मेरठ का ये प्राइमरी स्‍कूल बना मिसाल, इस वजह से अंग्रेजी में बात करते हैं बच्‍चे

इस स्कूल के क्लासरुम देखकर लगता ही नहीं कि ये कोई प्राइमरी स्कूल है. कई मायनों में ये स्कूल कॉनवेन्ट से भी बेहतर है.

Umesh Srivastava | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 4, 2019, 6:30 PM IST
मेरठ का ये प्राइमरी स्‍कूल बना मिसाल, इस वजह से अंग्रेजी में बात करते हैं बच्‍चे
दो टीचर्स की पहल से बदल गई बच्‍चों की किस्‍मत.
Umesh Srivastava | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 4, 2019, 6:30 PM IST
आमतौर पर हम सब चलता है एटीट्यूड में काम करने के आदी हो चुके हैं, लेकिन इच्छाशक्ति हो तो अंधेरे में भी अलख जगाई जा सकती है. कुछ ऐसी ही शिक्षा की अलख जगा रही हैं मेरठ की दो टीचर्स. बेसिक शिक्षा की हमारे प्रदेश में क्या दशा है ये ज्यादा बताने की जरूरत नहीं, लेकिन इस सब के बीच आज हम आपको एक ऐसे प्राइमरी स्कूल के बारे में बताने जा रहे हैं जो अन्य प्राइमरी स्कूलों के लिए किसी मिसाल से कम नहीं. यहां की दो टीचर्स ने इस प्राइमरी स्कूल को कॉनवेन्ट से बेहतर बनाकर दिखा दिया. यही वजह है कि इस प्राइमरी स्कूल के बच्चे अंग्रेजी में बात करते हैं और टीचर्स लैपटॉप के जरिए बेहद हाईटेक तरीके से बच्चों को पढ़ाती हैं. जबकि इन टीचर्स के प्रयास को प्रदेश की शिक्षा मंत्री ने भी सराहा है.

दो टीचर्स ने बदली प्राइमरी स्कूल की दशा और दिशा
ये कहानी दर्शाती है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो असम्भव को भी सम्भव किया जा सकता है. राज्‍य में प्राइमरी स्कूल तालाब बने हुए हैं तो कहीं भूत बंगले की शक्ल वाली इमारतों में पढ़ने को मजबूर हैं देश के नौनिहाल. ऐसे में मेरठ का एक प्राइमरी स्कूल उजाले की किरण बनकर सामने आया है. आपको जानकर अच्छा लगेगा कि मेरठ के इस प्राइमरी स्कूल में बिलकुल कॉनवेन्ट स्कूल की तर्ज पर पढ़ाई हो रही है. बेहद रचनात्मक तरीके से यहां बच्चों को शिक्षा दी जा रही है. टीचर्स ख़ुद अपना लैपटॉप लेकर आती हैं और बच्चों को क्रियेटिव तरीके से पढ़ा रही हैं. मेरठ की दो टीचर्स यतिका पुंडीर और सहबा जमाल ने ये करिश्मा करके दिखा दिया. जबकि प्रदेश की बेसिक शिक्षा मंत्री भी इनकी तारीफ किए बगैर न रह सकीं.

मेरठ की दो टीचर्स यतिका पुंडीर और सहबा जमाल ने ये करिश्मा करके दिखा दिया


यतिका और सहबा का कमाल
अपने अऩोखे तरीके से पढ़ाने वाले इन टीचर्स का कहना है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो कोई कार्य मुश्किल नहीं. टीचिंग सिर्फ उनके लिए नौकरी भर नहीं है बल्कि ये उनका जुनून है. यतिका पुंडीर और सहबा जमाल का कहना है कि उन्हें अच्छी सैलरी देती है और किसी प्रकार की कोई कमी नहीं होने देती, तो आखिर वो बच्चों को शिक्षा देने में सिर्फ कामचलाऊ तरीके से काम क्यों करें. स्कूल की प्रिंसिपल और बच्चे भी अपने टीचर्स की तारीफ करते नहीं थकते.

स्कूल की प्रिंसिपल और बच्चे भी अपने टीचर्स की तारीफ करते नहीं थकते.

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इस स्कूल के क्लासरुम देखकर लगता ही नहीं कि ये कोई प्राइमरी स्कूल है. कई मायनों में ये स्कूल कॉनवेन्ट से भी बेहतर है. क्लासरुम में अलग अलग पोस्टर्स लगे हुए हैं जो बच्चों को खेल खेल में शिक्षा दे रहे हैं और बच्चे भी ऐसी प्राइमरी स्कूल में पढ़कर धन्य है. एक तरफ टाट पट्टी में बैठकर टपकती छत के नीचे पढ़ने का नज़ारा है, तो दूसरी तरफ अत्याधुनिक क्लासरुम में पढाई. यहां की टीचर्स का कहना है कि वो अपनी सैलरी से भी स्कूल के उत्थान के लिए अपना योगदान करते हैं. वाकई में आज के दौर में जहां प्राथमिक स्कूल में शिक्षा सिर्फ खानापूर्ति बनकर रह गई है. ये स्कूल अन्य कई स्कूलों के लिए प्रेरणास्रोत है. अगर प्रदेश के सभी प्राइमरी स्कूल ऐसे ही बन जाएं,तो बच्चों का भविष्य दिन दोगुनी रात चौगुनी तरक्की करे.

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First published: August 4, 2019, 6:19 PM IST
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