बागपत: मुख्य पुजारी ने अपने ही शिष्य को पीट-पीटकर मार डाला

एसपी बागपत जयप्रकाश ने बताया कि पुलिस ने मामले में संदीप नाम के शख्स को हिरासत में लिया. पूछताछ में संदीप ने बताया कि वह मन्दिर के बड़े पुजारी ब्रह्मनाथ के पास आता-जाता था और कई बार ब्रह्मनाथ से वह सट्टे का नम्बर पूछ चुका था.

SHAHJAD RAJPUT | News18 Uttar Pradesh
Updated: May 17, 2018, 5:46 PM IST
बागपत: मुख्य पुजारी ने अपने ही शिष्य को पीट-पीटकर मार डाला
गिरफ्तर पुजारी
SHAHJAD RAJPUT | News18 Uttar Pradesh
Updated: May 17, 2018, 5:46 PM IST
बागपत में सट्टे का नंबर पूछने को लेकर उठे विवाद के बाद एक पुजारी ने अपने ही शिष्य की हत्या कर दी. मामले में पुलिस ने पुजारी और उसके साथी को गिरफ्तार कर​ लिया है. पता चला कि कातिल पुजारी ने शव को मंदिर से उठवाकर खेत में डलवा दिया था. पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया है. वहीं हत्या में इस्तेमाल किया गया लोहे का सरिया भी बरामद कर लिया है.

दरअसल बड़ौत कोतवाली क्षेत्र के बावली गांव के जंगल में बुधवार को अधेड़ शख्स का शव पड़ा मिला था. धरधार हथियार से काटकर हत्या करने के बाद हत्यारों ने जंगल मे शव फेंका था. आज बड़ौत पुलिस ने हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है. अधेड़ की शिनाख़्त एक मंदिर के छोटे पुजारी के रूप में की गई. उसकी हत्या के पीछे असल वजह सट्टे का नम्बर पता करने की थी. फिलहाल पुलिस ने हत्यारे पुजारी ओर उसके एक साथी को गिरफ़्तार कर लिया है.

शव की शिनाख्त पास के ही एक मंदिर में रहने वाले छोटे पुजारी देवेन्द्र के रूप में हुई थी. वह मन्दिर में अपने गुरु ब्रह्मनाथ के साथ वर्षों से योग साधना कर रह रहा था. पुजारी देवेन्द्र की हत्या नुकीले सरिए से गोंदकर की गई थी और उसकी बेरहमी से पिटाई भी की गई थी. पुलिस हत्या की तफ्तीश में जुटी थी. पुलिस को घटनास्थल पर बने बाइक के निशान से सुराग लगा. बाइक के टायरों के निशान मन्दिर तक जा रहे थे. इसके बाद घटना का खुलासा हुआ.

एसपी बागपत जयप्रकाश ने बताया कि पुलिस ने मामले में संदीप नाम के शख्स को हिरासत में लिया. पूछताछ में संदीप ने बताया कि वह मन्दिर के बड़े पुजारी ब्रह्मनाथ के पास आता जाता था और कई बार ब्रह्मनाथ से वह सट्टे का नम्बर पूछ चुका था. उस दिन भी संदीप ने सट्टे का नम्बर पूछा तो मृतक देवेन्द्र ने सट्टे का नम्बर बताने से मना कर दिया. यही नहीं उसने अपने गुरु ब्रह्मनाथ को भी अपशब्द कहे. ब्रह्मनाथ और संदीप नशे में धुत थे, उन्हें ये बर्दाश्त नही हुआ. पहले संदीप ने देवेन्द्र को बेरहमी से तख्त पर पटक—पटक कर पीटा और साधु ब्रह्मनाथ ने नुकीला सरिया उठाकर देवेन्द्र पर ताबड़तोड़ वार कर मौत के घाट उतार दिया. फिर शव को बाइक पर डाल गांव के जंगल मे फेंक दिया.
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