हापुड़ लिंचिंग केस : सुप्रीम कोर्ट ने आईजी को दिया जांच की निगरानी का आदेश

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, जांच मेरठ जोन के पुलिस महानिरीक्षक की सीधी निगरानी में की जाएगी. मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी.

आईएएनएस
Updated: September 6, 2018, 12:05 PM IST
हापुड़ लिंचिंग केस : सुप्रीम कोर्ट ने आईजी को दिया जांच की निगरानी का आदेश
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Updated: September 6, 2018, 12:05 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के मेरठ जोन के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) को हापुड़ में मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति की भीड़ द्वारा पीट पीटकर की गई हत्या (मॉब लिंचिंग) के मामले की जांच की खुद प्रत्यक्ष निगरानी करने का आदेश दिया. हापुड़ जिले के बजहेरा गांव में 18 जून को भीड़ ने मवेशी व्यापारी कासिम की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी.

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ की पीठ ने बुधवार को कहा कि आईजी मॉब लिंचिंग के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के आदेशों के अनुसार काम करेंगे. सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में विशेष जांच दल द्वारा इस मामले की जांच की मांग को लेकर दायर एक याचिका पर सर्वोच्च अदालत सुनवाई कर रहा है.

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, जांच मेरठ जोन के पुलिस महानिरीक्षक की सीधी निगरानी में की जाएगी. मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी. इससे पहले उत्तर प्रदेश पुलिस ने पीठ को बताया कि मामले के 11 में से 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और मामले में की जांच पुलिस अधीक्षक की निगरानी में नए थानाध्यक्ष द्वारा की जा रही है.

याचिकाकर्ता के वकील समायुद्दीन ने मामले को राज्य से बाहर स्थानांतरित करने पर जोर दिया. समायुद्दीन की भी गोरक्षकों ने पिटाई की थी. पीठ ने पुलिस से पूछा कि जांच पूरी करने में उसे कितना वक्त लगेगा. पुलिस ने कहा कि जांच 60 दिनों में पूरी हो जाएगी. याचिकाकर्ता ने आरोपियों की जमानत रद्द करने के संबंध में अपनी दलील पेश की. उन्होंने कहा कि पुलिस ने लिंचिंग को रोकने में शीर्ष अदालत के निर्देश की अवहेलना की.

सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई को केंद्र और राज्य सरकारों को स्वयंभू रक्षा के नाम पर बर्बर कृत्यों को अंजाम देने की घटनाओं, पीट-पीट कर हत्या की घटनाओं को रोकने और भीड़तंत्र को समाप्त करने के लिए 22 दिशा-निर्देश जारी किए थे. साथ ही, कोर्ट ने उन्हें इस दिशा में कार्य करते हुए रोकथाम, समाधान और दंडात्मक उपाय करने को कहा था.

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