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कोरोना का असर: इस साल भी नहीं लगेगा यूपी का ऐतिहासिक नौचंदी मेला, प्रशासन का फैसला

 कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रशासन का फैसला,

कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रशासन का फैसला,

डीएम के बालाजी ने कहा कि  कोरोना (COVID-19) के मामले मेरठ में भी लगातार बढ़ते जा रहे थे. ऐसे में मेला लगाया जाता तो केस और बढ़ सकते थे. 

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मेरठ. उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक नौचंदी मेला (Nauchandi Mela)  इस साल भी नहीं लगेगा. मेरठ (Meerut) के जिलाधिकारी के बालाजी ने कोविड के बढ़ते मामलों को देखते हुए नौचंदी मेला नहीं आयोजित किए जाने का फैसला किया है. बचत भवन सभागार में बैठक के बाद जिलाधिकारी के बालाजी ने अहम निर्णय लिया है. बैठक में नगर आयुक्त, मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी मेरठ, अपर जिला मजिस्ट्रेट नगर और पुलिस अधीक्षक नगर मेरठ ने भी भाग लिया था. डीएम के बालाजी ने  बताया कि मेरठ में लगातार बढ़ते हुए कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत जनहित में नौचंदी मेला नहीं लगाए जाने का निर्णय लिया गया है.

डीएम के बालाजी ने न्यूज़ 18 से बातचीत में बताया कि कोरोना के मामले मेरठ में भी लगातार बढ़ते जा रहे थे. ऐसे में अगर मेला लगाया जाता तो कोरोना के केसेज की संख्या बढ़ सकती थी. लिहाजा लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए ये निर्णय लेना पड़ा. डीएम ने बताया कि अगर मेला लगता तो लोगों की भीड़ जुटती और कोरोना काल में भीड़ का जुटना उचित नहीं है.





विदेशों में भी फेमस है ये मेला

मेरठ का नौचंदी मेला देश विदेश में अपनी पहचान लखता है. पिछले वर्ष भी कोविड की वजह से ऐतिहासिक नौचंदी मेला नहीं लग पाया था. मेरठ का ऐतिहासिक नौचंदी मेला हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल भी कहा जाता है. इस मेले को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते रहे हैं. लगाता दूसरे वर्ष नौचंदी मेला न लगने के निर्णय से लोगों में निराशा है.
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गौरतलब है कि मेरठ में बीते चौबीस घंटे के दौरान 64 नए केस रिपोर्ट हुए थे. यहां कोरोना मरीज़ों का कुल आंकड़ा 21883 पहुंच गया है. कोरोना से कुल मरने वालों का आंकड़ा यहां 410 है. जबकि अब तक 21088 लोग कोरोना को मात दे चुके हैं.
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