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मेरठ: ईको टूरिज़्म दिलाएगा हस्तिनापुर को इस 'श्राप' से मुक्ति!

मेरठ: ईको टूरिज़्म दिलाएगा हस्तिनापुर को इस 'श्राप' से मुक्ति!

शाप की वजह से नहीं हो पा रहा हस्तिनापुर का विकास

शाप की वजह से नहीं हो पा रहा हस्तिनापुर का विकास

मेरठ में वन विभाग ने हस्तिनापुर स्थित वानिकी प्रशिक्षण केन्द्र परिसर में गंगा व्याख्यान केन्द्र खोल दिया है. वन विभाग की इस पहल से ईको टूरिज़्म के ज़रिए पर्यटकों को जंगल और वन्य जीवों की झलक भी देखने को मिलेगी.

    क्या ईको टूरिज़्म हस्तिनापुर को द्रौपदी के श्राप से मुक्त कराएगा. ऐसा माना जाता है कि मेरठ से तकरीबन चालीस किलोमीटर दूर हस्तिनापुर अब भी द्रौपदी के श्राप का दंश झेल रहा है इसलिए यहां का विकास नहीं हो पाता. लेकिन अब लगता है कि हस्तिनापुर द्रौपदी के श्राप से मुक्त हो जाएगा, इसकी बानगी है हस्तिनापुर में ईको टूरिज़्म. वन विभाग ने हस्तिनापुर स्थित वानिकी प्रशिक्षण केन्द्र परिसर में गंगा व्याख्यान केन्द्र खोल दिया है. वन विभाग की इस पहल से ईको टूरिज़्म के ज़रिए पर्यटकों को जंगल और वन्य जीवों की झलक भी देखने को मिलेगी.

    ईको टूरिज़्म से आएंगे अच्छे दिन
    हस्तिनापुर सेंचुरी में वन विभाग ईको टूरिज़्म को बढ़ावा देने की तरफ बढ़ रहा है. कोशिश की जा रही है कि हस्तिनापुर सेंचुरी में पर्यटकों की चहलकदमी बढ़े. इसके लिए वन विभाग ने हस्तिनापुर स्थित वानिकी प्रशिक्षण केन्द्र परिसर में गंगा व्याख्यान केन्द्र खोल दिया है. जहां पर एक ही नज़र में हस्तिनापुर सेंचुरी और वन्य जलीय जीवों की झलक और जानकारी मिल जाएगी. ईको टूरिज़्म के ज़रिए पर्यटकों को जंगल और वन्य जीवों की झलक भी देखने को मिलेगी. कह सकते हैं कि ईको टूरिज़्म हस्तिनापुर को द्रोपदी के श्राप से मुक्त करेगा.

    ईको टूरिज़म का हब बनेगा हस्तिनापुर, hastinapur will be developed as tourism hub
    ईको टूरिज़म का हब बनेगा हस्तिनापुर


    शाप जिसका दंश हस्तिनापुर झेल रहा है..
    धार्मिक कथाओं की मानें को महाभारत काल की कहानियों में इस शाप का ज़िक्र है. करीब 5 हज़ार साल पुराने इस शाप का ही असर है कि देश की राजधानी के इतना पास होने के बावजूद ये क्षेत्र आज तक विकास को तरस रहा है. महाभारत काल में हस्तिनापुर पांडवों की राजधानी था. जुए के खेल में युधिष्ठिर कौरवों से सब कुछ हार गए थे. इस के बाद पांडवों को 12 साल के वनवास और एक साल के अज्ञातवास पर जाना पड़ा. कहा जाता है कि जब पांडव वनवास के लिए निकल रहे थे तो सभा में मौजूद विदुर ने द्रौपदी और सभी पांडवों की भाव भंगिमाओं को देखकर उसी सभा में कौरवों और हस्तिनापुर के विनाश की भविष्यवाणी कर थी.

    द्रौपदी ने दिया ये श्राप
    युधिष्ठिर जब जुए में द्रौपदी को हार गए तो भरी सभा में द्रौपदी का चीरहरण हुआ. इससे नाराज़ द्रौपदी ने भरी सभा में कौरवों और हस्तिनापुर को श्राप दिया था. उन्होंने कहा था कि जहां नारी का सम्मान नहीं होता वहां केवल विनाश और बदहाली ही रहती है. आज यही श्राप हस्तिनापुर के लिए नासूर बन गया है.

    हस्तिनापुर के विकास के लिए प्रयास
    आज़ादी के बाद सरकार ने हस्तिनापुर को विकसित करने की शुरूआत की थी. हस्तिनापुर को एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन ये शहर उस श्राप से उबर नहीं पाया. लेकिन अब लगता है कि इस शहर के अच्छे दिन आने वाले हैं. ईको टूरिज़्म के ज़रिए पर्यटकों को जंगल और वन्य जीवों की झलक भी देखने को मिलेगी. कह सकते हैं कि ईको टूरिज़्म हस्तिनापुर को द्रौपदी के श्राप से मुक्त करेगा.

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    Tags: Mahabharata, Mer, Tourism, Uttar pradesh news, Uttar Pradesh tourism

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