Home /News /uttar-pradesh /

साइबेरिया से 4.0 हजार KM उड़कर मेरठ पहुंचे विदेशी मेहमान, चहचहाहट से गुंजायमान हुआ हस्तिनापुर सेंक्चुरी

साइबेरिया से 4.0 हजार KM उड़कर मेरठ पहुंचे विदेशी मेहमान, चहचहाहट से गुंजायमान हुआ हस्तिनापुर सेंक्चुरी

उत्तरी गोलार्ध में सितंबर महीने के अंत में बर्फबारी होती है, तो वहां से 90 फीसदी परिंदे भारत की ओर रुख करते हैं. ये परिंदे झुंड में 30 से 35 हजार किलोमीटर का सफर सिर्फ 10 से 12 दिन में तय कर लेते हैं. (Photo: News18 Hindi )

उत्तरी गोलार्ध में सितंबर महीने के अंत में बर्फबारी होती है, तो वहां से 90 फीसदी परिंदे भारत की ओर रुख करते हैं. ये परिंदे झुंड में 30 से 35 हजार किलोमीटर का सफर सिर्फ 10 से 12 दिन में तय कर लेते हैं. (Photo: News18 Hindi )

Meerut News: सात समंदर पार से हजारों किलोमीटर की यात्रा करके विदेशी मेहमान मेरठ (Meerut) से 40 किलोमीटर दूर स्थित हस्तिनापुर वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी (Hastinapur Wildlife Sanctuary) पहुंच गए हैं. जी हां, आजकल हस्तिनापुर सेंक्चुरी की शांत वेंटलैंड में सुबह शाम विदेशी पक्षियों की चहचहाहट मन मोहने लगी है. हजारों किलोमीटर का सफर तय करने के बाद विदेशी परिंदो (Migratory Bird) का एक बड़ा झुंड भीकुंड वेटलैंड पहुंच गया है. साइबेरिया, मंगोलिया, चीन, अफ्रीका आदि देशों से परिंदे 4 महीने के लिए भारत आते हैं. चिड़ियों की चहचहाहट सुनकर सभी का मन प्रफुल्लित हो रहा है. खासतौर से बर्ड वॉचिंग का शौक रखने वालों के लिए तो ये नजारा स्वर्ग जैसा ही है.

अधिक पढ़ें ...

मेरठ. मेरठ (Meerut) से 40 किलोमीटर दूर हस्तिनापुर वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी (Hastinapur Wildlife Sanctuary) का नजारा आजकल मन मोह रहा है. यहां 7 समंदर पार से हजारों किलोमीटर का सफर तय करने के बाद विदेशी परिंदो (Migratory Bird) का एक बड़ा झुंड भीकुंड वेटलैंड पहुंच गया है. साइबेरिया, मंगोलिया, चीन, अफ्रीका आदि देशों से परिंदे भारत में 4 महीने के लिए आते हैं. 7 समंदर पार से आए प्रवासी पक्षियों को देखने के लिए लोग दूर-दूर से हस्तिनापुर पहुंच रहे हैं. चिड़ियों की चहचहाहट सुनकर सभी का मन प्रफुल्लित हो रहा है. खासतौर से बर्ड वॉचिंग का शौक रखने वालों के लिए तो ये नजारा स्वर्ग जैसा ही है.

बताया जाता है कि उत्तरी गोलार्ध में सितंबर महीने के अंत में बर्फबारी होती है, तो वहां से 90 फीसदी परिंदे भारत की ओर रुख करते हैं. ये परिंदे झुंड में 30 से 35 हजार किलोमीटर का सफर सिर्फ 10 से 12 दिन में तय कर लेते हैं. बताते हैं कि ये अपना रास्ता सूर्य और चांद-तारों की स्थिति देखकर तय करते हैं. पर्वतों, नदियों, वनों और झीलों के जरिए ये अनुकुल वातावरण पहचान लेते हैं. विश्व प्रवासी दिवस वर्ष में दो बार मई और अक्टूबर के महीने में मनाया जाता है. इस बार की थीम सिंग फ्लाई सोर लाइक एक बर्ड है.

डीएफओ राजेश कुमार का कहना है कि ये हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि प्रवासी चिड़िया भारत में आती हैं. डीएफओ का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार ज्यादा विदेशी चिड़ियों के आने की संभावना है. आकाश में खूबसूरत चिड़ियों का ऐसा शानदार नजारा देखने को मिल रहा है कि हर कोई टकटकी लगाए बस देखता ही रहता है. जो भी इन चिड़ियों को देख रहा है वो वाह-वाह कह रहा है.

हजारों की संख्या में बर्ड्स को देखकर क्या बच्चे, क्या बड़े सभी की खुशी का ठिकाना नहीं है. इन परिदों को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे ये सबक दे रहे हों कि हर पल जियो जी भर जियो. वाकई में इन्हीं परिदों के लिए किसी ने क्या खूब लिखा है- ‘पंछी नदिया पवन के झोंके, कोई सरहद न इन्हें रोके’.

Tags: Meerut news, Wildlife, Wildlife Conservation in India, Wildlife department, Wildlife news in hindi

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर