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Meerut News: जेल से कोरोना के खिलाफ जंग, कैदी बना रहे मास्क और पीपीई किट

मेरठ जेल में मास्क बना रहे कैदी.

मेरठ जिला जेल के कैदी मास्क, सैनिटाइजर और पीपीई किट (PPE Kit) बनाकर कोरोना के खिलाफ जंग में सहयोग कर रहे है. 

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मेरठ. कोरोनाकाल (COVID-19) में मेरठ (Meerut) जि़ला कारागार ने मास्क सैनिटाइजर और पीपीई किट का रिकॉर्ड उत्पादन किया है. मानवता के लिए यहां के कैद़ियों ने लाखों मास्क बनाकर एक मिसाल कायम की है. कैदियों के इस व्यवहार को देखते हुए यहां के जेल अधीक्षक ने भी मानवीय रुख अपनाया और आमतौर पर सप्ताह में दो दिन पीसीओ के माध्यम से बात करने वाले कैदियों को अब सप्ताह में पांच दिन बात करने की अनुमति दिलवा दी. यही नहीं जेल में मात्र दो की जगह अब 14 पीसीओ वाली मशीन हो गई हैं. जेल के अंदर पीसीओ के जरिए अपनों से बात करने को कैदी कोरोनाकाल का सबसे बड़ा तोहफा मानते हैं.


कोरोनाकाल में जहां हम आप इस महामारी से घर के अंदर रहकर जंग लड़ रहे हैं तो वहीं जेल के अंदर बंद कैदी भी इस महामारी के ख़ात्म के लिए अपनी भूमिका भी बख़ूबी अदा कर रहे हैं. इसी कड़ी में मेरठ जिला कारागार के कैदी मास्क सैनिटाइज़र और पीपीई किट बनाकर मिसाल पेश कर रहे हैं.

कैदियों ने बनाया तीन लाख से ज्यादा मास्क

कोरोनाकाल के दौरान यहां के क़ैदियों ने तीन लाख से ज्यादा मास्क बनाकर उदाहरण पेश किया है. वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉक्टर बीडी पाण्डेय का कहना है कि कैदी पूरे उत्साह के साथ मास्क सैनिटाइज़र और पीपीई किट बनाने का कार्य युद्धस्तर पर कर रहे हैं. वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि पड़ोस की जेलों में भी यहां से मास्क इत्यादि मुहैया कराया गया है. उन्होंने बताया कि एक मास्क तैयार करने का बंदी को एक रुपये भी दिया गया. डॉक्टर बीडी पाण्डेय ने बताया कि ज़िला आबकारी अधिकारी से परमिट लेकर शुगर मिल से सैनिटाइज़र बनाने का फार्मूला लिया गया और डॉक्टर के मार्गदर्शन में इसे बनाना शुरु किया.
कोरोना के खिलाफ जंग में मास्क सैनिटाइज़र और पीपीई किट बनाने वाले कै़दियों को लेकर वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने एक और मानवीय पहल की है. कोरोनाकाल में जेल के अंदर पीसीओ की संख्या बढ़ाकर दो से चौदह कर दी गई है. इन पीसीओ के माध्यम से क़ैदी अपनों से सप्ताह में पांच बार बात कर सकते हैं. वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉक्टर बीडी पाण्डेय ने बताया कि जेल के अंदर वैक्सीनेशन का कार्य भी युद्धस्तर पर किया जा रहा है.
शायद कोविड़ से जंग में जेल प्रशासन के साथ कैदियों ने जो भूमिका निभाई है उसी का असर है कि आज की तारीख में मेरठ ज़िला कारागार में एक भी कोरोना पॉज़िटिव  केस नहीं है. बीते दिनों कुछ ऐसे ही माहौल को देखते हुए एक कैदी ने तो पैरोल पर रिहा न होने के लिए बाकयदा गुहार लगाई थी. इस क़ैदी ने कहा था कि उसे पैरोल की बजाए जेल के अंदर ही रहने दिया जाए क्योंकि वो यहां ज्यादा सुरक्षित और स्वस्थ महसूस कर रहा है. इस कैदी की गुहार को जेल प्रशासन ने मान लिया है.