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दीवाली पर घऱ बैठे ऐसे कीजिए खोआ, दाल, हल्दी सहित तमाम खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच

Umesh Srivastava | News18 Uttar Pradesh
Updated: October 19, 2019, 3:42 PM IST
दीवाली पर घऱ बैठे ऐसे कीजिए खोआ, दाल, हल्दी सहित तमाम खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच
त्यौहार के मौसम में खाद्य पदार्थों में मिलावट के कई मामले सामने आ रहे हैं, इससे बचने के लिए आप घर पर ही पदार्थों की जांच कर सकते हैं.

बता दें मेरठ (Meerut) में ही खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन की ओर से पिछले चार साल में 1 करोड़ 55 लाख रुपए बतौर ज़ुर्माना वसूला गया. यह साल अभी बीता भी नहीं और विभाग ने अब तक इस वर्ष 35 लाख 70,000 रुपये बतौर जुर्माना वसूला है.

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मेरठ. क्या ज़हर खा रहे हैं हम. जी हां, त्यौहारों के इस मौसम में जहां हमारे आपके घर में खु़शियां ही ख़ुशियां हैं तो वहीं मिलावटखोर इन ख़ुशियों में ग्रहण लगाने पर आमादा हैं. इसकी गवाही खाद्य विभाग की छापेमारी के दौरान लिए जाने वाले सैम्पल का फेल होना है. अकेले मेरठ में खाद्य विभाग ने पिछले 4 वर्षों में छापेमारी के दौरान जिन खाद्य पदार्थों के सैम्पल लिए हैं, उनमें से 50 फीसदी टेस्ट के बाद फेल हो गए हैं.

लिहाज़ा आप त्योहारों के इस मौसम में खाद्य पदार्थ खरीदने के पहले सावधान हो जाइए. आज हम आपको बताएंगे कि आप ख़ुद कैसे खाद्य पदार्थों की जांच कर सकते हैं. हालांकि बीते दिनों मेरठ में खाद्य विभाग की तरफ से फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स के ज़रिए भी लोगों में जागरूकता लाने की कोशिश की गई लेकिन आज हम आपको वो तरीका भी बताएंगे जिसके ज़रिए आप घर बैठे खाद्य पदार्थों की जांच कर सकते हैं. मिलावट पाए जाने पर अपने ज़िलों के खाद्य अधिकारियों को शिकायत कर ऐसे मिलावटखोरों को जेल की हवा भी खिला सकते हैं.

खुद कैसे करें मिलावट की जांच
1. मावा: त्यौहारों के इस मौसम में पर घर-घर मावा यानि खोआ की डिमांड रहती है इसलिए सबसे ज्यादा खोया में मिलावट की जाती है. इसमें मिलावट परखने का सबसे आसान घरेलू उपाय है. आयोडिन टिंचर नाम के केमिकल की की कुछ बूंद खोया पर डालें. अगर खोआ काला या बैंगनी हो जाए तो उसमें स्टार्च की मिलावट है.

2. हल्दी: इसमें पीले रंग की मिलावट होती है, इससे कैंसर हो सकता है. हल्दी का नमूना परखनली में लेकर स्प्रिट की पांच-छह बूंद मिलाएं. रंग पीला हो जाए तो समझो मिलावट है.

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आप घर बैठे खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच कर सकते हैं.


3. लाल मिर्च: इसमें मिलावटखोर ईंट का पाउडर या चूरा मिलाते हैं. इससे पेट की समस्या होती है. लाल मिर्च को पानी में मिलाकर हिलाएं अगर इसमें ईंट पाउडर की मिलावट होगी तो नीचे बैठ जाएगा.
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4. धनिया: इसमें मिट्टी और बुरादा मिलाया जाता है. एक परखनली में पानी के ऊपर चुटकी भर धनियां डालेंगे तो बुरादा पानी के ऊपर तैरने लगेगा. इसका मतलब इसमें मिलावट की गई है.

5. काली मिर्च: इसमें पपीते के बीज मिलाए जाते हैं. इससे लीवर की दिक्कत होती है. टेस्ट ट्यूब में पानी लेकर साबुत काली मिर्च का नमूना डालने पर काली मिर्च नीचे बैठ जाएगी जबकि पपीते के बीच तैरने लगेंगे.

