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CM योगी ने बदली मेरठ के 63 बंगाली हिंदू परिवार की किस्मत, घर और जमीन के साथ मिली बड़ी सौगात

38 साल बाद पूर्वी पाकिस्तान से आए 63 बंगाली परिवारों का साकार

38 साल बाद पूर्वी पाकिस्तान से आए 63 बंगाली परिवारों का साकार

Meerut News: मेरठ के सीडीओ शशांक चौधरी ने बताया कि तिरसठ विस्थापित परिवार हस्तिनापुर नगर पंचायत में रह रहे थे. अब जबकि उन्हें नई पहचान मिली है तो विस्थापित परिवारों के साथ समूचा हस्तिनापुर ख़ुश हैं. उन्होंने बताया कि फैक्ट्रीज़ बंद होने के बाद 38 साल से विस्थापित परिवार संघर्ष कर रहे थे. ये परिवार दैनिक मज़दूरी इत्यादि करके जैसे तैसे गुज़ारा कर रहे थे. सीडीओ शशांक चौधरी ने कहा कि लीगली नई ज़मीन मिलने से विस्थापित परिवारों की पीढ़ियों को अब फायदा मिलेगा.

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मेरठ. पूर्वी पाकिस्तान से वर्ष 1970 में भारत आकर हस्तिनापुर स्थित शकुंतला कालोनी में छप्परनुमा अस्थायी घरों में रह रहे 63 हिंदू बंगाली परिवारों की किस्मत अब 52 साल बाद जागी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन परिवारों को लोक भवन में आयोजित समारोह में कृषि भूमि के पट्टे और आवास का आवंटन पत्र सौंप दिया. जिला प्रशासन की टीम चार बसों से इन परिवारों के 162 सदस्यों को लेकर सोमवार को लखनऊ पहुंची थी. आज जब इन परिवारों को 52 साल बाद ज़मीन मिली तो मानों उनके पांवों को ज़मीन के साथ आकाश भी मिल गया हो.

मेरठ के सीडीओ शशांक चौधरी ने बताया कि तिरसठ विस्थापित परिवार हस्तिनापुर नगर पंचायत में रह रहे थे. अब जबकि उन्हें नई पहचान मिली है तो विस्थापित परिवारों के साथ समूचा हस्तिनापुर ख़ुश हैं. उन्होंने बताया कि फैक्ट्रीज़ बंद होने के बाद 38 साल से विस्थापित परिवार संघर्ष कर रहे थे. ये परिवार दैनिक मज़दूरी इत्यादि करके जैसे तैसे गुज़ारा कर रहे थे. सीडीओ शशांक चौधरी ने कहा कि लीगली नई ज़मीन मिलने से विस्थापित परिवारों की पीढ़ियों को अब फायदा मिलेगा.

अभी तक छप्परों में बीत रही थी जिंदगी
जिन हालात में 63 परिवार रह रहे थे उनकी तस्वीर देखकर किसी को भी हैरत होगी. कोई छप्पर बनाकर बीते कई दशकों से यहां रह रहा था तो कोई टीन शेड़ में ही जीवन काट रहा था. आज जब इन परिवारों को अपनी ज़मीन मिली तो उन्हें मानों अपना वजूद मिल गया हो.  विस्थापित परिवारों में शामिल लोगों का कहना है कि लंबी लड़ाई के बाद सरकार ने उनकी मांगों को सुना है. 1984 में हस्तिनापुर का मदन सूत मिल बंद हो गया था. तब से सभी 63 परिवार जिंदगी की जंग लड़ रहे थे. अब जाकर सरकार ने मांगों को सुना है.

कानपुर देहात में मिला कृषि भूमि का पट्टा और आवास
बता दें कि हिंदू बंगाली परिवार प्रदेश के कई अन्य जनपदों में भी निवास करते हैं. हस्तिनापुर में ऐसे 63 परिवार रहते हैं. ये परिवार लंबे समय से रोजगार के लिए कृषि भूमि और आवास की मांग सरकार से कर रहे थे. अभी तक ये बंगाली बाजार की शकुंतला कालोनी में सरकारी भूमि पर अस्थायी मकानों में रह रहे हैं. 52 साल बाद इनकी मांग और मुराद पूरी हुई है. सरकार ने इन 63 परिवारों को कानपुर देहात जनपद के रसूलाबाद में कृषि भूमि का पट्टा और आवास आवंटित करने का निर्णय लिया है. गौरतलब है कि 12 नवंबर 2021 में कैबिनेट बाई सर्कुलेशन में घोषणा की गई थी कि हस्तिनापुर के 63 हिंदू बंगाली परिवारों को पुनर्वास योजना का लाभ दिया जाएगा.

Tags: Meerut city news, UP latest news

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