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हाशिमपुरा जनसंहार: 28 साल बाद सभी 16 पुलिसकर्मी बरी

हाशिमपुरा जनसंहार: 28 साल बाद सभी 16 पुलिसकर्मी बरी

दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के हाशिमपुरा में हुए जनसंहार मामले में प्रांतीय सशस्त्र पैदल सेना (पीएसी) के 16 कर्मचारियों को बरी कर दिया। यह जनसंहार 1987 में हुआ था, जिसमें 42 लोगों की हत्या कर दी गई थी।

दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के हाशिमपुरा में हुए जनसंहार मामले में प्रांतीय सशस्त्र पैदल सेना (पीएसी) के 16 कर्मचारियों को बरी कर दिया। यह जनसंहार 1987 में हुआ था, जिसमें 42 लोगों की हत्या कर दी गई थी।

दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के हाशिमपुरा में हुए जनसंहार मामले में प्रांतीय सशस्त्र पैदल सेना (पीएसी) के 16 कर्मचारियों को बरी कर दिया। यह जनसंहार 1987 में हुआ था, जिसमें 42 लोगों की हत्या कर दी गई थी।

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  • Agencies
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    दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के हाशिमपुरा में हुए जनसंहार मामले में प्रांतीय सशस्त्र पैदल सेना (पीएसी) के 16 कर्मचारियों को बरी कर दिया। यह जनसंहार 1987 में हुआ था, जिसमें 42 लोगों की हत्या कर दी गई थी।

    अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजय जिंदल ने पीएसी के 16 कर्मचारियों को हत्या, हत्या के प्रयास, सबूतों से छेड़छाड़ तथा साजिश के आरोपों से बरी कर दिया।

    अदालत ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए कहा कि सबूतों की कमी के कारण मामले में उनकी संलिप्तता साबित नहीं हुई है। इस मामले में कुल 19 लोग आरोपी बनाए गए थे, जिनमें से तीन की सुनवाई के दौरान मौत हो गई।

    ये हत्याएं कथित तौर पर मेरठ में दंगे के दौरान हुईं, जिसमें पीएसी की 41वीं बटालियन द्वारा तलाशी अभियान के दौरान पीड़ितों को हाशिमपुरा मोहल्ले से उठाया गया था।

    मामले में आरोप पत्र साल 1996 में गाजियाबाद के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष दाखिल किया गया था। जनसंहार के पीड़ितों की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को सितंबर 2002 में दिल्ली स्थानांतरित कर दिया।

    यहां की एक सत्र अदालत ने जुलाई 2006 में आरोपियों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, सबूतों से छेड़छाड़ तथा साजिश का आरोप तय किया था।

    घटनाक्रम:-

    मई 1987: उत्तर प्रदेश के मेरठ में 42 लोगों की हत्या

    1996: गाजियाबाद में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष आरोप पत्र दाखिल।

    सितंबर 2002: जनसंहार के पीड़ितों के परिजनों की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को दिल्ली स्थानांतरित किया।

    जुलाई 2006: अदालत ने आरोपियों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, सबूत से छेड़छाड़ तथा साजिश का आरोप तय किया।

    21 जनवरी, 2015: अदालत ने मामले में फैसला सुरक्षित रखा।

    21 मार्च, 2015: अदालत ने 16 पुलिसकर्मियों को बरी किया।

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