6. चीनी: चीनी में चॉक पाउडर की मिलावट होती है. इससे लीवर में दिक्कत आती है. चीनी को पानी में घोलने पर चॉक पाउडर नीचे बैठ जाता है, इससे मिलावट का पता लग जाता है.

7. चाय: प्रयोग में लाई जा चुकी चाय पर रंग का प्रयोग होता है. भीगे सोख्ते पर चाय की पत्ती छिड़कने पर कागज रंगीन हो जाए तो समझना मिलावट की गई है.

8. अरहर दाल: इसमें खेसारी दाल की मिलावट होती है. जिससे पेट दर्द लीवर, कैंसर, अल्सर की बीमारी होती है. नमूने को पानी में आधे घंटे तक हिलाएं. अगर खेसारी दाल है तो पानी का रंग हरा हो जाएगा.

9. दूध: त्योहारों के इस मौसम में सबसे ज्यादा खपत होने के कारण दूध में जमकर मिलावट होती है. दूध में वनस्पति, यूरिया, डिटर्जेंट और फार्मलीन की मिलावट की जाती है. इससे पेट दर्द, अल्सर और लीवर की बीमारी होती है. एक टेस्ट ट्यूब में दूध लेकर समान मात्रा में हाइड्रो क्लोरिक एसिड मिलाते हुए गर्म करें. लाल रंग आता है तो वनस्पति की मिलावट है. परखनली में दूध लेकर यूरियेज एन्जाइम डालकर अच्छी तरह हिलाएं और पांच बूंद पोटेशियम कार्बोनेट मिलाकर फिल्टर पट्टी पर कार्क से ढक दें. फिल्टर पेपर का रंग यदि पहले लाल फिर हरा हो जाए तो यूरिया की मिलावट है.

खाद्य विभाग ने दी लाइव टेस्टिंग की जानकारी

दरअसल बीते दिनों में खाद्य विभाग की तरफ से फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स भी निकाली गई. इसके ज़रिए लोगों को मिलावट के बारे में लाइव टेस्टिंग कर जानकारी भी दी गई थी.

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खाद्य विभाग की अधिकारी अर्चना धीरान


किसी भी खाद्य पदार्थ में मिलावट करने पर खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 में सजा का प्रावधान किया गया है. मिलावट अगर मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है तो 3 साल से लेकर आजीवन कारावास और 5 लाख रुपये तक जुर्माने की सजा है. अगर किसी खाद्य पदार्थ में ऐसी मिलावट है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है. जैसे दूध में पानी तो उसमें भी लाखों रुपए का जुर्माना हो सकता है. मिलावटखोरों के इस जाल को लेकर हमने खाद्य विभाग की अभिहीत अधिकारी अर्चना धीरान से ख़ास बातचीत की.

इस बार 35 लाख 70000 रुपये बतौर जुर्माना वसूला

उन्होंने बताया कि त्यौहार के इस सीज़न में दूध पनीर, मिठाई और बेकरी के उत्पादों की खपत बढ़ जाती है. मांग का फायदा ये मिलावटखोर खूब उठाते हैं और मिलावट के नाम पर मुनाफाखोरी शुरू हो जाती है. मेऱठ में मिलावट का जाल कितना बड़ा है इसका अंदाज़ा सकते हैं कि खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन की ओर से पिछले चार साल में 1 करोड़ 55 लाख रुपए बतौर ज़ुर्माना वसूला गया. यह साल अभी बीता भी नहीं और विभाग ने अब तक इस वर्ष 35 लाख 70000 रुपये बतौर जुर्माना वसूला है.

चार साल में करीब आधे सैंपल फेल पाए गए

पिछले चार साल में विभाग ने कुल 1997 सैम्पल लिए. इनमें 883 सैम्पल फेल हो गए. खाद्य विभाग की ये कार्रवाई भी बताती है कि मेरठ में मिलावटखोरी का कितना बड़ा जाल है. ऐसे में आपका जागरुक रहना आपका सावधान रहना आपका सतर्क रहना अति आवश्यक है. इन मिलावटखोरों की कमर आपकी सतर्कता से ही टूटेगी.

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First published: October 19, 2019, 3:39 PM IST
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