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33 साल से बदले की आग में जल रहे शख्स ने CAA प्रदर्शन के दौरान मेरठ पुलिस पर बरसाई थीं गोलियां!

News18 Uttar Pradesh
Updated: January 15, 2020, 5:43 PM IST
33 साल से बदले की आग में जल रहे शख्स ने CAA प्रदर्शन के दौरान मेरठ पुलिस पर बरसाई थीं गोलियां!
पुलिस की गिरफ्त में 20 हजार का ईनामी अनीस खलीफा गिरफ्तार

गिरफ्तार आरोपी अनीस खलीफा ने बताया कि वर्ष 1987 के दंगे में उसके भाई की मौत हो गई थी जिसके लिए वो पुलिस को जिम्मेदार मानता है. भाई के खून का बदला लेने के लिए ही उसने मेरठ में भड़की हिंसा (Meerut Violence) के दौरान पुलिस (UP Police) पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी

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मेरठ. 33 साल से इंतकाम की आग में जल रहे एक शख्स ने पुलिस को मारकर बदला लेने का मंसूबा पाल रखा था. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर बीते 20 दिसंबर को मेरठ (Meerut) में भड़की हिंसा (CAA Protest Violence) के दौरान पुलिस पर फायरिंग करने वाले शख्स ने ये जहरीला राज उगला है. मेरठ हिंसा की जांच कर रही पुलिस ने ये चौंकाने वाला खुलासा किया है. पुलिस पर फायरिंग करने वाले 20 हजार के इनामी, दंगे के आरोपी अनीस खलीफा को गिरफ्तार किया है.

पकड़े जाने के बाद अनीस खलीफा ने जो खुलासे किये हैं उससे पुलिस भी हैरान है. आरोपी ने बताया कि वर्ष 1987 के दंगे में उसके भाई की मौत हो गई थी जिसके लिए वो पुलिस को जिम्मेदार मानता है. भाई के खून का बदला लेने के लिए ही उसने पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी. पुलिस के मुताबिक आरोपी अनीस खलीफा ने बताया कि 1987 में मेरठ दंगे के दौरान उसके भाई रईस की मौत हुई थी. इसका बदला लेने के लिए उसने CAA विरोध-प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा में पुलिसकर्मियों को जान से मारने की नीयत से गोलियों की बौछार की थी. पुलिस ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज में अनीस खलीफा कैमरे में कैद हुआ है. उसने बताया कि वो पिछले 33 साल से इंतकाम की आग में जल रहा था.

मेरठ हिंसा के दौरान पुलिस को बनाया गया था निशाना
बता दें कि 20 दिसंबर को मेरठ में सीएए प्रोटेस्ट (CAA Protest) के दौरान भयावह हिंसा हुई थी. इस दौरान ताबड़तोड़ फायरिंग कर पुलिस को निशाना बनाया गया था. पुलिस ने जब सीसीटीवी फुटेज में गोलियों की बौछार करने वालों की पहचान की तो उनमें से एक आरोपी अनीस खलीफा निकला. पुलिस ने उस पर 20 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. पुलिस ने दबिश देकर आरोपी दंगाई अनीस खलीफा को आखिरकार धर लिया. उसने पूछताछ में जो राज उगला वो बेहद चौंकाने वाला है. मेरठ के एसपी सिटी अखिलेश नारायण सिंह (SP City Meerut) ने बताया कि 1987 से ही अनीस दंगे की आग में जल रहा था और इसका बदला लेने की फिराक में था. इसके तहत उसने पुलिसवालों को जान से मारने की नीयत से फायरिंग की थी.

Meerut violence firing viral video
नागरिकता संशोधन कानून को लेकर प्रदर्शन के दौरान मेरठ में 20 दिसंबर को हिंसा और आगजनी हुई थी (फोटो: वायरल वीडियो ग्रैब)


अनीस खलीफा का आपराधिक इतिहास, जमानत पर था जेल से बाहर
अनीस खलीफा के अलावा पुलिस ने 20 हजार के एक अन्य आरोपी अनस को भी गिरफ्तार किया. इसके पहले भी शाने आलम नाम का एक आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़ा था. पकड़ा गया खलीफा पीएफआई से भी जुड़ा बताया जा रहा है. मेरठ हिंसा को लेकर पुलिस ने 24 मुकदमे दर्ज किये हैं जिनमें अब तक 180 नामजद और पांच हजार अज्ञात लोगों के नाम शामिल हैं. वहीं 178 बवालियों को फोटो और वीडियो से चिन्हित (पहचान) किया गया है. फरारी के बाद अब तक 28 लोगों पर पांच-पांच हजार का इनाम घोषित किया है. बता दें कि पुलिस ने चेहरा छिपाकर फायरिंग करने वाले अनीस खलीफा और अनस की पहचान कर उन पर 20-20 हजार का इनाम घोषित किया था.अनीस ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि 1987 के दंगे में उसके भाई रईस की मौत हुई थी. परिवार के लोग तब से उसे याद कर के रोते हैं. भाई की मौत का बदला लेने के लिए उसने हथियार उठाकर पुलिसकर्मियों पर फायरिंग की थी. यही नहीं अनीस खलीफा वर्ष 2005 में तारापुरी के पप्पू उर्फ अमजद की हत्या में भी जेल जा चुका है. वो जमानत पर रिहा हुआ था. पुलिस ने बताया कि अनीस मेरठ के राधना इलाके से हथियारों की खेप खरीदता था. बता दें कि 1987 में मेरठ के हाशिमपुरा और मलियाना में भयानक दंगे हुए थे जिसमें कई लोगों की मौत हुई थी.

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First published: January 15, 2020, 4:49 PM IST
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