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कोयला संकट: पश्चिम UP के मेरठ सहित 14 जिलों की बिजली आपूर्ति पर कोई असर नहीं: PVVNL

UP: यूपी में पश्चिमांचल विद्युत वितरण लिमिटेड कंपनी ने दावा किया है कि उसके 14 जिलों में बिजली सप्लाई सुचारु है. (File Photo)

UP: यूपी में पश्चिमांचल विद्युत वितरण लिमिटेड कंपनी ने दावा किया है कि उसके 14 जिलों में बिजली सप्लाई सुचारु है. (File Photo)

Meerut News: बिजली के घटे लोड और बिजली खरीद पर समय से भुगतान के कारण संकट टल गया है. लेकिन अगर कोयला संकट जल्द दूर नहीं हुआ तो फिर बिजली की कमी से पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड भी जूझेगा.

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मेरठ. कोयला संकट (Coal Crisis) के बीच उत्तर प्रदेश में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) के अधिकारी बड़ा दावा कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि पश्चिमांचल के सभी 14 जिलों में कोयला संकट की वजह से विद्युत आपूर्ति (Power Supply) पर कोई असर नहीं पड़ा है. चीफ इंजीनियर दावा कर रहे हैं कि ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे तहसील में साढ़े 21 घंटे और जिला मुख्यालय पर 24 घंटे की आपूर्ति सुनिश्चित कराई जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि कोयला संकट इससे पहले भी आता रहा है. लेकिन लोगों को इसकी ज्यादा जानकारी नहीं होती थी.

अधिकरियों का मानना है कि मौसम में आए बदलाव के कारण बिजली की मांग घटी है. अगले 15 से 20 दिनों में पश्चिमांचल में बिजली लोड में और कमी आएगी. पश्चिमांचल में बिजली के घटे लोड और यहां बिजली खरीद पर ससमय भुगतान किए जाने के कारण संकट टल गया है. लेकिन अगर कोयला संकट जल्द दूर नहीं हुआ तो फिर बिजली की कमी से पश्चिमांचल भी जूझेगा. हालांकि दो दिन पहले पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में बिजली की मांग और उपलब्धता में आई करीब 10 फीसदी की कमी के चलते ग्रामीण क्षेत्र में बिजली कटौती शुरू हो गई थी. इसका सबसे ज्यादा असर सहारनपुर और मुरादाबाद जोन में देखा गया था. नलकूपों की बिजली आपूर्ति को भी झटका लग रहा था.

बता दें पीवीवीएनएल के करीब 70 लाख बिजली उपभोक्ताओं की बिजली की मांग 6500 से 7000 मेगावाट तक है. बिजली संकट के चलते कंपनी के 7 जनपदों सहारनपुर, मुरादाबाद, संभल, रामपुर, अमरोहा और बिजनौर में दो से तीन घंटे की रोस्टिंग शुरू हो गई थी. इन जिलों के गांवों को 18 घंटे की बजाय 15 से 16 घंटे ही बिजली दी जा रही थी. इसके अलावा नलकूपों को 10 घंटे तक ही बिजली दी जा रही है. हालांकि अभी अधिकरी सामान्य स्थिति का दावा कर रहे हैं.  पश्चिमांचल पर बिजली संकट का अभी ज्यादा असर नहीं है. हालांकि मांग और उपलब्धता में पहले के मुकाबले थोड़ी कमी आने से ग्रामीण क्षेत्र की बिजली आपूर्ति का शेड्यूल थोड़ा प्रभावित हुआ था.

वहीं अधिकारी आजकल बिजली चोरी पर लगाम लगाने में जुटे हुए हैं. मेरठ के चीफ इंजीनियर संजय आनन्द जैन का कहना है कि बिजली चोरी रोकने के लिए एबीसी केबल लगाने पर ज़ोर दिया जा रहा है. साथ ही उपभोक्ता को बिजली का बिल जमा करने के लिए 100 से 200 मीटर दूर न जाना पड़े इसके लिए कवायद युद्धस्तर पर की जा रही है. राशन की दुकानों पर भी अब बिजली का बिल जमा करने की व्यवस्था कर दी गई है.

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