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IAS Success Story:-हिंदी मीडियम से यूपीएससी टॉप करने वाले आईएएस निशांत जैन ने तैयारी करने वाले छात्रों को दिया सफलता का यह मंत्र

IAS Success Story:-हिंदी मीडियम से यूपीएससी टॉप करने वाले आईएएस निशांत जैन ने तैयारी करने वाले छात्रों को दिया सफलता का यह मंत्र

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पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ Meerut के रहने वाले आईएएस निशांत जैन(Rajasthan cadre IAS Nishant Jain) की. जिन्होंने अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए अंग्रेजी की बाधाओं को भी दूर किया और हिंदी में यूपीएससी में टॉप कर वह युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए.न्यूज 18 लोकल की टीम से खास बातचीत में उन्होंने अपने कॉलेज की पढ़ाई से लेकर आईएएस बनने तक के अनुभव साझा किए

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    मेरठः-कई बार सफलता न मिले तो अक्सर युवा हार मानकर अपने लक्ष्य को बदल कर दूसरे लक्ष्य को निर्धारित कर लेते हैं.लेकिन आज हम आप को एक ऐसे आईएएस अधिकारी से मिलवाएंगे जिन्होंने मुश्किलों के बावजूद अपने लक्ष्य को नहीं बदला.रिश्तेदारों ने भले ही उनके लक्ष्य को लेकर अनेकों बार उनका मजाक उड़ाया.उसके बावजूद भी उन्होंने अपने लक्ष्य पर फोकस रखा.आज वह राजस्थान में पर्यटन विभाग में बतौर डायरेक्टर के रूप में कार्य कर रहे हैं. जी हां हम बात कर रहे हैं पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ Meerut के रहने वाले आईएएस निशांत जैन(Rajasthan cadre IAS Nishant Jain) की. जिन्होंने अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए अंग्रेजी की बाधाओं को भी दूर किया और हिंदी में यूपीएससी में टॉप कर वह युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए.न्यूज 18 लोकल की टीम से खास बातचीत में उन्होंने अपने कॉलेज की पढ़ाई से लेकर आईएएस बनने तक के अनुभव साझा किए.साथ ही यूपीएससी की तैयारी कर रहें छात्रों को सफलता का मंत्र भी बताया.

    असफलता से लक्ष्य से भटके तो पढ़े दुष्यंत की कविता
    आईएएस निशांत जैन ने कहा कि जो युवा अपने लक्ष्य से भटकने लगे और उनको सफलता न मिले.तो ऐसे हालात में सभी युवाओं को दुष्यंत कुमार की पंक्तियों को पढ़ कर प्रेरणा लेनी चाहिए.क्योंकि दुष्यंत कुमार की पंक्तियां जीवन का आधार बदल देती हैं.उन्होंने खुद अपने जीवन में हिंदी कवि दुष्यंत कुमार को काफी अध्ययन किया है.वह कह सकते हैं कि जो युवा दुष्यंत कुमार की पंक्तियों का अध्ययन करेंगे वह जीवन में अपने लक्ष्य को जरूर प्राप्त कर पाएंगे.युवा असफलता से डर कर अपना रास्ता न बदले.बल्कि किसी भी कॉम्पटीशन की तैयारी करें तो विकल्प ए के साथ-साथ बी पर भी काम करें.

    प्रतियोगिता में मिली जीत कॉलेज के प्राचार्य ने बांटी जलेबी
    कॉलेज की यादों को ताजा करते हुए निशांत जैन ने बताया कि जब वह मेरठ कॉलेज में अध्यन कर रहे थे. तब एक कॉम्पटीशन में उनकी टीम ने जीत हासिल की थी.जब वह जीत की ट्रॉफी के साथ अपने प्रिंसिपल डॉ एसके अग्रवाल के पास लेकर पहुंचे.तो प्रिंसिपल डॉ एसके अग्रवाल ने पूरे कॉलेज में खुशी से जलेबी बटवा दी. जिससे उन्हें एक नई प्रेरणा मिली.

    एडमिशन के दौर में हुए हत्याकांड से लगा था डर
    वर्ष 2004 में जब निशांत जैन ने मेरठ कॉलेज में एडमिशन लिया था.तो उस वक्त कॉलेज में हत्या कांड हो गया था.जिससे उन्होंने सोचा था कि वह कैसे इस कॉलेज में पढ़ाई कर पाएंगे.लेकिन उन्होंने कहा कि कॉलेज के शिक्षकों द्वारा जिस प्रकार छात्रों को अध्ययन कराया जाता था.उस अध्ययन और अन्य साथियों के सहयोग से डर उनके मन से निकला.गौरतलब है कि ग्रेजुएशन खत्म होने के बाद भी निशांत जैन की डाक विभाग में क्लर्क के पद पर नौकरी लग गई थी. इस नौकरी की वजह से उन्हें जब पढ़ाई के लिए समय नहीं मिल पाता.तो नौकरी छोड़ दी.इसके बाद उन्होंने अपनी स्नातक की डिग्री कंप्लीट की.यूपीएससी की तैयारी में जुट गए. पहली बार में विफल रहे उसके बाद उन्हें संसद में अनुवादक की नौकरी मिली.लेकिन निशांत जैन ने हार नहीं मानी. उन्होंने आईएएस की परीक्षा दी.जिसमें उन्हें सफलता मिली और उन्हें राजस्थान कैडर मिला.वर्तमान में वह जयपुर में पर्यटन विभाग में बतौर डायरेक्टर कार्य कर रहे हैं.

    रिपोर्ट
    विशाल भटनागर
    मेरठ

    Tags: मेरठ

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