• Home
  • »
  • News
  • »
  • uttar-pradesh
  • »
  • मां पहलवानों के लिए लंगोट सिलती है, पिताजी लंगोट बेचते हैं, बिटिया ने कॉमनवेल्थ में मेडल जीता

मां पहलवानों के लिए लंगोट सिलती है, पिताजी लंगोट बेचते हैं, बिटिया ने कॉमनवेल्थ में मेडल जीता

महिला कुश्ती कोच अलका तोमर बताती हैं कि दिव्या कुश्ती के मुकाबले में बेहद आक्रमक ढंग से उतरती हैं. उसमें जोश के साथ संतुलन भी रहता है जो किसी भी प्रतिद्वंद को पटखनी देने के लिए काफी है.

  • Share this:
    हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के गोल्डकोस्ट में संपन्न हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में देश की बेटियों ने अपना परचम लहराया था. देश के लिए पदक जीतने वालों में मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की छात्रा दिव्या भी शामिल थी. वैसे तो देश के लिए मेडल जीतने वाले हर खिलाड़ी की अपनी कहानी है लेकिन मेरठ की दिव्या की कहानी सबसे जुदा है. दिव्या की मां पहलवालों के लिए लंगोट सिलती है और पिताजी लंगोट बेचते हैं लेकिन दिव्या पहलवानी में कांस्य पदक जीतकर घर लौटी.

    20 साल की दिव्या इस वक्त चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में बीपीईएस फाइनल ईयर की छात्रा हैं. जिस उम्र में युवा अमूमन भटकते रहते हैं, उस उम्र तक दिव्या के खाते में नेशनल, इंटरनेशनल कुश्ती स्पर्धाओं में 65 से अधिक मेडल हैं.

    महिला कुश्ती कोच अलका तोमर बताती हैं कि दिव्या कुश्ती के मुकाबले में बेहद आक्रमक ढंग से उतरती हैं. उसमें जोश के साथ संतुलन भी रहता है जो किसी भी प्रतिद्वंद को पटखनी देने के लिए काफी है. दिव्या ने चौधरी चरण सिंह विश्वविवद्यालय में तीन बार गोल्ड मेडल जीता है. विश्वविद्यालय स्तर पर जीतने के बाद तीन बार आल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियन रही. विश्वविद्यालय की छात्रा के रूप में अर्जुन अवॉर्डी अलका तोमर के बाद दिव्या ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है.

    गरीब परिवार से होने और कम संसाधनों के बाद भी कॉमनवेल्थ में देश के लिए पदक जीतकर दिव्या ने साबित कर दिया है कि अगर ठान लो तो नामुमकिन कुछ भी नहीं है.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज