
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