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इतिहास के पन्नों में नहीं अब चित्रों की माध्यम से दीवार पर उकेरी जाएगी आजादी की कथाएं

राजकीय

राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय में बनाई जा रही चित्र प्रदर्शनी

इन्हीं बातों को देखते हुए अब युवाओं को आजादी के इतिहास को चित्रों के माध्यम से दर्शाया जाएगा. जी हां उत्तर प्रदेश ( Uttar Pradesh) के मेरठ (Meerut) की शांति धरा से हर कोई परिचित है.

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    मेरठ:-डिजिटल दौर में युवा अब एक क्लिक के माध्यम हर इतिहास को जानना चाहते हैं. किताबों के पन्नों को पढ़ने की जगह सिर्फ चित्रों से ही हकीकत को जानने की कोशिश करते है. इन्हीं बातों को देखते हुए अब युवाओं को आजादी के इतिहास को चित्रों के माध्यम से दर्शाया जाएगा. जी हां उत्तर प्रदेश ( Uttar Pradesh) के मेरठ (Meerut) की शांति धरा से हर कोई परिचित है.मेरठ पर्यटन के क्षेत्र में एक ओर विशेष पहचान से जाना जाएगा. जिसके लिए राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय में विशाल चित्र प्रदर्शनी बनाई जा रही है. जो सभी लोगों को शहीदों की वीर गाथा से रूबरू कराएगी.

    प्रत्येक गैलरी में होगा आजादी का इतिहास
    राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय में बनने वाली प्रदर्शनी में अलग-अलग गैलरी बनाई गई है. कुल 5 गैलरी में युवा मेरठ से लेकर झांसी और लखनऊ सहित अन्य शहरों के इतिहास को जान पाएंगे. जिस इतिहास को अब तक सिर्फ किताबों में ही पढ़ पाते थे.  संग्रहालयाध्यक्ष पतरू की मानें तो प्रदर्शनी के लिए ऐसे चित्रों का चयन किया गया है. जिससे युवा आजादी की कहानी को चित्रों के माध्यम से समझ सके. उन्होंने बताया कि इस प्रदर्शनी को बनाने से पूर्व विभिन्न इतिहासकारों ने पुरातन तथ्यों को एकत्रित करते हुए चित्रों को सिलेक्ट किया है. उन्हीं चित्रों को अब दीवारों पर उकेरा जा रहा है.
    एक क्लिक पर चलेगी चित्र प्रदर्शनी
    चित्र प्रदर्शनी हाईटेक तरीके से भी देखी जा सकेेंगी. प्रोजक्टर भी लगाया जाएगा. जैसे ही क्लिक करेंगे उसके बाद चित्र प्रदर्शनी के माध्यम से सभी गौरव गाथाओं का वर्णन किया जाएगा. जिसमें पश्चिम उत्तर प्रदेश से लेकर अब तक की सभी क्रांति की कहानियां दिखेगी.
    1997 में हुई थी संग्रहालय की स्थापना
    दिल्ली रोड स्थित राजकीय सुंदरता संग्राम संग्रहालय की स्थापना 1997 में हुई थी. इस संग्रहालय में 1857 से जुड़ी क्रांति के तथ्य मौजूद हैं. प्रदेश सरकार द्वारा इस संग्रहालय को आधुनिक बनाया जा रहा है. जिसके लिए एक करोड़ 35 लाख रुपए की लागत से संग्रहालय में पेंटिंग, प्रोजक्टर, एलईडी, रिवाल्विंग डिश सहित शोध के 1400 पन्नों से ऐतिहासिक तस्वीरें भी चित्रों में उकेरी जा रही है.

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