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बागपत: चौधरी चरण सिंह की धरती पर फिर खिलेगा कमल या पोता मारेगा बाजी?

News18Hindi
Updated: April 5, 2019, 4:55 PM IST
बागपत: चौधरी चरण सिंह की धरती पर फिर खिलेगा कमल या पोता मारेगा बाजी?
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बागपत सीट पर जीत सुनिश्चित करने के लिए गठबंधन और बीजेपी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है.

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महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों की खासियत एक जैसी है. इन दोनों क्षेत्रों में समानता यह है कि दोनों ही जगहों पर गन्ने की खेती होती है. इन्हें सुगर बेल्ट कहा जाता है और गन्ने की कीमतों को लेकर दोनों जगहें चर्चा में रहती हैं.

पश्चिमी यूपी में ही पड़ता है पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चौधरी चरण सिंह का लोकसभा क्षेत्र बागपत. बागपत लोकसभा क्षेत्र में मुजफ्फरनगर जिले की कुछ विधानसभाएं भी शामिल हैं. इस वक्त पूरे इलाके में हरियाली है खेतों में खड़े गन्ने और गेहूं की फसल देखी जा सकती है. अप्रैल में अभी इस इलाके में कटाई चल रही है. झारखंड के मजूदर गन्ना काटने में लगे हुए हैं. इनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है. ये तो केवल रात के खाने को लेकर चिंतित हैं.

इस लोकसभा क्षेत्र में जाट-मुस्लिम-दलितों की बड़ी संख्या है. इस क्षेत्र में एसपी-बीएसपी और आरएलडी गठबंधन ने इन तीन समुदायों को एक साथ लेने की कोशिश की है. इन तीनों दलों के पीछे खड़े तीन नेताओं के पास अपने निश्चित वोटबैंक हैं. जबकि भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट मांग रहे हैं. यहां से बीजेपी के उम्मीदवार मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह हैं. वो क्षेत्र की जनता से मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने के लिए सौ प्रतिशत वोटिंग की अपील कर रहे हैं.

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दूसरी ओर, अजित सिंह सिंह जनता से अपील कर रहे हैं कि ये उनका आखिरी चुनाव है. एसपी-बीएसपी और लोकदल गठबंधन की ओर से अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी इस बार चुनाव मैदान में हैं.

सत्यपाल रैलियों के दौरान दो गांवों ( नानू और आकड़ी ) में गए. वहां उन्होंने गांव में एक रैली को संबोधित किया. रैली के बाद गांव के सरपंच ने सत्यपाल सिंह को खाने पर आमंत्रित किया. कहने के साथ ही सरपंच ने घर में आवाज लगाई और खाना हाजिर हो गया. ऐसा लग रहा था कि वह सरपंच इलाके का बेहद प्रभावशाली आदमी है.

इस सीट पर दोनों ही उम्मीदवारों ने अपनी ताकत झोंकी हुई है. अब आगामी 23 मई को ही इस बात का फैसला होगा कि कौन सा उम्मीदवार बाजी मारेगा. देखना होगा कि बीजेपी के खिलाफ बना तीन पार्टियों का गठबंधन कितना कामयाब होता है.(बागपत से प्रशांत लीला रामदास)

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First published: April 5, 2019, 4:31 PM IST
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