Happy Birthday: भुवनेश्वर कुमार के करियर की सर्वश्रेष्ठ गेंद, जिसके आगे सचिन ने भी टेक दिए थे 'घुटने'

भुवनेश्वर कुमार ने 2009 में हैदराबाद में हुए रणजी ट्रॉफी फाइनल में तेंदुलकर को पहली बार जीरो पर आउट किया.

News18Hindi
Updated: February 5, 2019, 9:12 AM IST
Happy Birthday: भुवनेश्वर कुमार के करियर की सर्वश्रेष्ठ गेंद, जिसके आगे सचिन ने भी टेक दिए थे 'घुटने'
भुवनेश्वर कुमार ने 2009 में हैदराबाद में हुए रणजी ट्रॉफी फाइनल में तेंदुलकर को पहली बार जीरो पर आउट किया.
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Updated: February 5, 2019, 9:12 AM IST
टीम इंडिया के तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार आज 29 साल के हो गए हैं. टीम इंडिया के इस स्विंग गेंदबाज ने खेल की दुनिया में यूपी के छोटे से शहर मेरठ को एक नई पहचान दी है. भुवनेश्वर भारत के चुनिंदा खिलाड़ियों में से एक हैं. जिनका जन्म तब हुआ जब सचिन तेंदुलकर भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलना शुरू कर चुके थे. इसे महज इत्तेफाक ही कहा जाएगा कि भुवी को पहली बार राष्ट्रीय मीडिया में ख़बरों में आने का मौका तेंदुलकर के चलते ही मिला.

17 साल की उम्र में पहले फर्स्ट क्लास करियर की शुरुआत करने वाले भुवी पहली बार सुर्खियों में तब आये थे जब उन्होंने सचिन तेंदुलकर को घरेलू क्रिकेट में बिना खाता खोले पवेलियन भेजने का कमाल दिखाया था. जनवरी 2009 में हैदराबाद में हुए रणजी ट्रॉफी फाइनल में जब उत्तर प्रदेश के भुवनेश्वर का सामना क्रिकेट इतिहास के महानतम बल्लेबाज़ों से में एक सचिन तेंदुलकर से हुआ तो नज़ारा अविश्वसनीय था. घरेलू क्रिकेट में किसी गेंदबाज में इतनी ताकत दिखती है कि वो तेंदुलकर को लगातार 12 गेंद तक परेशान करे और एक सिंगल लेने का मौका भी ना दे. भुवी ने अपनी तेरहवीं गेंद पर तेंदुलकर को आउट करके भारतीय ज़मीं पर फर्स्ट क्लास मैच में पहली बार शून्य से उनकी मुलाकात करवाई.

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अंडर 15 में भुवनेश्‍वर को काफी तेज बुखार आ गया था. डॉक्‍टरों ने भुवनेश्‍वर को पूरी तरह से बेड रेस्‍ट बताया था लेकिन क्रिकेट का जुनून उनपर इस कदर था कि उन्‍होंने अपने पिता को मनाया और वह मैच खेलने के लिए गए.  आधुनिक दौर में प्रचलन छोटे नामों का है लेकिन भुवनेश्वर के नाम के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है. भुवनेश्वर की बड़ी बहन रेखा ने बताया कि एक पडिंत ने हमें कहा कि ये लड़का आगे जाकर बड़ा नाम करेगा. इसलिए इसका नाम छोटा मत रखना. इसका नाम लंबा होना चाहिए और पंडित ने भुवनेश्वर का नाम दिया.

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