Meerut News: मरीज में एक साथ मिला Black और White Fungus, डॉक्टर ने ऐसे बचाई जान

मरीज की जान बचाने डॉक्टरों ने किया ऑपरेशन.. (सांकेतिक तस्वीर)

मरीज की जान बचाने डॉक्टरों ने किया ऑपरेशन.. (सांकेतिक तस्वीर)

Mucormycosis Black Fungus in UP: उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक मरीज में ब्लैक (Black Fungus) और व्हाइट फंगस (White Fungus) दोनों मिले है. डॉक्टर ने सफल ऑपरेशन कर उनकी जान बचाई.

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मेरठ. उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) में फंगस का एक अऩोखा केस सामने आया है. यहां निजी अस्पताल में आए एक मरीज में एक साथ ब्लैक (Black Fungus) और व्हाइस फंगस (White Fungus) मिला है. इस मरीज़ का इलाज कर रहे निजी अस्पताल के डॉ. पुनीत भार्गव ने कहा कि अब तक उन्होंने ब्लैक फंगस के कई मरीजों का सफल ऑपरेशन किया है. लेकिन ऐसा पहला मामला सामने आया है जब मरीज में एक साथ दो-दो फंगस मिले हैं. निजी अस्पताल के सीनियर डॉ. पुनीत भार्गव ने बताया कि इस मरीज़ की राइट साइड की नाक में दोनों फंगस एक साथ थे. ब्लैक फंगस के साथ ही इस मरीज़ की नाक में व्हाइट फंगस की भी मौजूदगी थी. उन्होंने बताया कि मरीज़ की दूसरी साइड की नाक में भी ब्लैक फंगस मौजूद थे.

डॉक्टर भार्गव का कहना कि उन्होंने दूरबीन विधि से ब्लैक और व्हाइट फंगस हटा दिया है जिससे मरीज़ की आंख की रोशनी बच गई है. डॉक्टर पुनीत भार्गव का कहना है कि अब तक उन्होंने ब्लैक फंगस के 15 मरीजों का सफल ऑपरेशन किया है.

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मेरठ का पहला केस 
डॉक्टर पुनीत भार्गव ने बताया कि मरीजज बिजनौर का रहने वाला है. इस मरीज में दोनों प्रकार के संक्रमण एक साथ मिले हैं. ये भी बताया गया कि यह मेरठ में भर्ती होने वाला ऐसा पहला मरीज है जिसमें दोनों फंगस एक साथ मिले हैं.  इसे दुर्लभ केस माना जा रहा है. ऐसे पहले कभी नहीं हुआ कि  एक ही मरीज में काले और सफेद दोनों फंगस मिले हों. 42 वर्षीय मरीज बिजनौर का रहने वाला है और  निजी अस्पताल में उसका सफल ऑपरेशन हुआ है. डॉक्टर का कहना  है कि दोनों आंखों की रोशनी बच गई है. ऑपरेशन करने वाले डॉ. पुनीत भार्गव ने बताया कि मरीज को पता ही नहीं था की उसे दोनों फंगस हैं. वह तो आंख में दिक्कत है, यह परेशानी लेकर आया था. उनकी दाहिनी नाक की जांच की तो नाक में सफेद और काला दोनों फंगस दिखे. फिर एमआरआई कराया तो फंगस साइनस के अंदर कोने में घुसे थे और आंख गलानी शुरू कर दी थी. तब ऑपरेशन कर आंख बचाई गई है.

बताया जाता है कि दोनों फंगस की वजह रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना ही है. म्यूकरमाइकोसिस पर्यावरण में रहता है. यह मुंह या श्वास नली से कहीं भी पहुंच सकता है. एक साथ दोनों फंगस का संक्रमण होने से स्वस्थ होने में कोई खास परेशानी नहीं है. व्हाइट फंगस तो सामान्य दवा से ही ठीक हो जाता है. उन्होंने बताया कि व्हाइट फंगस के मामले पहले भी आते रहे हैं, यह बीमारी कैंडिडा नामक फंगस से होती है. यह उन लोगों में होती है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है. इनमें टीबी, एचआइवी और डायबिटीज के मरीज़ शामिल हैं. यह तब तक खतरनाक नहीं है जब तक रक्त में न पहुंच जाए. रक्त में पहुंचना दुर्लभ होता है. साधारण एंटी फंगल दवाओं से इसे ठीक किया जा सकता है.

जानें क्या हैं ब्लैक फंगस के लक्षण



डॉक्टर भार्गव ने बताया कि व्हाइट फंगस में मुंह खोलने पर सफेद परत जैसी दिखती है. जब फंगस आहार नली में पहुंचती है तो खाना निगलने में तकलीफ होती है. इसे इंडोस्कोपी से देखा जा सकता है.वहीं ब्लैक फंगस में नाक बंद होना, नाक से काले रंग का पानी आना.नाक के आसपास गालों पर सूजन होना. चेहरे में दर्द.चेहरे में सुन्नपन या सूजन आना.लगातार सिरदर्द. मुंह से बदबू. सीने में दर्द. आंखों में दर्द. आंखें लाल होना. खून की उल्टी होना आदि होता है. गौरतलब है कि मेरठ में ब्लैक फंगस के मरीजों का आंकड़ा 129 हो गया है जबकि अब तक 33 मरीज़ ठीक होकर डिस्चार्ज हुए हैं. वर्तमान में यहां 86 एक्टिव केस हैं.

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