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बदहाल शिक्षा व्यवस्था: मेरठ में तालाब बन चुके प्राइमरी स्कूल में पढ़ने को मजबूर नौनिहाल
Meerut News in Hindi

News18 Uttar Pradesh
Updated: February 18, 2020, 6:52 PM IST
बदहाल शिक्षा व्यवस्था: मेरठ में तालाब बन चुके प्राइमरी स्कूल में पढ़ने को मजबूर नौनिहाल
गंदा नाला बन चुके प्राइमरी स्कूल परिसर में पढ़ने जाते हैं बच्चे

स्कूल में पढ़ने आने के लिए बच्चे जब संतुलन बनाकर नाले के बीच रखी ईंटों से गुजरते हैं तो इनसे हर आने-जाने वाला यही कहता है, 'जरा संभल के'. इस प्रयास में कई बार यहां बच्चे गिर कर चोटिल भी हुए हैं

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मेरठ. एक तरफ सरकार शिक्षा व्यवस्था (Education System) सुधारने के बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन आए दिन उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के सरकारी स्कूलों की बदहाली सामने आती रहती है. ताजा मामला मेरठ (Meerut) जनपद के एक सरकारी स्कूल का है. इस सरकारी विद्यालय (Government School) में वर्षों से तालाब जैसे हालात हैं. यहां से होकर एक गंदा नाला गुजरता है जिसे पार कर हर दिन छात्र और शिक्षक गिरते-पड़ते किसी तरह स्कूल पहुंचते हैं.

गंदगी के बीच परोसा जाता है मिड-डे मील
आम तौर पर सरकारी स्कूल में अव्यवस्थाओं की खबरें अक्सर सुनाई देती रहती हैं लेकिन मेरठ के इस स्कूल परिसर के अंदर ही गंदगी का तालाब बन गया है. यहां पढ़ने वाले छात्र नाला पार कर गिरते-पड़ते स्कूल पहुंचते हैं. इतना ही नहीं बच्चों को इसी गंदे पानी और बदबू के बीच मिड डे मील (Mid Day Meal) परोसा जाता है, जो उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है. आपको यह जानकर और भी हैरानी होगी कि गंदगी का ये आलम एक-दो दिन या एक-दो महीने नहीं बल्कि वर्षों से चला आ रहा है. ये स्कूल नगर निगम के क्षेत्र में आता है लेकिन आज तक न तो नगर निगम को और न ही बीएसए साहब को स्कूल की ये गंदगी नजर आई.

आने-जाने वाले कहते हैं, 'जरा संभल के'



जिला मुख्यालय से तकरीबन बीस किलोमीटर दूर नगर निगम क्षेत्र में आने वाले प्राइमरी स्कूल गोलाबढ़ की हालत इतनी बदतर है कि बच्चे नाले के गंदे पानी को जैसे-तैसे पार कर के स्कूल पहुंचते हैं. विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों और उनके शिक्षकों की ये समस्या कोई एक दो दिन की नहीं बल्कि वर्षों से बनी हुई है. ये लोग कीचड़ भरे इस नाले को पारकर स्कूल पहुंचते हैं. स्कूली बच्चों को निकलने के लिए ईंटे रखी गई हैं जिसके सहारे ये बच्चे पाठशाला पहुंचते हैं. नन्हें-मुन्ने बच्चे जब संतुलन बनाकर नाले के बीच रखी ईंटों से गुजरते हैं तो इन्हें देखकर हर आने जाने वाला यही कहता है, 'जरा संभल के.' कई बार यहां बच्चे चोटिल भी हुए हैं, लेकिन न तो नगर निगम और न ही जिला प्रशासन को इससे कोई फर्क पड़ा. मासूम बच्चे जिलाधिकारी (डीएम) और तमाम आलाधिकारियों से स्वच्छता की गुहार लगा रहे हैं.



government school of meerut
गंदगी के बीच सरकारी विद्यालय में पढ़ने को मजबूर हैं छात्र


स्कूल परिसर के बाहर तो गंदगी का आलम है ही, स्कूल के अंदर भी तालाब जैसे हालात हैं. स्कूल में पढ़ने वाले 178 बच्चे रोजाना गिरते-पड़ते यहां पहुंचते हैं. उन्हें बदबूदार माहौल में ही पठन-पाठन करना पड़ता है. और तो और इसी परिसर में आंगनबाड़ी (Anganwadi) के भी बच्चे आते हैं. आए दिन वो यहां गिर कर बच्चे चोटिल होते हैं. वर्षों से चले आ रहे जल-जमाव की समस्या को लेकर जब नगर आयुक्त साहब से बात की गई तो महोदय सिर्फ इतना कहते हुए नजर आए कि मामला संज्ञान में है जल्द ही कार्रवाई की जाएगी. वहीं स्कू​ल के शिक्षकों ने न्यूज़ 18 से बातचीत में बताया कि इस समस्या को लेकर आलाधिकारियों से पत्र व्यवहार भी किया लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.

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First published: February 18, 2020, 6:21 PM IST
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