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अब डॉल्फिन की गणना तय करेगी कितनी साफ हुई गंगा?

Umesh Srivastava | News18 Uttar Pradesh
Updated: October 10, 2019, 3:39 PM IST
अब डॉल्फिन की गणना तय करेगी कितनी साफ हुई गंगा?
गंगा में डॉल्फिन की गणना शुरू

इस बार डॉल्फिन की गणना के लिए एक की बजाए दो बोट की टीमें डॉल्फिन की गणना कर रही हैं और बेहद हाईटेक तरीके से पहली बार ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम यानी जीपीएस का भी इस्तेमाल हो रहा है.

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मेरठ. डॉल्फिन की अनोखी दुनिया की बदौलत वन विभाग (Forest Department) यह पता लगाएगा कि गंगा सफाई अभियान कहां तक पहुंचा. दरअसल, गंगा नदी में डॉल्फिन (Dolphin) की संख्या से ये तय होगा कि सफाई कहां तक हुई. गंगा में डॉल्फिन की गणना शुरु हो गई है. 15 अक्टूबर तक गंगा नदी में डॉल्फिन की गणना की जाएगी. बिजनौर से गढ़मुक्तेश्वर और गढ़मुक्तेश्वर से नरौरा के बीच डॉल्फिन की गिनती शुरु हो गई है. इस बार डॉल्फिन की गणना के लिए एक की बजाए दो बोट की टीमें डॉल्फिन की गणना कर रही हैं और बेहद हाईटेक तरीके से पहली बार ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम यानी जीपीएस का भी इस्तेमाल हो रहा है.

जीपीएस सिस्टम से हो रही गणना

रोमांच से भरे इस जलीय जीव पर वन विभाग शोध कर रहा है. इसी शोध को लेकर गंगा नदी में डॉल्फिन की गिनती की जा रही है. ऐसा पहली बार हो रहा है जब जीपीएस सिस्टम से डॉल्फिन को लोकेट किया जा रहा है. 15 अक्टूबर को इसका रिजल्ट आएगा कि गंगा में कितनी डॉल्फिन दिखाई दीं. मेरठ की डीएफओ अदिति शर्मा का कहना है कि डब्लूडब्लूएफ के साथ मिलकर डॉल्फिन की गणना की जाती है. उन्होंने बताया कि हर तीन मिनट के बाद डॉल्फिन पानी के उपर आती है और इसकी गणना करना बेहद मुश्किल काम होता है. इस बार बिजनौर डैम से लेकर नरौरा डैम तक टेंडम मैथड के ज़रिए डॉल्फिन की गणना की जाएगी.

2018 में 33 डॉल्फिन देखे गए थे

डीएफओ अदिति शर्मा का कहना है कि इस बार नदी के दोनों तरफ दो बोट चल रही हैं. इस टीम को जैसे ही डॉल्फिन दिखाई देगी. तत्काल वो टाइम नोट करेगी. डायरेक्शन नोट करेगी.और जीपीएस सिस्टम के ज़रिए मॉनिटर करेगी. बाद में साइंटफिक मैथड से इसकी प्लॉटिंग की जाएगी और हर प्वाइंट पर रिसर्च की जाएगी. उन्होंने बताया कि पांच सौ मीटर तक अगर डॉल्फिन दो बार या और बार दिखाई देती है तो भी उसे एक ही डॉल्फिन माना जाएगा. इस बार ख़ासतौर पर एक्यूरेसी को लेकर जीपीएस सिस्टम का प्रयोग किया जा रहा है. आंकड़ों की बात करें तो 2018 में यहां 33 डॉल्फिन देखे गए थे. जिसमें कुछ बच्चे डॉल्फिन भी शामिल है. डीएफओ अदिति शर्मा का कहना है कि ये जलीय जीव साफ जल में रहता है. गंगा में डॉल्फिन की गणना ये भी तय करेगी कि सरकार का गंगा सफाई को लेकर प्रयास कितना रंग ला रहा है. क्योंकि अगर डॉल्फिन की संख्या घटती है तो ये माना जाएगा कि पानी उतना साफ नहीं हुआ है जिस वजह से डॉल्फिन की संख्या घटी है. लेकिन अगर डॉल्फिन की संख्या बढ़ती है तो ये स्पष्ट तौर पर कहा जा सकेगा कि गंगा के सफाई अभियान का असर दिख रहा है.

अदिति शर्मा ने बताया कि हर साल एक्यूरेसी के मैथड को और बेहतर किया जाता है. डॉल्फिन को नदी का टाइगर भी कहते हैं. वर्तमान में गांगेय डॉल्फिन भारत नेपाल और बांग्लादेश में गंगा ब्रम्हपुत्र और करनाफुल्ली नदी में पाया जाता है. गांगेय डॉल्फिन का अस्सी प्रतिशत क्षेत्र भारत की सीमा में आता है. गांगेय डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव का दर्ज़ा भी प्राप्त है. ऐसे में अब सभी को इंतज़ार 15 अक्टूबर का है. जब इस राष्ट्रीय जलीय जीव की संख्या का पता चलेगा.

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First published: October 10, 2019, 3:39 PM IST
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